अमेरिका ने कनाडा को दी F-35 जेट डील रद्द करने पर सख्त चेतावनी, भारत को बेचने की योजना पर असर?
नई दिल्ली/वॉशिंगटन, 17 सितंबर 2025: अमेरिका और कनाडा के बीच तनाव बढ़ गया है। अमेरिका ने कनाडा को चेतावनी दी है कि अगर वह F-35 स्टील्थ फाइटर जेट्स की खरीद डील रद्द करता है, तो इसके गंभीर नतीजे भुगतने पड़ेंगे। दिलचस्प बात यह है कि यही F-35 जेट अमेरिका भारत को बेचने की योजना बना रहा है। कनाडा के इस फैसले से न सिर्फ दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग पर सवाल उठे हैं, बल्कि भारत जैसे सहयोगी देशों की रक्षा खरीद पर भी असर पड़ सकता है।F-35 लाइटनिंग II दुनिया का सबसे आधुनिक पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान है। यह लॉकहीड मार्टिन कंपनी द्वारा बनाया गया है। इसकी खासियत यह है कि यह रडार से बचने की क्षमता रखता है, यानी दुश्मन के रडार इसे आसानी से पकड़ नहीं सकते। विमान में आधुनिक हथियार, उन्नत सेंसर और तेज गति है। अमेरिकी सेना के अलावा ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जापान जैसे कई देश इसे इस्तेमाल करते हैं। कनाडा ने 2023 में 88 ऐसे जेट्स खरीदने का समझौता किया था, जिसकी कीमत करीब 19 अरब कनाडाई डॉलर (लगभग 1.1 लाख करोड़ रुपये) है। पहली 16 जेट्स की डिलीवरी अगले साल शुरू होनी थी, और कनाडा ने इसके लिए भुगतान भी कर दिया था।लेकिन हाल ही में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इस डील का पुनर्मूल्यांकन करने की बात कही। कारण? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ नीति। ट्रंप ने सभी आयात पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया है, जिससे कनाडा को आर्थिक नुकसान हो रहा है। कनाडा अब स्वीडन के ग्रिपेन जेट को वैकल्पिक विकल्प के रूप में देख रहा है। ग्रिपेन सस्ता और आसानी से उपलब्ध है। लेकिन अमेरिका को यह पसंद नहीं आया।
अमेरिकी राजदूत पीट होकस्ट्रा ने मई 2025 में एक इंटरव्यू में कहा कि अगर कनाडा F-35 नहीं खरीदता, तो यह दोनों देशों के संयुक्त NORAD (नॉर्थ अमेरिकन एयरोस्पेस डिफेंस कमांड) गठबंधन को खतरा पहुंचाएगा। NORAD अमेरिका और कनाडा की संयुक्त हवाई रक्षा प्रणाली है। होकस्ट्रा ने चेतावनी दी, “अगर कनाडा एक तरह का विमान उड़ाएगा और हम दूसरा, तो हम एक-दूसरे के साथ सहयोग नहीं कर पाएंगे। हमारे पायलट एक-दूसरे के विमानों को पहचान नहीं पाएंगे, और यह सुरक्षा के लिए खतरनाक होगा।” ट्रंप प्रशासन ने साफ कहा है कि डील रद्द करने पर “गंभीर परिणाम” होंगे, जिसमें सैन्य सहयोग कम करना या आर्थिक दबाव शामिल हो सकता है।यह विवाद भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है। अमेरिका ने फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान भारत को F-35 जेट्स बेचने का प्रस्ताव दिया था। ट्रंप ने कहा था, “हम भारत को F-35 स्टील्थ फाइटर प्रदान करने का रास्ता बना रहे हैं।” भारत की वायुसेना को नए लड़ाकू विमानों की सख्त जरूरत है। फिलहाल, हमारे पास रूस के सुखोई-30, फ्रांस के राफेल और स्वदेशी तेजस जैसे विमान हैं। लेकिन चीन और पाकिस्तान से लगातार खतरे के बीच पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ जेट्स की कमी महसूस हो रही है। अमेरिका भारत को 200 अरब डॉलर से ज्यादा के हथियार बेचने की योजना बना रहा है। F-35 इसकी प्रमुख कड़ी हो सकता है।