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भारत-यूरोपीय संघ FTA: ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ की घोषणा 27 जनवरी को, दो अरब लोगों का बाजार बनेगा

नई दिल्ली: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से चर्चित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। दोनों पक्षों ने इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ या ‘सभी डील्स की जननी’ करार दिया है। यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस समझौते को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है, क्योंकि यह लगभग दो दशकों की कड़ी बातचीत के बाद निष्कर्ष पर पहुंचने वाला है।
27 जनवरी को भारत-EU समिट में घोषणा, गणतंत्र दिवस पर EU नेता मुख्य अतिथि
यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा 26 जनवरी 2026 को भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। 27 जनवरी को होने वाले भारत-EU समिट में इस FTA की औपचारिक घोषणा होने की संभावना है। यह समझौता भारत के लिए अब तक का सबसे बड़ा और व्यापक व्यापार समझौता होगा, जो दोनों पक्षों के बीच आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाई देगा।
भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था: EU के लिए अहम साझेदार
भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी और सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है, जो इस साल $4 ट्रिलियन के GDP आंकड़े को पार करने के करीब है। उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने दावोस में विश्व आर्थिक मंच पर कहा कि भारत-EU FTA से लगभग दो अरब लोगों का फ्री मार्केट बनेगा, जो वैश्विक GDP का करीब एक चौथाई होगा। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी न केवल व्यापार बढ़ाएगी, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता और संतुलन भी लाएगी।
ट्रेड बैलेंस और पुराने मुद्दे
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, भारत ने EU को लगभग 76 अरब डॉलर का निर्यात किया, जबकि 61 अरब डॉलर का आयात किया, जिससे ट्रेड सरप्लस रहा। हालांकि 2023 में EU के GSP लाभ वापस लेने से भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हुई। 2007 में शुरू हुई बातचीत 2013 में टैरिफ, बौद्धिक संपदा अधिकार, सतत विकास मानक (जैसे कार्बन बॉर्डर टैक्स) और कृषि-डेयरी बाजार पहुंच जैसे मुद्दों पर अटक गई थी। अब भूराजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन विविधीकरण के बीच दोनों पक्ष डील को अंतिम रूप दे रहे हैं।
आर्थिक और भूराजनीतिक महत्व
समझौते से भारत को GSP रियायतें वापस मिलने की संभावना है। परिधान, दवाइयां, स्टील और पेट्रोलियम उत्पादों पर शुल्क में कमी आएगी, जिससे निर्यात 20-30 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। विनिर्माण क्षेत्र में विदेशी निवेश भी बढ़ेगा। डील में 90 प्रतिशत से अधिक वस्तुओं पर टैरिफ को 5-10 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से खत्म किया जाएगा। वर्तमान में EU में भारतीय सामानों पर औसत टैरिफ 3.8 प्रतिशत है, जबकि भारत में EU सामानों पर 9.3 प्रतिशत। भारत 90 प्रतिशत और EU 95 प्रतिशत तक टैरिफ कटौती चाहता है।
यह समझौता न केवल आर्थिक लाभ देगा, बल्कि वैश्विक व्यापार में भारत की स्थिति को मजबूत करेगा और आपसी रणनीतिक साझेदारी को गहरा करेगा।

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