• January 19, 2026

आतंकवाद पर भारत का पोलैंड को कड़ा संदेश: जयशंकर ने कश्मीर और पाकिस्तान के संयुक्त बयान पर जताई सख्त नाराजगी, द्विपक्षीय संबंधों में स्पष्टता की मांग

नई दिल्ली: भारत ने वैश्विक मंच पर एक बार फिर आतंकवाद और अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता को लेकर कड़ा रुख अख्तियार किया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पोलैंड के शीर्ष नेतृत्व के साथ नई दिल्ली में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान स्पष्ट कर दिया कि आतंकवाद के मुद्दे पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। भारत ने पोलैंड को कड़े शब्दों में आगाह किया है कि वह भारत के पड़ोस में सक्रिय आतंकी ढांचे को किसी भी प्रकार का राजनीतिक या कूटनीतिक बढ़ावा न दे। यह कूटनीतिक संदेश उस समय आया है जब हाल के दिनों में पोलैंड और पाकिस्तान के बीच बढ़ती नजदीकियों और कश्मीर मुद्दे पर उनके साझा बयानों ने नई दिल्ली की चिंताएं बढ़ा दी थीं।

विदेश मंत्री जयशंकर ने पोलैंड के विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की के साथ हुई द्विपक्षीय वार्ता में न केवल आतंकवाद पर चिंता जताई, बल्कि यूक्रेन संघर्ष के बहाने भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘चुनिंदा निशाना’ बनाए जाने पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। भारत का यह रुख दर्शाता है कि नई दिल्ली अब अपनी रणनीतिक स्वायत्तता और राष्ट्रीय सुरक्षा के हितों पर किसी भी देश के दोहरे मापदंड स्वीकार करने के मूड में नहीं है।

कश्मीर पर पोलैंड-पाकिस्तान जुगलबंदी और भारत का असंतोष

बैठक के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पिछले साल अक्टूबर में पोलैंड और पाकिस्तान द्वारा जारी किए गए उस संयुक्त बयान का मुद्दा प्रमुखता से उठाया, जिसमें कश्मीर का उल्लेख किया गया था। भारत ने इसे अपनी क्षेत्रीय अखंडता के प्रति पोलैंड के ‘असंतुलित’ नजरिए के रूप में देखा। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि पोलैंड भारत की सुरक्षा चुनौतियों और इस क्षेत्र के इतिहास से भली-भांति परिचित है, ऐसे में पाकिस्तान जैसे देश के साथ मिलकर कश्मीर पर टिप्पणी करना भारत-पोलैंड की रणनीतिक साझेदारी की भावना के विपरीत है।

भारत ने पोलैंड से अपेक्षा जताई कि वह सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर एक स्पष्ट और संतुलित रुख अपनाए। जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि पड़ोस में सक्रिय आतंकी ढांचे को किसी भी रूप में समर्थन देना, चाहे वह प्रत्यक्ष हो या कूटनीतिक बयानों के माध्यम से परोक्ष हो, पूरी तरह से अस्वीकार्य है। उन्होंने पोलैंड को याद दिलाया कि आतंकवाद एक वैश्विक खतरा है और इसे किसी भी राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए घातक है। भारत का यह संदेश पोलैंड के लिए एक स्पष्ट संकेत था कि उसे अपने कूटनीतिक बयानों में भारत की संवेदनशीलता का सम्मान करना होगा।

यूक्रेन संघर्ष: भारत पर ‘चुनिंदा हमले’ और ऊर्जा खरीद का विवाद

बैठक में केवल क्षेत्रीय आतंकवाद ही नहीं, बल्कि यूक्रेन संघर्ष से उपजी वैश्विक परिस्थितियों पर भी गंभीर चर्चा हुई। विदेश मंत्री ने यूक्रेन युद्ध को लेकर पश्चिमी देशों और पोलैंड द्वारा भारत की आलोचना किए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया। जयशंकर ने तर्क दिया कि रूस से ऊर्जा खरीद को लेकर भारत को बार-बार निशाना बनाया जाना न तो उचित है और न ही न्यायसंगत। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि जब यूरोपीय देश स्वयं रूस से भारी मात्रा में ऊर्जा आयात कर रहे थे, तब भारत को लक्षित करना ‘दोहरे मापदंड’ का प्रमाण है।

