महाराष्ट्र निकाय चुनाव 2026 लाइव: मुंबई में लोकतंत्र का महापर्व, बीएमसी के दंगल में दिग्गजों ने डाली आहुति
मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई आज एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। गुरुवार सुबह से ही बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के 227 वार्डों के लिए मतदान की प्रक्रिया सुचारू लेकिन गहमागहमी के बीच शुरू हो गई है। साल 2026 के ये निकाय चुनाव न केवल मुंबई के भविष्य के विकास का खाका खींचेंगे, बल्कि यह महाराष्ट्र की राजनीति में शक्ति संतुलन का सबसे बड़ा लिटमस टेस्ट भी साबित होने वाले हैं। विशेष रूप से शिवसेना (यूबीटी) के लिए यह चुनाव साख और अस्तित्व की लड़ाई बन गया है, जहाँ उद्धव ठाकरे की प्रतिष्ठा सीधे तौर पर दांव पर लगी है। सुबह से ही मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जिसमें आम नागरिक से लेकर बॉलीवुड सितारे और खेल जगत की हस्तियां अपनी जिम्मेदारी निभाने पहुंच रही हैं।
सुरक्षा के कड़े घेरे में मायानगरी और पुलिस की मुस्तैदी
मुंबई जैसे विशाल महानगर में चुनाव संपन्न कराना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। मुंबई पुलिस के 28,000 से अधिक जवानों को शहर के कोने-कोने में तैनात किया गया है। संवेदनशील इलाकों और मतदान केंद्रों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल और सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी रखी जा रही है। पुलिस कमिश्नर ने स्वयं व्यवस्थाओं का जायजा लिया है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। 227 वार्डों में फैले हजारों पोलिंग बूथों पर सुरक्षाकर्मियों की तैनाती का मुख्य उद्देश्य मतदाताओं के मन में सुरक्षा का भाव पैदा करना है, ताकि वे बिना किसी भय के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।
शिवसेना यूबीटी की साख और चुनाव आयोग पर उठते सवाल
बीएमसी पर दशकों तक काबिज रही शिवसेना के विभाजन के बाद यह पहला बड़ा निकाय चुनाव है। शिवसेना (यूबीटी) के नेता आनंद दुबे ने सुबह-सुबह अपने मताधिकार का प्रयोग किया, लेकिन उनके बयान ने चुनाव की प्रशासनिक तैयारियों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। मतदान के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए दुबे ने कहा कि यद्यपि वे चाहते हैं कि शत-प्रतिशत मतदान हो, लेकिन उन्हें स्वयं मतदान प्रक्रिया में कुछ तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट सुचारू रूप से काम नहीं कर रही है।
आनंद दुबे ने डिजिटल पारदर्शिता पर जोर देते हुए कहा कि उम्मीदवारों की जानकारी और उनके विवरण डिजिटल स्क्रीन पर स्पष्ट रूप से दिखने चाहिए थे, जो कि कई केंद्रों पर नदारद हैं। उन्होंने बताया कि पूरे शहर से लोग इस प्रकार की शिकायतें कर रहे हैं। दुबे का मानना है कि इस तरह की प्रशासनिक खामियां मतदाताओं के उत्साह को कम कर सकती हैं। उन्होंने जनता से अपील की कि वे इन बाधाओं के बावजूद बाहर निकलें और केवल विकास के एजेंडे पर अपना वोट दें।
सितारों का जमावड़ा और मतदान के प्रति उनकी जागरूकता
मुंबई के चुनावों में हमेशा से ही ग्लैमर का तड़का लगता रहा है, लेकिन इस बार फिल्मी सितारों ने केवल उपस्थिति ही नहीं दर्ज कराई, बल्कि मतदान को एक अनिवार्य कर्तव्य के रूप में प्रचारित भी किया। दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर ने इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति अपनी निष्ठा का परिचय देते हुए सभी को हैरान कर दिया। नाना पाटेकर विशेष रूप से पुणे से 3-4 घंटे की यात्रा तय कर मुंबई पहुंचे। उन्होंने कहा, ‘मैं इस एक वोट की अहमियत को समझता हूं, इसलिए इतनी दूर से आया हूं।’ मतदान के तुरंत बाद वे वापस पुणे के लिए रवाना हो गए, लेकिन जाने से पहले उन्होंने मुंबईकरों से अपील की कि यदि वे शहर का भला चाहते हैं तो वोट जरूर करें।
