इंडिगो का संकट समाप्त: 10 फरवरी से पूरी तरह सामान्य होंगी उड़ानें, पायलटों की कमी दूर करने का एयरलाइन ने किया दावा
नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी किफायती विमानन सेवा प्रदाता कंपनी इंडिगो (IndiGo) ने अंततः अपने परिचालन संकट से उबरने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। एयरलाइन ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को आश्वस्त किया है कि आगामी 10 फरवरी 2026 के बाद उसकी ओर से एक भी उड़ान रद्द नहीं की जाएगी। कंपनी के अनुसार, पायलटों की भर्ती और प्रशिक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब उनके पास पर्याप्त संख्या में क्रू उपलब्ध है, जिससे विमानों के संचालन में स्थिरता आ गई है। यह खबर उन लाखों यात्रियों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है, जो पिछले दो महीनों से इंडिगो की उड़ानों में हो रही अनिश्चितता और देरी के कारण मानसिक और आर्थिक परेशानी झेल रहे थे।
दिसंबर का वह काला दौर: जब जमीन पर ठिठक गए थे इंडिगो के पहिए
इंडिगो के लिए साल 2025 का अंत किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। दिसंबर की शुरुआत में एयरलाइन के भीतर ऐसी अव्यवस्था फैली कि देश के लगभग हर बड़े हवाई अड्डे पर इंडिगो के यात्री परेशान नजर आए। आंकड़ों के अनुसार, केवल 1 से 9 दिसंबर के बीच इंडिगो ने अपनी कुल 4,290 उड़ानें रद्द कर दी थीं। इतनी बड़ी संख्या में उड़ानों का अचानक रद्द होना भारतीय विमानन इतिहास के सबसे बड़े परिचालन संकटों में से एक माना गया। विमानों के खड़े रहने और यात्रियों के फंसे होने के कारण सोशल मीडिया से लेकर हवाई अड्डों तक भारी आक्रोश देखा गया था।
इस संकट की जड़ में पायलटों की भारी कमी और नए ‘फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन’ (FDTL) नियमों को लागू करने में कंपनी की विफलता थी। नवंबर 2025 से प्रभावी हुए इन नए नियमों का मुख्य उद्देश्य पायलटों और क्रू मेंबर्स की थकान को कम करना और उनके लिए पर्याप्त आराम सुनिश्चित करना था। हालांकि, इंडिगो इन नियमों के अनुरूप अपने रोस्टर और क्रू की संख्या को समय रहते व्यवस्थित नहीं कर पाई। इसका परिणाम यह हुआ कि नियमों के उल्लंघन के डर से और पायलटों के उपलब्ध न होने के कारण उड़ानों को रद्द करने के अलावा एयरलाइन के पास कोई विकल्प नहीं बचा।
DGCA की सख्ती और अस्थायी राहत का दौर
मामले की गंभीरता को देखते हुए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने न केवल इंडिगो को कारण बताओ नोटिस जारी किया, बल्कि यात्रियों के हितों की रक्षा के लिए हस्तक्षेप भी किया। डीजीसीए ने पाया कि इंडिगो के संकट का मुख्य कारण क्रू मैनेजमेंट में गंभीर खामियां, कम ऑपरेशनल बफर और कमजोर सिस्टम थे। हालात को बेकाबू होते देख सरकार ने 6 से 30 दिसंबर के बीच इंडिगो को एफडीटीएल नियमों में अस्थायी रूप से कुछ छूट प्रदान की, ताकि फंसे हुए यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाया जा सके।
इस दौरान नियामक संस्था ने इंडिगो के ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर और देश के प्रमुख एयरपोर्ट्स पर विशेष निरीक्षक और पैसेंजर हेल्प टीमें तैनात की थीं। इंडिगो पर इतनी कड़ी निगरानी रखी गई कि उसे रोजाना, साप्ताहिक और पाक्षिक आधार पर अपनी प्रगति रिपोर्ट डीजीसीए को सौंपनी पड़ती थी। इन रिपोर्टों में उड़ानों के रद्द होने का डेटा, पायलटों की भर्ती की स्थिति, ट्रेनिंग शेड्यूल और स्टैंडबाय क्रू के उपयोग की विस्तृत जानकारी मांगी गई थी। सरकार के इसी कड़े रुख और निरंतर निगरानी का परिणाम अब सकारात्मक रूप में सामने आ रहा है।
आंकड़ों की बाजीगरी से स्थिरता की ओर: क्या कहते हैं नए नंबर
इंडिगो ने अब डीजीसीए को जो ताजा आंकड़े उपलब्ध कराए हैं, वे काफी आश्वस्त करने वाले नजर आते हैं। एयरलाइन के दावे के अनुसार, 10 फरवरी तक के सुचारू संचालन के लिए उन्हें 2,280 कैप्टन की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में उनके पास 2,400 कैप्टन मौजूद हैं। इसी तरह, 2,050 फर्स्ट ऑफिसर्स की जरूरत के मुकाबले अब एयरलाइन के पास 2,240 फर्स्ट ऑफिसर्स का दस्ता तैयार है। जरूरत से अधिक पायलटों की उपलब्धता यह संकेत देती है कि कंपनी ने अपने ‘ऑपरेशनल बफर’ को मजबूत कर लिया है।
डीजीसीए ने मंगलवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर इस बात की पुष्टि की कि इंडिगो अब स्थिर संचालन के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रही है। नियामक ने संतोष जताया है कि एयरलाइन ने अपनी व्यवस्थाओं में आवश्यक सुधार कर लिए हैं। इंडिगो का कहना है कि अब उनके पास मौजूदा नेटवर्क की सभी उड़ानों को बिना किसी व्यवधान के संचालित करने के लिए पर्याप्त क्रू स्ट्रेंथ है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 10 फरवरी को एफडीटीएल नियमों से मिली अस्थायी छूट समाप्त होने के बाद भी इंडिगो का दावा है कि उनके संचालन पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
भविष्य की चुनौतियां और सरकार की पैनी नजर
भले ही इंडिगो ने सुधार का दावा किया है, लेकिन डीजीसीए अभी भी ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। नियामक ने स्पष्ट कर दिया है कि 10 फरवरी के बाद भी इंडिगो की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाएगी। विशेष रूप से पायलटों के ड्यूटी रोस्टर की वास्तविक स्थिति, स्टैंडबाय क्रू की उपलब्धता और सिस्टम की मजबूती की नियमित समीक्षा की जाएगी। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि भविष्य में फिर कभी ‘पायलट संकट’ के नाम पर आम यात्रियों को बंधक न बनाया जाए।
दिसंबर के संकट ने यह भी सिखाया है कि भारतीय विमानन क्षेत्र में तेजी से विस्तार के साथ-साथ मानव संसाधन प्रबंधन और नियामक नियमों का सख्ती से पालन करना कितना अनिवार्य है। इंडिगो, जो भारतीय आसमान के लगभग 60% हिस्से पर कब्जा रखती है, उसके संचालन में आने वाली एक छोटी सी दरार भी पूरे देश के यातायात को अस्त-व्यस्त कर सकती है। अब सबकी निगाहें 10 फरवरी की समयसीमा पर टिकी हैं। यात्रियों को उम्मीद है कि इंडिगो अपने वादों पर खरा उतरेगी और हवाई यात्रा का अनुभव फिर से विश्वसनीय और तनावमुक्त होगा।