तकनीकी खराबी के बाद दावोस रवाना हुए राष्ट्रपति ट्रंप: एयर फोर्स वन की वापसी और वैश्विक मंच पर अमेरिकी नीतियों का शंखनाद
वाशिंगटन डीसी/दावोस: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की स्विट्जरलैंड यात्रा के दौरान मंगलवार शाम एक बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला, जब उनके मुख्य विमान ‘एयर फोर्स वन’ में तकनीकी खराबी आने के कारण उसे बीच रास्ते से वापस लौटना पड़ा। हालांकि, इस बाधा के बावजूद राष्ट्रपति ट्रंप का दावोस दौरा जारी रहा और वे बैकअप विमान के माध्यम से विश्व आर्थिक मंच (WEF) की 56वीं वार्षिक बैठक में हिस्सा लेने के लिए रवाना हो गए। दोबारा राष्ट्रपति पद संभालने के बाद यह ट्रंप की दावोस में पहली प्रत्यक्ष उपस्थिति है, जिस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं।
विमान में विद्युत खराबी और जॉइंट बेस एंड्रयूज की ओर वापसी
मंगलवार की शाम जब राष्ट्रपति ट्रंप का विशेष विमान एयर फोर्स वन स्विट्जरलैंड के लिए जॉइंट बेस एंड्रयूज से उड़ान भर चुका था, तो किसी को इस बात का अंदाजा नहीं था कि अगले एक घंटे के भीतर स्थितियां बदल जाएंगी। उड़ान भरने के लगभग एक घंटे बाद, विमान के भीतर कुछ असामान्य तकनीकी संकेत मिले। विमान में मौजूद पत्रकारों और क्रू सदस्यों के अनुसार, टेकऑफ के कुछ ही देर बाद प्रेस केबिन की लाइटें अचानक कुछ समय के लिए गुल हो गईं। हालांकि उस समय कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई थी, लेकिन केबिन में बिजली की इस लुकाछिपी ने यात्रियों के बीच सुगबुगाहट पैदा कर दी थी।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने बाद में इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि उड़ान भरने के कुछ समय बाद विमान में एक ‘मामूली विद्युत तकनीकी समस्या’ का पता चला। सुरक्षा प्रोटोकॉल और राष्ट्रपति की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए, पायलटों और सुरक्षा दल ने एहतियातन विमान को वापस वॉशिंगटन डीसी क्षेत्र में उतारने का निर्णय लिया। उड़ान के लगभग आधे घंटे बाद पत्रकारों को आधिकारिक तौर पर सूचित किया गया कि विमान वापस लौट रहा है। एयर फोर्स वन सुरक्षित रूप से जॉइंट बेस एंड्रयूज पर उतरा, जहां से राष्ट्रपति और उनके उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल को तुरंत एक बैकअप विमान में स्थानांतरित किया गया।
पुराने होते विमान और कतर के शाही उपहार की चर्चा
इस तकनीकी खराबी ने एक बार फिर अमेरिका के राष्ट्रपति बेड़े के पुराने होते विमानों पर बहस छेड़ दी है। वर्तमान में ‘एयर फोर्स वन’ के रूप में सेवा दे रहे दोनों बोइंग 747-200B विमान लगभग चार दशक पुराने हो चुके हैं। हालांकि ये विमान अत्यधिक उन्नत सुरक्षा प्रणालियों, रेडिएशन शील्डिंग और एंटी-मिसाइल डिफेंस सिस्टम से लैस हैं, लेकिन इनकी उम्र अब चिंता का विषय बनती जा रही है। बोइंग कंपनी इन विमानों के नए संस्करण तैयार करने पर काम कर रही है, लेकिन यह परियोजना तकनीकी जटिलताओं और बजट संबंधी मुद्दों के कारण लगातार देरी का सामना कर रही है।
इस बीच, पिछले साल कतर के शाही परिवार द्वारा राष्ट्रपति ट्रंप को उपहार में दिए गए एक लग्जरी बोइंग 747-8 जंबो जेट का मुद्दा भी चर्चा में आ गया। इस विमान को एयर फोर्स वन के बेड़े में शामिल करने की प्रक्रिया जारी है, लेकिन इसे राष्ट्रपति की सुरक्षा आवश्यकताओं और सैन्य संचार प्रणालियों के अनुरूप ढालने में समय लग रहा है। प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने इस घटना के बाद हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए कतर का वह नया जेट अब एक ‘काफी बेहतर विकल्प’ प्रतीत हो रहा है।
दावोस में ट्रंप का संबोधन और ‘अमेरिका फर्स्ट’ की गूंज
