• January 31, 2026

आरजेडी में ‘नया युग’ शुरू: तेजस्वी यादव बने राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष, बहन रोहिणी आचार्य ने तंज कसा- ‘कठपुतली बने शहजादा’ की ताजपोशी मुबारक

पटना: राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में बड़ा फैसला लिया गया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने अपने छोटे बेटे तेजस्वी यादव को आरजेडी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त कर दिया है। यह फैसला पार्टी में नई पीढ़ी को कमान सौंपने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

बैठक पटना के होटल मौर्या में हुई
आरजेडी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक पटना के होटल मौर्या में रविवार को आयोजित की गई। बैठक में राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों के अलावा सभी प्रदेश इकाइयों के प्रदेश अध्यक्ष, सांसद, विधायक और विधान परिषद सदस्य शामिल हुए। कई प्रदेशों के अध्यक्ष और सदस्य पहले ही पटना पहुंच चुके थे। बैठक में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और मीसा भारती सहित अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।फैसले पर अंतिम मुहर लालू प्रसाद यादव और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों ने लगाई। पार्टी ने इसे ‘नए युग की शुरुआत’ करार देते हुए एक्स पर पोस्ट किया कि तेजस्वी यादव को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। इससे पार्टी में उत्तराधिकार की स्पष्ट रेखा सामने आई है।

रोहिणी आचार्य का तीखा तंज
तेजस्वी यादव की नियुक्ति पर उनकी बहन रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तीखा हमला बोला। बिना नाम लिए उन्होंने पोस्ट किया, “सियासत के शिखर-पुरुष की गौरवशाली पारी का एक तरह से पटाक्षेप, ठकुरसुहाती करने वालों और ‘गिरोह-ए-घुसपैठ’ को उनके हाथों की ‘कठपुतली बने शहजादा’ की ताजपोशी मुबारक…”रोहिणी आचार्य लगातार सोशल मीडिया पर सक्रिय रहती हैं और अपने भाई पर अप्रत्यक्ष निशाना साधती रही हैं। इससे पहले उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए लिखा था कि सवालों से भागने, जवाब देने से मुंह चुराने और लालूवाद के हित की बात करने वालों के साथ दुर्व्यवहार करने वालों को अपने गिरेबान में झांकना होगा।

चुनाव हार के बाद परिवार में कलह
बिहार विधानसभा चुनाव में आरजेडी की हार के बाद लालू परिवार की कलह खुलकर सामने आई थी। रोहिणी आचार्य ने तेजस्वी यादव पर गंभीर आरोप लगाए थे और उनकी आलोचना की थी। उन्होंने पार्टी में ‘घुसपैठियों’ और साजिशकर्ताओं का जिक्र करते हुए लालू प्रसाद यादव के सिद्धांतों की रक्षा की बात कही है।यह नियुक्ति पार्टी को मजबूत करने और संगठन में बदलाव की दिशा में उठाया गया कदम है, लेकिन परिवारिक विवाद ने इसे और चर्चा में ला दिया है।

 

 

 

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