• January 20, 2026

तेलंगाना के फायरब्रांड नेता टी राजा सिंह ने BJP से दिया इस्तीफा, राज्य में नेतृत्व विवाद के चलते छोड़ी पार्टी!

तेलंगाना के गोशामहल से बीजेपी विधायक और हिंदुत्व के प्रखर चेहरे टी राजा सिंह ने 30 जून 2025 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। यह कदम तेलंगाना BJP में नेतृत्व विवाद और उनकी उपेक्षा के चलते उठाया गया। राजा सिंह ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को पत्र लिखकर इस्तीफा भेजा, जिसमें उन्होंने तेलंगाना BJP अध्यक्ष जी किशन रेड्डी और अन्य नेताओं की कार्यशैली पर नाराजगी जताई। यह घटना तेलंगाना में BJP की आंतरिक कलह को उजागर करती है, खासकर तब जब पार्टी 2023 के विधानसभा चुनावों में आठ सीटें जीतकर मजबूत हुई थी। 
टी राजा सिंह का इस्तीफा और बयान

30 जून 2025 को टी राजा सिंह ने BJP की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया, जिसकी जानकारी सोशल मीडिया और समाचारों के माध्यम से सामने आई। उन्होंने तेलंगाना BJP अध्यक्ष जी किशन रेड्डी को पत्र लिखकर अपनी निराशा और सदमा व्यक्त किया, खासकर रामचंदर राव को तेलंगाना BJP अध्यक्ष बनाने की संभावित खबरों पर। राजा सिंह ने कहा, “मैं पार्टी की एकता और मजबूती के लिए काम करता रहा, लेकिन मुझे लगातार उपेक्षित किया गया।” इससे पहले, फरवरी 2025 में उन्होंने इस्तीफे की धमकी दी थी, जब गोलकुंडा जिला BJP अध्यक्ष के रूप में उनकी पसंद के बजाय AIMIM से कथित तौर पर करीबी व्यक्ति को नियुक्त किया गया। उनके इस कदम ने पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष को उजागर किया।

नेतृत्व विवाद और आंतरिक कलह

तेलंगाना BJP में नेतृत्व को लेकर लंबे समय से तनाव चल रहा है। फरवरी 2025 में राजा सिंह ने पार्टी नेतृत्व पर “उन्हें परेशान करने” का आरोप लगाया था, खासकर गोलकुंडा जिला अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर। उन्होंने दावा किया कि उनकी सिफारिशों को नजरअंदाज कर ऐसे लोगों को पद दिए गए, जिनके AIMIM से संबंध थे। इसके अलावा, पार्टी के कुछ नेताओं ने जी किशन रेड्डी की कार्यशैली पर सवाल उठाए, जिसमें दिशाहीनता और प्रमुख नेताओं से सलाह लेना शामिल था। जून 2025 में रामचंदर राव को तेलंगाना BJP अध्यक्ष बनाने की चर्चा ने राजा सिंह को और नाराज किया। 2023 में उनकी निलंबन रद्दीकरण के बाद भी, उन्हें पार्टी में कोई बड़ा पद नहीं दिया गया, जिससे उनका असंतोष बढ़ा।

टी राजा सिंह का राजनीतिक सफर और विवाद

टी रजा सिंह, जिन्हें ‘टाइगर राजा’ के नाम से भी जाना जाता है, गोशामहल विधानसभा सीट से 2014, 2018 और 2023 में लगातार तीन बार विधायक चुने गए। वह हिंदुत्व और गौ-रक्षा के प्रबल समर्थक हैं, और उनके खिलाफ 105 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें 18 सांप्रदायिक अपराधों से संबंधित हैं। 2022 में पैगंबर मुहम्मद पर विवादास्पद टिप्पणी के बाद BJP ने उन्हें निलंबित कर दिया था, जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी हुई। हालांकि, 2023 में विधानसभा चुनावों से पहले उनकी निलंबन रद्द कर दी गई। राजा सिंह ने 2009 में तेलुगु देशम पार्टी (TDP) से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी और 2014 में BJP में शामिल हुए। उनकी कट्टर हिंदुत्व छवि ने उन्हें युवाओं और लोधी समुदाय में लोकप्रिय बनाया, लेकिन विवादास्पद बयानों ने पार्टी को मुश्किल में भी डाला।

पार्टी और समाज पर प्रभाव

राजा सिंह के इस्तीफे ने तेलंगाना BJP में संकट पैदा कर दिया है। X पर यूजर्स ने इसे “कट्टर सनातनी शेर” का विद्रोह बताया, और कुछ ने उनके समर्थन में एकजाल शुरू किया। हालांकि, कुछ यूजर्स ने उनके विवादास्पद इतिहास, जैसे 2024 में जैन समुदाय के खिलाफ टिप्पणी और इस्लामोफोबिक गाने, को लेकर आलोचना की। राजा सिंह की गोशामहल में मजबूत पकड़ है, जहां उन्होंने 2023 में BRS के खिलाफ 21,500 वोटों से जीत हासिल की थी। उनके इस्तीफे से BJP की हिंदुत्व छवि और वोट बैंक पर असर पड़ सकता है, खासकर जब कांग्रेस और BRS तेलंगाना में मजबूत हो रहे हैं। यह घटना पार्टी के लिए एकता बनाए रखने और नेतृत्व विवाद को सुलझाने की चुनौती पेश करती है।

भविष्य की संभावनाएं और चुनौतियां
राजा सिंह के इस्तीफे से तेलंगाना BJP को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है। 2023 के चुनावों में पार्टी ने आठ सीटें जीतीं, लेकिन राजा सिंह जैसे कट्टर नेताओं की उपेक्षा से असंतोष बढ़ रहा है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि राजा सिंह अपनी पार्टी बना सकते हैं या BRS जैसे क्षेत्रीय दल में शामिल हो सकते हैं, हालांकि उन्होंने 2023 में BRS में जाने की अटकलों को खारिज किया था। BJP को अब अपने हिंदुत्व आधार को बनाए रखते हुए अन्य समुदायों को जोड़ने की चुनौती है। साथ ही, तेलंगाना में कांग्रेस की बढ़ती ताकत और AIMIM के साथ चल रही तनातनी पार्टी के लिए स्थिति को जटिल बनाती है। राजा सिंह का अगला कदम तेलंगाना की राजनीति में नई गतिशीलता ला सकता है।
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