• January 2, 2026

भारत-रूस दोस्ती पर पुतिन की पश्चिम को सीधी चुनौती, चीन ने बताया ‘रणनीतिक ताकत’ का प्रदर्शन।

वर्तमान वैश्विक राजनीति अमेरिका (USA) और रूस (Russia) के नेतृत्व वाले दो स्पष्ट ध्रुवों में बंटी हुई है। ऐसे बेहद तनावपूर्ण माहौल के बीच, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) की भारत (India) यात्रा ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति (International Diplomacy) में बड़ा भूचाल ला दिया है। यह दौरा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने पश्चिम को एक कड़ा और सीधा संदेश दिया है। इस यात्रा की गूंज अब चीन (China) के सरकारी मीडिया और राजनीतिक विशेषज्ञों तक सुनाई दे रही है, जो इसे रूस की रणनीतिक मजबूती के रूप में देख रहे हैं। एक ओर अमेरिका (USA) भारत पर रूसी तेल खरीद को लेकर लगातार दबाव बना रहा है, वहीं दूसरी ओर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के नेतृत्व क्षमता पर बड़ा बयान देकर पश्चिमी रणनीति को चुनौती दी है। आखिर इस यात्रा को चीन क्यों इतनी गंभीरता से देख रहा है और इसका वैश्विक मतलब क्या है, जानते हैं विस्तार से…

दो ध्रुवों में बंटी वैश्विक राजनीति और भारत की भूमिका

वर्तमान वैश्विक परिदृश्य साफ तौर पर दो ध्रुवीय गुटों में विभाजित दिखाई दे रहा है। एक तरफ रूस (Russia) के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) एक अलग वैश्विक धुरी के निर्माण में लगे हैं, तो दूसरी तरफ अमेरिका (USA) और उसके सहयोगी देश आर्थिक प्रतिबंधों और यूक्रेन संघर्ष (Ukraine Conflict) के माध्यम से रूस को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। इस बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच, एशिया (Asia) के दो प्रमुख देश—भारत (India) और चीन (China)—का रूस के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखना पश्चिमी ताकतों के लिए चिंता का मुख्य विषय बन गया है। ऐसे निर्णायक समय में, पुतिन की भारत यात्रा को केवल द्विपक्षीय वार्ता (Bilateral Talks) के रूप में नहीं देखा जा रहा है, बल्कि यह पूरी वैश्विक राजनीति के शक्ति संतुलन को प्रभावित करने वाला एक मजबूत रणनीतिक संकेत बनकर सामने आया है। यह यात्रा दर्शाती है कि भारत, पश्चिमी दबाव के बावजूद, अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर अडिग है।

चीन ने भारत-रूस रिश्तों को बताया ‘रणनीतिक ताकत’

चीन के आधिकारिक मुखपत्र, ग्लोबल टाइम्स (Global Times) ने राष्ट्रपति पुतिन (Vladimir Putin) की भारत यात्रा को रूस की बढ़ती रणनीतिक मजबूती का एक बड़ा प्रमाण माना है। अखबार ने विस्तार से बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और राष्ट्रपति पुतिन रक्षा सहयोग (Defence Cooperation), ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security), व्यापार विस्तार, अंतरिक्ष (Space) और इंडो-पैसिफिक (Indo-Pacific) तथा यूरेशिया (Eurasia) क्षेत्र की भू-राजनीतिक स्थिति (Geo-political Situation) जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया कि दोनों देश लगभग 10 सरकारी समझौतों (Government Agreements) और 15 से अधिक व्यापारिक सौदों (Business Deals) पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। यह यात्रा यूरोपीय आयोग (European Commission) द्वारा रूसी फंड्स (Russian Funds) को लेकर सख्त प्रस्ताव लाने की तैयारी के बीच हो रही है, जिससे यह पश्चिमी देशों के लिए एक स्पष्ट और तीखा संदेश बन गई है।

‘बाहरी दबाव में नहीं झुकेगी भारत-रूस साझेदारी’

चीन के विदेश मामलों के विश्वविद्यालय (China Foreign Affairs University) के प्रोफेसर ली हाईडोंग (Li Haidong) ने ग्लोबल टाइम्स (Global Times) से बातचीत में भारत-रूस संबंधों की गहराई पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी बेहद रणनीतिक है और किसी भी बाहरी दबाव या चेतावनी को झेलने की पर्याप्त क्षमता रखती है। ली के अनुसार, यह मजबूत संबंध दुनिया को साफ संदेश देते हैं कि न तो भारत (India) और न ही रूस (Russia) पश्चिमी देशों द्वारा बनाए गए प्रतिबंधों या कूटनीतिक दबाव के आगे झुकेंगे। उन्होंने आगे कहा कि पश्चिमी प्रतिबंध (Western Sanctions) रूस को कमजोर करने में सफल नहीं हुए हैं, और भारत (India) हमेशा से अपनी विदेश नीति (Foreign Policy) केवल अपने राष्ट्रीय हितों (National Interests) के आधार पर ही तय करता आया है। इस बीच, न्यूयॉर्क टाइम्स (New York Times) ने भी अमेरिका (USA) के दबाव और प्रतिबंधों की चेतावनी के बावजूद भारत के मजबूत रुख को रेखांकित किया है।

राष्ट्रीय मुद्राओं में लेनदेन और वैश्विक सत्ता संतुलन

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) ने सार्वजनिक रूप से इस बात पर जोर दिया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) किसी भी प्रकार के बाहरी दबाव में आने वाले नेता नहीं हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत और रूस के बीच रक्षा (Defence) और व्यापारिक संबंध (Trade Relations) पहले से कहीं अधिक मजबूत हुए हैं। एक महत्वपूर्ण वित्तीय कदम के रूप में, अब दोनों देशों के बीच 90 प्रतिशत से अधिक लेनदेन राष्ट्रीय मुद्राओं (National Currencies) में किया जा रहा है, जो वैश्विक व्यापार में अमेरिकी डॉलर (US Dollar) पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक बड़ा और साहसिक संकेत है। आने वाले समय में, ये रणनीतिक और वित्तीय समझौते पश्चिमी देशों की आर्थिक और राजनीतिक रणनीति पर सीधा असर डाल सकते हैं। वर्तमान में, पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पुतिन की यह भारत यात्रा वैश्विक सत्ता संतुलन (Global Power Balance) को किस नई दिशा में ले जाती है।

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