जेलेंस्की का पुतिन पर परोक्ष प्रहार: मादुरो की गिरफ्तारी के बाद बोले यूक्रेनी राष्ट्रपति- ‘अब अमेरिका जानता है कि तानाशाहों से कैसे निपटना है’
कीव/वॉशिंगटन/मॉस्को: वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की अमेरिकी विशेष बलों द्वारा की गई नाटकीय गिरफ्तारी ने वैश्विक राजनीति में भूचाल ला दिया है। इस घटनाक्रम के बाद जहां एक ओर दक्षिण अमेरिकी राजनीति में अस्थिरता का माहौल है, वहीं दूसरी ओर रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के बीच एक नई जुबानी जंग छिड़ गई है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इस घटना को ‘तानाशाहों के अंत’ की शुरुआत बताते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर बिना नाम लिए तीखा निशाना साधा है। जेलेंस्की के इस बयान ने मॉस्को को नाराज कर दिया है, जबकि रूस ने मादुरो की तुरंत रिहाई की मांग करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है।
जेलेंस्की का बड़ा बयान: “अमेरिका जानता है अगला कदम क्या है”
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने मादुरो की गिरफ्तारी के बाद आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बेहद सधे हुए लेकिन आक्रामक अंदाज में अपनी प्रतिक्रिया दी। जब उनसे वेनेजुएला के घटनाक्रम पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, “मैं इस पर क्या कह सकता हूं? यह पूरी दुनिया के सामने है। अगर तानाशाहों के साथ ऐसा किया जा सकता है, तो इसका मतलब है कि वाशिंगटन अब यह अच्छी तरह जानता है कि अगला कदम क्या होना चाहिए और किससे कैसे निपटना है।”
जेलेंस्की का यह बयान सीधे तौर पर व्लादिमीर पुतिन की ओर एक स्पष्ट संकेत माना जा रहा है। यूक्रेन लंबे समय से पश्चिमी देशों और विशेषकर अमेरिका से यह मांग करता रहा है कि रूसी नेतृत्व को युद्ध अपराधों के लिए जवाबदेह ठहराया जाए। मादुरो की गिरफ्तारी को जेलेंस्की ने एक ऐसे उदाहरण के रूप में पेश किया है, जो भविष्य में अन्य उन नेताओं के लिए चेतावनी हो सकता है जिन्हें पश्चिम ‘तानाशाह’ की श्रेणी में रखता है। अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जेलेंस्की इस घटना के जरिए पुतिन पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
रूस की कड़ी प्रतिक्रिया: “मादुरो ही वैध राष्ट्रपति, तुरंत रिहा करे अमेरिका”
दूसरी तरफ, रूस ने अपने मित्र देश के प्रमुख की गिरफ्तारी पर कड़ी आपत्ति जताई है। रूसी विदेश मंत्रालय ने अमेरिका की इस कार्रवाई को ‘अपहरण’ करार दिया है। मॉस्को ने मांग की है कि निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को बिना शर्त तुरंत रिहा किया जाए। रूसी सरकार का तर्क है कि मादुरो वेनेजुएला के संवैधानिक और लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित राष्ट्रपति हैं और किसी दूसरे देश को उन्हें बलपूर्वक हिरासत में लेने का कोई अधिकार नहीं है।
रूसी विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक आधिकारिक पोस्ट के जरिए कहा कि अमेरिका और वेनेजुएला के बीच जो भी विवाद हैं, उनका समाधान केवल आपसी बातचीत और राजनयिक माध्यमों से होना चाहिए। रूस ने चेतावनी दी है कि इस तरह की एकतरफा सैन्य कार्रवाइयां अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को खतरे में डालती हैं और इससे लैटिन अमेरिका में एक बड़ा मानवीय संकट पैदा हो सकता है। पुतिन प्रशासन इसे अमेरिका की ‘अहंकारी विदेश नीति’ का हिस्सा मान रहा है, जो संप्रभु देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करती है।