इसी कड़ी में मशहूर क्रिकेटर और ‘भारत रत्न’ सचिन तेंदुलकर ने भी अपने परिवार के साथ मतदान केंद्र पहुंचकर वोट डाला। तेंदुलकर ने इस चुनाव को ‘बेहद अहम’ करार दिया। उन्होंने कहा कि मतदान वह जरिया है जिसके माध्यम से नागरिक अपने विचार और अपनी अपेक्षाएं सरकार के सामने रख सकते हैं। उनके साथ ही फिल्म अभिनेत्री ट्विंकल खन्ना ने भी वोट डाला। ट्विंकल ने मीडिया से बात करते हुए एक बेहतर मुंबई की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि वे एक बड़े बदलाव और विकास की सकारात्मक सोच के साथ मतदान कर रही हैं। इन दिग्गजों की उपस्थिति ने मतदान केंद्रों पर युवाओं के बीच एक नई ऊर्जा का संचार किया है।
सत्ता के गलियारों से मतदान केंद्र तक का सफर
राजनीतिक गलियारों के बड़े चेहरों ने भी सुबह-सुबह अपने परिवार के साथ लोकतांत्रिक जिम्मेदारी निभाई। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल अपनी पत्नी सीमा गोयल के साथ मतदान करने पहुंचे। गोयल ने इस दौरान मुंबई के विकास की गति को बनाए रखने की बात कही। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही गुटों के लिए ये चुनाव 2029 के विधानसभा चुनावों की पूर्वपीठिका माने जा रहे हैं। यही कारण है कि वार्ड स्तर के इस चुनाव में भी राष्ट्रीय स्तर के नेताओं ने पूरी ताकत झोंक दी है। बीएमसी का बजट कई छोटे राज्यों के बजट से भी बड़ा है, इसलिए इस पर नियंत्रण पाने के लिए हर दल एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है।
मतदाताओं की नाराजगी और तकनीकी खामियों का साया
जहाँ एक तरफ उत्साह का माहौल है, वहीं दूसरी तरफ कुछ मतदाता प्रशासन की लापरवाही से नाराज भी दिखे। मुंबई के कई केंद्रों से ऐसी खबरें आईं जहाँ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से गायब थे या उन्हें गलत बूथ नंबर आवंटित कर दिए गए थे। एक नाराज मतदाता ने अपना दुख साझा करते हुए कहा कि जो पर्ची उन्हें दी गई थी, उस पर अंकित नंबर वाला बूथ केंद्र पर मौजूद ही नहीं था। उन्हें एक केंद्र से दूसरे केंद्र भटकाया गया। मतदाता ने गुस्से में कहा, ‘अगर आम आदमी को वोट देने के लिए इस तरह परेशान होना पड़े, तो यह लोकतंत्र नहीं बल्कि समय की बर्बादी है।’ कई लोगों ने बिना वोट डाले ही घर वापस जाने का फैसला किया, जो चुनाव आयोग की तैयारियों पर एक गंभीर सवाल खड़ा करता है।
प्रशासनिक स्तर पर इन शिकायतों को दूर करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन डिजिटल युग में वेबसाइट का धीमा होना और डेटा मिसमैच होना एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। डिजिटल इंडिया के दौर में मतदाताओं की अपेक्षा है कि उन्हें पोलिंग बूथ ढूंढने और उम्मीदवार की जानकारी प्राप्त करने में कोई असुविधा न हो।
मुंबई के भविष्य का फैसला और विकास की उम्मीद
बीएमसी चुनाव 2026 केवल पार्षदों को चुनने का चुनाव नहीं है, बल्कि यह मुंबई की सड़कों, नालों, स्वास्थ्य सुविधाओं और शिक्षा व्यवस्था के कायाकल्प का चुनाव है। शिवसेना यूबीटी के लिए जहाँ यह अपने गढ़ को बचाने की चुनौती है, वहीं भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के लिए यह शहर पर अपना वर्चस्व स्थापित करने का अवसर है। कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दल भी अपनी खोई हुई जमीन तलाशने की कोशिश कर रहे हैं।
जैसे-जैसे दिन चढ़ रहा है, मुंबई की सड़कों पर हलचल बढ़ती जा रही है। दोपहर तक मतदान प्रतिशत में और बढ़ोतरी होने की संभावना है। शाम तक चलने वाली इस प्रक्रिया के बाद यह तय होगा कि मुंबई की जनता ने किसके वादों पर भरोसा जताया है और किसे शहर की चाबी सौंपने का मन बनाया है। फिलहाल, सुरक्षा बलों की मुस्तैदी और सेलिब्रिटीज़ की अपील के बीच मुंबई अपनी किस्मत ईवीएम में कैद कर रही है।