दिलचस्प बात यह रही कि इस चर्चा के दौरान पोलैंड के विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की ने भी भारत के तर्क से सहमति जताई। उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ मामलों में भारत को वास्तव में चुनिंदा तौर पर ‘टारगेट’ किया गया है। भारत ने यह साफ कर दिया कि उसकी रूस के साथ ऊर्जा साझेदारी विशुद्ध रूप से अपने नागरिकों के आर्थिक हितों और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है, न कि किसी युद्ध का समर्थन करने के लिए। इस बातचीत ने यूक्रेन मुद्दे पर भारत के खिलाफ चल रहे अंतरराष्ट्रीय नैरेटिव को संतुलित करने में मदद की।

रणनीतिक साझेदारी और 7 अरब डॉलर का बढ़ता व्यापार

विवादित मुद्दों पर सख्त चर्चा के बावजूद, दोनों विदेश मंत्रियों ने भारत और पोलैंड के बीच मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों की सराहना भी की। जयशंकर ने याद दिलाया कि अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पोलैंड यात्रा ने दोनों देशों के रिश्तों को एक ऐतिहासिक मोड़ दिया था, जब संबंधों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ (Strategic Partnership) का दर्जा दिया गया था। आज भारत और पोलैंड के बीच व्यापार करीब 7 अरब डॉलर के आंकड़े को छू रहा है।

दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, रक्षा उत्पादन, स्वच्छ तकनीक और डिजिटल नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और अधिक विस्तार देने पर सहमति व्यक्त की। जयशंकर ने बताया कि पोलैंड में भारतीय कंपनियों का निवेश लगातार बढ़ रहा है, जिससे न केवल पोलैंड की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है, बल्कि वहां रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं। रक्षा क्षेत्र में सहयोग को लेकर भी दोनों देशों ने भविष्य में संयुक्त उत्पादन और तकनीक साझा करने की संभावनाओं पर चर्चा की, जो भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ नीति के अनुकूल है।

‘डोब्री महाराजा’ की विरासत और ऐतिहासिक मानवीय संबंध

बैठक के समापन पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दोनों देशों के बीच के उन गहरे मानवीय और ऐतिहासिक संबंधों को याद किया जो वर्तमान कूटनीति की असली बुनियाद हैं। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान की ‘डोब्री महाराजा’ (जामनगर के महाराजा जाम साहब दिग्विजयसिंहजी) की परंपरा का जिक्र किया। उस समय महाराजा ने नाजी जर्मनी से बचकर आए सैकड़ों पोलिश बच्चों को भारत में शरण दी थी, उनके भोजन, रहने और शिक्षा का प्रबंध किया था।

जयशंकर ने कहा कि यही मानवीय जुड़ाव और सहानुभूति आज भी दोनों देशों के रिश्तों में एक विशेष भावनात्मक मजबूती प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि भारत और पोलैंड के रिश्ते केवल व्यापारिक आंकड़ों पर नहीं, बल्कि साझा इतिहास और मूल्यों पर टिके हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस ऐतिहासिक नींव को बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि पोलैंड भारत की सुरक्षा चिंताओं के प्रति गंभीर रहे और आतंकवाद जैसे वैश्विक संकट पर भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा हो। इस बैठक ने भविष्य के भारत-पोलैंड संबंधों के लिए एक नया और स्पष्ट रोडमैप तैयार किया है, जिसमें सहयोग और स्पष्टवादिता दोनों का संतुलन है।

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