• January 2, 2026

Hidden Truth of Cozy Sleep: रजाई में मुंह ढककर सोना क्यों लगता है इतना अच्छा? अंदर की हवा और सेहत का गणित।

Hidden Truth of Cozy Sleep: सर्दियों की ठंडी रातों में, कंबल या रजाई में खुद को पूरी तरह लपेटकर, चेहरे तक ढक लेना एक अनोखा सुकून देता है। यह आदत करोड़ों भारतीयों में आम है, क्योंकि यह बाहर की सर्द हवा, तेज़ रोशनी और बेवजह की आवाज़ों से एक “गरम और सुरक्षित घोंसला” बना देती है। जैसे ही आप कंबल चेहरे तक खींचते हैं, दिमाग को तुरंत आराम और शांति मिलती है, जिससे नींद जल्दी आने लगती है। इस आरामदायक अनुभव को कई लोग नींद की गुणवत्ता से जोड़कर देखते हैं। लेकिन क्या यह ‘आरामदायक’ आदत वास्तव में आपकी सेहत के लिए सुरक्षित है? विशेषज्ञ बताते हैं कि सुकून देने वाली यह आदत शरीर के आंतरिक सिस्टम, श्वसन तंत्र (Respiratory System) और त्वचा (Skin) पर कई नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। तो चलिए जानते हैं इस सुकून के पीछे छिपा सेहत का सच क्या है, जानते हैं विस्तार से…

कंबल में मुंह ढकने की मनोवैज्ञानिक पृष्ठभूमि

ठंडी रातों में कंबल (Blanket) के भीतर मुंह ढककर सोना व्यक्ति को मनोवैज्ञानिक तौर पर अच्छा महसूस कराता है। यह आदत हमारे दिमाग को एक सुरक्षित और संरक्षित वातावरण (Safe Environment) का संकेत देती है। कंबल के भीतर बनी यह कृत्रिम गर्माहट (Warmth) न केवल शरीर को सुकून देती है, बल्कि बाहरी दुनिया के शोरगुल और रोशनी से भी बचाती है। इससे दिमाग की अति-सक्रियता (Overactivity) कम होती है और व्यक्ति जल्दी रिलैक्स (Relax) हो जाता है, जिससे नींद जल्दी आने लगती है। यह अंधेरा और शांति हमारे मस्तिष्क की हलचल को शांत करती है। हालांकि, यह गर्माहट एक जाल (Trap) भी बन सकती है। यह आरामदायक एहसास अक्सर उस खतरे पर पर्दा डाल देता है, जो अंदर की बंद हवा और आपके फेफड़ों (Lungs) के बीच पैदा हो रहा होता है।

ऑक्सीजन की कमी और कार्बन डाइऑक्साइड का बढ़ाव

कंबल में मुंह ढककर सोने का सबसे बड़ा और सीधा प्रभाव श्वसन प्रक्रिया (Respiratory Process) पर पड़ता है। जब कोई व्यक्ति चेहरा ढककर सोता है, तो कंबल के भीतर की सीमित जगह में कार्बन डाइऑक्साइड  की मात्रा तेजी से बढ़ जाती है और ताज़ी ऑक्सीजन की मात्रा घट जाती है। बार-बार वही गर्म, “बासी” हवा सांस में लेने से शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। इसके परिणामस्वरूप, नींद बार-बार टूट सकती है, जिससे सुबह उठने पर सिरदर्द (Headache), चक्कर (Dizziness) या काम पर फोकस (Focus) करने में मुश्किल हो सकती है। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि अस्थमा (Asthma), एलर्जी (Allergy) या साइनस (Sinus) जैसी पहले से मौजूद सांस संबंधी समस्याओं वाले लोगों में यह आदत लक्षणों को और गंभीर बना सकती है, जो एक गंभीर स्वास्थ्य जोखिम है।

त्वचा, तापमान और एलर्जी प्रतिक्रियाएं

चेहरा ढककर सोने से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों में त्वचा (Skin) और शरीर के तापमान (Body Temperature) का बिगड़ना भी शामिल है। कंबल के नीचे चेहरा ढकने पर, त्वचा के आसपास नमी (Moisture) और गर्मी बढ़ जाती है। यह गर्म और नम वातावरण पसीने के साथ मिलकर त्वचा के पोर्स (Pores) को बंद कर सकता है, जिससे पिंपल्स (Pimples), सूजन या रेडनेस (Redness) जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। विशेष रूप से संवेदनशील त्वचा (Sensitive Skin) के लिए यह स्थिति जलन पैदा करने वाली हो सकती है। इसके अलावा, गहरी नींद (Deep Sleep) के लिए शरीर का तापमान रात में स्वाभाविक रूप से थोड़ा कम होता है। लेकिन अगर चेहरा ढका हो, तो शरीर गर्मी बाहर नहीं निकाल पाता, जिससे बेचैनी, अत्यधिक पसीना आना या डिहाइड्रेशन (Dehydration) जैसी समस्या हो सकती है।

बच्चों के लिए गंभीर खतरा और सुरक्षित विकल्प

बच्चों और शिशुओं (Infants) के लिए कंबल में मुंह ढककर सोना एक अत्यंत खतरनाक स्थिति है। छोटे बच्चे या शिशु (Babies) अपनी चादर या कंबल को ठीक से हटा नहीं पाते हैं। यदि उनका चेहरा गलती से ढक जाता है, तो हवा का रास्ता पूरी तरह से बंद हो सकता है, जिससे दम घुटने (Suffocation) का गंभीर खतरा पैदा होता है। इसलिए बाल रोग विशेषज्ञों (Pediatricians) की ओर से सख्त निर्देश दिए जाते हैं कि शिशुओं के चेहरे को सोते समय हमेशा खुला रखा जाए। यदि आप गर्माहट पसंद करते हैं, तो सुरक्षित तरीके अपनाए जा सकते हैं। चेहरे को खुला रखते हुए लेयर्ड ब्लैंकेट (Layered Blanket) या थर्मल (Thermal) कपड़े पहनना, पैरों के पास हॉट वॉटर बैग (Hot Water Bag) रखना, या ब्रीथेबल कॉटन बेडिंग (Breathable Cotton Bedding) चुनना इस आरामदायक आदत का सुरक्षित विकल्प है।

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