तेलंगाना के फायरब्रांड नेता टी राजा सिंह ने BJP से दिया इस्तीफा, राज्य में नेतृत्व विवाद के चलते छोड़ी पार्टी!
30 जून 2025 को टी राजा सिंह ने BJP की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया, जिसकी जानकारी सोशल मीडिया और समाचारों के माध्यम से सामने आई। उन्होंने तेलंगाना BJP अध्यक्ष जी किशन रेड्डी को पत्र लिखकर अपनी निराशा और सदमा व्यक्त किया, खासकर रामचंदर राव को तेलंगाना BJP अध्यक्ष बनाने की संभावित खबरों पर। राजा सिंह ने कहा, “मैं पार्टी की एकता और मजबूती के लिए काम करता रहा, लेकिन मुझे लगातार उपेक्षित किया गया।” इससे पहले, फरवरी 2025 में उन्होंने इस्तीफे की धमकी दी थी, जब गोलकुंडा जिला BJP अध्यक्ष के रूप में उनकी पसंद के बजाय AIMIM से कथित तौर पर करीबी व्यक्ति को नियुक्त किया गया। उनके इस कदम ने पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष को उजागर किया।
नेतृत्व विवाद और आंतरिक कलह
टी राजा सिंह का राजनीतिक सफर और विवाद
टी रजा सिंह, जिन्हें ‘टाइगर राजा’ के नाम से भी जाना जाता है, गोशामहल विधानसभा सीट से 2014, 2018 और 2023 में लगातार तीन बार विधायक चुने गए। वह हिंदुत्व और गौ-रक्षा के प्रबल समर्थक हैं, और उनके खिलाफ 105 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें 18 सांप्रदायिक अपराधों से संबंधित हैं। 2022 में पैगंबर मुहम्मद पर विवादास्पद टिप्पणी के बाद BJP ने उन्हें निलंबित कर दिया था, जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी हुई। हालांकि, 2023 में विधानसभा चुनावों से पहले उनकी निलंबन रद्द कर दी गई। राजा सिंह ने 2009 में तेलुगु देशम पार्टी (TDP) से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी और 2014 में BJP में शामिल हुए। उनकी कट्टर हिंदुत्व छवि ने उन्हें युवाओं और लोधी समुदाय में लोकप्रिय बनाया, लेकिन विवादास्पद बयानों ने पार्टी को मुश्किल में भी डाला।
पार्टी और समाज पर प्रभाव
राजा सिंह के इस्तीफे ने तेलंगाना BJP में संकट पैदा कर दिया है। X पर यूजर्स ने इसे “कट्टर सनातनी शेर” का विद्रोह बताया, और कुछ ने उनके समर्थन में एकजाल शुरू किया। हालांकि, कुछ यूजर्स ने उनके विवादास्पद इतिहास, जैसे 2024 में जैन समुदाय के खिलाफ टिप्पणी और इस्लामोफोबिक गाने, को लेकर आलोचना की। राजा सिंह की गोशामहल में मजबूत पकड़ है, जहां उन्होंने 2023 में BRS के खिलाफ 21,500 वोटों से जीत हासिल की थी। उनके इस्तीफे से BJP की हिंदुत्व छवि और वोट बैंक पर असर पड़ सकता है, खासकर जब कांग्रेस और BRS तेलंगाना में मजबूत हो रहे हैं। यह घटना पार्टी के लिए एकता बनाए रखने और नेतृत्व विवाद को सुलझाने की चुनौती पेश करती है।