• January 19, 2026

बांग्लादेश में फिर दहला हिंदू समुदाय: व्यापारी खोकन दास को जिंदा जलाकर मारा, तीन कट्टरपंथी गिरफ्तार

ढाका/शरियतपुर: बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसा का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। कट्टरपंथी तत्वों द्वारा हिंदू समुदाय को निशाना बनाने की ताजा और सबसे भयावह घटना शरियतपुर जिले से सामने आई है, जहां एक हिंदू व्यापारी खोकन चंद्र दास की बेरहमी से हत्या कर दी गई। हमलावरों ने न केवल उन पर धारदार हथियारों से वार किए, बल्कि उनके सिर पर पेट्रोल डालकर उन्हें जिंदा जला दिया। इस दिल दहला देने वाले मामले में रविवार को बांग्लादेश की कुलीन सुरक्षा इकाई, रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) ने तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। यह घटना पड़ोसी देश में अल्पसंख्यकों के बीच व्याप्त असुरक्षा और कट्टरपंथ के बढ़ते प्रभाव को फिर से उजागर करती है।

हमले की रूह कंपा देने वाली कहानी: ऑटो से उतारकर जलाया

50 वर्षीय खोकन चंद्र दास, जो शरियतपुर जिले के केउरभंगा बाजार में दवा की दुकान और मोबाइल बैंकिंग का व्यवसाय चलाते थे, बुधवार की रात अपने घर लौट रहे थे। वह एक ऑटो रिक्शा में सवार थे, तभी पहले से घात लगाए बैठे हमलावरों ने उनका रास्ता रोक लिया। ढाका से लगभग 100 किलोमीटर दक्षिण में स्थित इस इलाके में हमलावरों ने उन्हें वाहन से बाहर खींच लिया।

प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस रिपोर्टों के अनुसार, हमलावरों ने पहले खोकन दास की बेरहमी से पिटाई की और फिर धारदार हथियारों से उन पर ताबड़तोड़ वार किए। इतने से भी जब हमलावरों का मन नहीं भरा, तो उन्होंने अत्यंत क्रूरता दिखाते हुए खोकन दास के सिर पर पेट्रोल उड़ेल दिया और आग लगा दी। जलती हुई अवस्था में खुद को बचाने के लिए खोकन दास पास के एक तालाब में कूद गए। स्थानीय लोगों द्वारा शोर मचाने के बाद हमलावर अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए।

इलाज के दौरान तोड़ा दम, मृत्यु पूर्व बयान बना अहम कड़ी

तालाब से निकाले जाने के बाद स्थानीय लोगों ने गंभीर रूप से झुलसे खोकन दास को तुरंत शरियतपुर सदर अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, उनकी हालत इतनी नाजुक थी कि डॉक्टरों ने उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद तत्काल ढाका रेफर कर दिया। ढाका के अस्पताल में डॉक्टरों ने बताया कि खोकन के शरीर का ऊपरी हिस्सा बुरी तरह जल चुका था। उनके चेहरे, सिर और हाथों पर गहरे जख्म थे और पेट में धारदार हथियार के वार से गंभीर घाव हो गए थे।

तीन दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ने के बाद शनिवार को खोकन चंद्र दास ने दम तोड़ दिया। शरियतपुर की पुलिस अधीक्षक रौनक जहां ने मीडिया को जानकारी दी कि पीड़ित ने अपनी मृत्यु से पहले होश में रहते हुए हमलावरों की पहचान की थी और उनके नाम बताए थे। खोकन दास का यह मृत्यु पूर्व बयान (Dying Declaration) पुलिस के लिए जांच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुआ, जिसके आधार पर छापेमारी शुरू की गई।

RAB की बड़ी कार्रवाई: ढाका से 100 किमी दूर से पकड़े गए हत्यारे

खोकन दास की मौत के बाद बांग्लादेश में आक्रोश फैल गया, जिसके बाद रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) को मामले की कमान सौंपी गई। रविवार सुबह आरएबी की एक टीम ने ढाका से लगभग 100 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित किशोरगंज जिले में छापेमारी की और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान 27 वर्षीय सोहाग खान, 21 वर्षीय रब्बी मोल्या और 25 वर्षीय पलाश सरदार के रूप में हुई है।

आरएबी मदारीपुर कैंप के कंपनी कमांडर और पुलिस अधीक्षक मीर मोनिर हुसैन ने बताया कि आरोपी अपनी पहचान छिपाकर किशोरगंज में छिपे हुए थे। उन्हें फिलहाल मदारीपुर कैंप लाया जा रहा है, जो शरियतपुर से करीब 20 किलोमीटर दूर है। पुलिस अब इन आरोपियों से पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस जघन्य हत्याकांड के पीछे क्या केवल व्यक्तिगत रंजिश थी या इसके पीछे किसी बड़े कट्टरपंथी समूह का हाथ है।

अल्पसंख्यकों में खौफ: दिसंबर से अब तक पांचवीं मौत

इस घटना ने बांग्लादेश में रहने वाले अल्पसंख्यकों के मन में डर को और गहरा कर दिया है। ‘बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद’ के प्रवक्ता काजोल देबनाथ ने इस हत्या की कड़े शब्दों में निंदा की है। देबनाथ ने एक चिंताजनक आंकड़ा पेश करते हुए बताया कि दिसंबर महीने से अब तक हिंदू समुदाय के किसी व्यक्ति की यह पांचवीं मौत है। उन्होंने आरोप लगाया कि बांग्लादेश के विभिन्न हिस्सों में कट्टरपंथी समूह योजनाबद्ध तरीके से अल्पसंख्यक धर्मों के लोगों को डराने-धमकाने और उन्हें देश छोड़ने पर मजबूर करने की कोशिश कर रहे हैं।

काजोल देबनाथ ने कहा कि जिस तरह से खोकन दास को जलाकर मारा गया, वह कट्टरपंथियों की बढ़ती क्रूरता का प्रतीक है। परिषद ने सरकार से मांग की है कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए विशेष कदम उठाए जाएं और इस तरह के मामलों में शामिल दोषियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए मौत की सजा दी जाए। मानवाधिकार संगठनों का भी कहना है कि हालिया राजनीतिक अस्थिरता का फायदा उठाकर कट्टरपंथी ताकतें हिंदू समुदाय को निशाना बना रही हैं।

न्याय की मांग और भविष्य की चिंता

खोकन चंद्र दास की हत्या केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं है, बल्कि यह बांग्लादेश की धर्मनिरपेक्ष छवि पर एक और गहरा दाग है। हालांकि तीन आरोपियों की गिरफ्तारी एक सकारात्मक कदम है, लेकिन सवाल अभी भी वही बना हुआ है कि क्या बांग्लादेश में हिंदू समुदाय अपनी जान-माल की सुरक्षा के प्रति आश्वस्त हो पाएगा? अंतरराष्ट्रीय समुदाय और विशेष रूप से पड़ोसी देशों की नजरें भी इस मामले पर टिकी हैं।

सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। लोग मांग कर रहे हैं कि न्याय केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि जमीन पर ऐसे कड़े संदेश दिए जाएं जिससे भविष्य में किसी निर्दोष नागरिक को उसकी धार्मिक पहचान के कारण इस तरह की बर्बरता का सामना न करना पड़े।

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