तकनीकी बाधाओं को पार कर दावोस पहुंचने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप का आज का दिन काफी व्यस्त रहने वाला है। विश्व आर्थिक मंच की इस 56वीं वार्षिक बैठक में वे अमेरिकी नीतियों पर एक प्रमुख संबोधन देने वाले हैं। व्हाइट हाउस के सूत्रों के अनुसार, ट्रंप के इस भाषण का केंद्र बिंदु एक बार फिर ‘अमेरिका फर्स्ट’ की आर्थिक नीति होगी। रवाना होने से पहले पत्रकारों से संक्षिप्त बातचीत में राष्ट्रपति ने अपनी सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने विशेष रूप से कम होती गैस कीमतों और मजबूत होती अमेरिकी अर्थव्यवस्था का जिक्र किया।
ट्रंप का दावोस दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब वे घरेलू स्तर पर अपनी आर्थिक नीतियों को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। वे वैश्विक नेताओं के सामने यह संदेश देना चाहते हैं कि अमेरिका निवेश के लिए सबसे सुरक्षित और आकर्षक स्थान है। जानकारों का मानना है कि उनके संबोधन में ऊर्जा स्वतंत्रता, व्यापारिक समझौतों की समीक्षा और वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच अमेरिकी हितों की रक्षा जैसे विषय प्रमुखता से शामिल होंगे।
विश्व आर्थिक मंच 2026: चुनौतियों के बीच वैश्विक मंथन
दावोस में 19 से 23 जनवरी 2026 के बीच आयोजित हो रही यह बैठक दुनिया के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस साल की थीम तकनीकी बदलाव और आर्थिक अनिश्चितता के दौर में वैश्विक सहयोग पर केंद्रित है। बैठक में 130 से अधिक देशों के करीब 3,000 वैश्विक नेता, कॉर्पोरेट सीईओ और नीति निर्माता हिस्सा ले रहे हैं। यह शिखर सम्मेलन एक ऐसे दौर में हो रहा है जब दुनिया कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रही है।
भू-राजनीतिक तनाव, विशेष रूप से विभिन्न क्षेत्रों में जारी संघर्ष और व्यापारिक युद्धों की आशंका ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है। इसके साथ ही, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे तेज तकनीकी बदलावों ने भी अर्थव्यवस्थाओं के सामने नए अवसर और खतरे पैदा किए हैं। राष्ट्रपति ट्रंप की इस मंच पर मौजूदगी इसलिए भी खास है क्योंकि वे बहुपक्षीय संस्थानों के प्रति अक्सर संशयवादी रहे हैं, लेकिन उनकी ‘डील-मेकिंग’ की क्षमता वैश्विक आर्थिक ढांचे में बड़े बदलाव ला सकती है।
सुरक्षा और कूटनीति का संगम
भले ही एयर फोर्स वन की तकनीकी खराबी ने यात्रा की शुरुआत में थोड़ा व्यवधान डाला हो, लेकिन बैकअप विमान की सुचारू व्यवस्था ने यह स्पष्ट कर दिया कि अमेरिकी राष्ट्रपति का सचिवालय ऐसी किसी भी आपात स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार रहता है। एयर फोर्स वन सिर्फ एक विमान नहीं है, बल्कि यह हवा में उड़ता हुआ एक ‘व्हाइट हाउस’ है। इसमें अत्याधुनिक संचार सुविधाएं होती हैं, जिससे राष्ट्रपति दुनिया के किसी भी कोने से अमेरिकी सेना और प्रशासन के साथ निरंतर संपर्क बनाए रख सकते हैं।
दावोस में ट्रंप की सुरक्षा के लिए भी अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। स्विस अधिकारियों और अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने मिलकर दावोस के पहाड़ों को एक किले में तब्दील कर दिया है। ट्रंप आज जब मंच पर उतरेंगे, तो न केवल उनकी बातों का आर्थिक प्रभाव होगा, बल्कि उनकी उपस्थिति ही वैश्विक कूटनीति के समीकरणों को प्रभावित करने वाली होगी।
निष्कर्षतः, राष्ट्रपति ट्रंप की यह दावोस यात्रा उनके दूसरे कार्यकाल के शुरुआती बड़े विदेशी दौरों में से एक है। एयर फोर्स वन की तकनीकी खराबी भले ही चर्चा का विषय बनी हो, लेकिन सबका ध्यान अब उनके संबोधन और उन द्विपक्षीय मुलाकातों पर है जो आने वाले समय में वैश्विक व्यापार और राजनीति की दिशा तय करेंगे। दुनिया यह देखना चाहती है कि ट्रंप अपनी नई पारी में ‘अमेरिका फर्स्ट’ के एजेंडे को वैश्विक सहयोग के साथ कैसे संतुलित करते हैं।