न्यूयॉर्क में चलेगा मुकदमा: ट्रंप ने की पुष्टि
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे ऑपरेशन की सफलता की पुष्टि करते हुए विस्तृत जानकारी साझा की है। ट्रंप के अनुसार, मादुरो और उनकी पत्नी को वेनेजुएला की राजधानी काराकास से एक बेहद गोपनीय और जटिल संयुक्त अभियान (Joint Operation) के जरिए पकड़ा गया। यह ऑपरेशन अमेरिकी विशेष बलों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों का एक संयुक्त प्रयास था। गिरफ्तारी के तुरंत बाद उन्हें विशेष विमान से अमेरिका लाया गया।
ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मादुरो पर न्यूयॉर्क के साउदर्न डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में मुकदमा चलाया जाएगा। उन पर लगे आरोप बेहद गंभीर हैं, जिनमें अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी, नार्को-आतंकवाद और अमेरिका के खिलाफ आपराधिक साजिशें शामिल हैं। अमेरिकी न्याय विभाग का दावा है कि मादुरो ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अमेरिका में नशीले पदार्थों की तस्करी को बढ़ावा दिया और कई आपराधिक गिरोहों के साथ साठगांठ की। ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि “कोई भी कानून से ऊपर नहीं है” और मादुरो को अब अमेरिकी अदालत में अपने कर्मों का हिसाब देना होगा।
पर्प वॉक और कुख्यात डिटेंशन सेंटर की चर्चा
अमेरिका ने मादुरो की गिरफ्तारी के बाद एक वीडियो भी जारी किया है, जिसे ‘पर्प वॉक’ कहा जा रहा है। इस वीडियो में वेनेजुएला के पूर्व शक्तिशाली राष्ट्रपति हथकड़ियों में बंधे हुए और अमेरिकी अधिकारियों की निगरानी में चलते हुए दिखाई दे रहे हैं। यह वीडियो प्रतीकात्मक रूप से यह दिखाने के लिए जारी किया गया है कि अमेरिकी न्याय की पहुंच कितनी दूर तक है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, मादुरो को फिलहाल न्यूयॉर्क के ‘मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर’ (MDC) में रखा जाएगा। यह जेल अपनी कठोर परिस्थितियों और अमानवीय वातावरण के लिए दुनिया भर में कुख्यात है। इसी जेल में कई हाई-प्रोफाइल अपराधी और आतंकवादी रखे जा चुके हैं। मानवाधिकार संगठनों ने अक्सर इस केंद्र की सुविधाओं पर सवाल उठाए हैं, लेकिन अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि मादुरो को उच्च-सुरक्षा वाली श्रेणी में रखा जाना अनिवार्य है ताकि किसी भी तरह की सुरक्षा चूक न हो।
वैश्विक समीकरणों पर प्रभाव और भविष्य की राह
निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने न केवल वेनेजुएला बल्कि पूरे वैश्विक कूटनीतिक ढांचे को हिलाकर रख दिया है। चीन, ईरान और तुर्की जैसे देश भी इस घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। अगर अमेरिका मादुरो पर सफलतापूर्वक मुकदमा चलाकर उन्हें सजा दिलाने में कामयाब रहता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक मिसाल बन जाएगा। हालांकि, रूस की नाराजगी और जेलेंस्की के बयानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह मुद्दा अब केवल वेनेजुएला तक सीमित नहीं है।
यह घटनाक्रम आने वाले समय में रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका-रूस संबंधों को और अधिक जटिल बना सकता है। क्या अमेरिका की यह कार्रवाई वास्तव में अन्य नेताओं के लिए एक चेतावनी है, जैसा कि जेलेंस्की ने दावा किया है? या फिर यह अंतरराष्ट्रीय तनाव की एक नई और अधिक खतरनाक शुरुआत है? पूरी दुनिया की निगाहें अब न्यूयॉर्क की अदालत पर टिकी हैं, जहां आने वाले दिनों में मादुरो को पेश किया जाएगा।