हालांकि, भारत ने जुलाई 2025 में F-35 खरीदने से इनकार कर दिया था। कारण वही ट्रंप की 25 प्रतिशत टैरिफ नीति। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय अधिकारियों ने कहा कि ट्रंप के दबाव के कारण हम अमेरिकी जेट्स नहीं खरीदेंगे। इसके बजाय, भारत रूस के सुखोई Su-57 को प्राथमिकता दे रहा है। रूस ने Su-57 को भारत में ही बनाने का प्रस्ताव दिया है, जो सस्ता और तकनीकी हस्तांतरण के साथ आएगा। भारत ने अमेरिका से जेट इंजन की डील पर सहमति जताई है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और जनरल इलेक्ट्रिक (GE) के बीच 14,000 करोड़ रुपये का समझौता हो चुका है। यह स्वदेशी AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) के लिए इंजन देगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि कनाडा का फैसला अमेरिका की हथियार बिक्री को प्रभावित करेगा। रक्षा विश्लेषक अजय शुक्ला कहते हैं, “F-35 जैसे महंगे जेट्स पर अमेरिका का दबाव कामयाब नहीं हो रहा। कनाडा, स्पेन और स्विट्जरलैंड जैसे देश टैरिफ से परेशान हैं। भारत को भी सावधानी बरतनी चाहिए।” कनाडा के अलावा, स्पेन और भारत ने भी F-35 को ठुकरा दिया है। स्विट्जरलैंड में तो जनता ने खरीद रद्द करने की मांग शुरू कर दी है। अमेरिका का तर्क है कि F-35 न सिर्फ युद्ध में मजबूत है, बल्कि सहयोगी देशों के बीच एकरूपता लाता है। लेकिन आलोचक कहते हैं कि अमेरिका सॉफ्टवेयर और पार्ट्स पर पूरा नियंत्रण रखता है, जो खरीदने वाले देश को कमजोर बनाता है।भारतीय वायुसेना के चीफ एयर मार्शल वीआर चड्ढा ने हाल ही में कहा कि भारत अपनी जरूरतों के हिसाब से विमान चुनता है। “हम रूस, फ्रांस और अमेरिका से संतुलित खरीद करते हैं। स्वदेशीकरण हमारी प्राथमिकता है।” HAL तेजस मार्क-1A के उत्पादन को तेज कर रही है। सितंबर में दो और विमान वायुसेना को सौंपे जाएंगे। लेकिन लंबे समय में, पांचवीं पीढ़ी के जेट्स जरूरी हैं। चीन के पास J-20 जैसे स्टील्थ जेट्स हैं, जबकि पाकिस्तान F-16 को अपग्रेड कर रहा है।इस विवाद से वैश्विक हथियार बाजार हिल गया है।
अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा हथियार निर्यातक है, लेकिन ट्रंप की नीतियां सहयोगियों को दूर कर रही हैं। कनाडा ने जवाब में कहा है कि वह अमेरिकी स्टील और एल्यूमिनियम पर काउंटर-टैरिफ बढ़ा सकता है। दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता 30 दिनों में होना चाहिए, वरना तनाव और बढ़ेगा।भारत के लिए यह एक सबक है। हम अमेरिका के साथ QUAD और रक्षा साझेदारी मजबूत कर रहे हैं, लेकिन रूस से पुराने रिश्ते भी महत्वपूर्ण हैं। F-35 डील पर भारत का फैसला अब ट्रंप की नीतियों पर निर्भर करेगा। अगर टैरिफ कम होते हैं, तो बात आगे बढ़ सकती है। फिलहाल, कनाडा को दी गई धमकी से साफ है कि अमेरिका अपनी हथियार बिक्री को किसी भी कीमत पर बचाना चाहता है।