• January 1, 2026

मुरैना: भीषण गर्मी का कहर, लू से बचाव करने खाली पेट घर से बाहर न निकले

 मुरैना: भीषण गर्मी का कहर, लू से बचाव करने खाली पेट घर से बाहर न निकले

अप्रैल से जून माह तक तापमान औसत तापमान से अधिक होने से संपूर्ण क्षेत्र में लू (तापघात) की स्थिति निर्मित होने पर जनजीवन प्रभावित होता है। ग्रीष्मकालीन में तापमान 40 से 47 डिग्री होने से संपूर्ण क्षेत्र के साथ-साथ लू (तापघात) का प्ररिसंचार होता है। गर्मी से मानव स्वास्थ्य पर होने वाले दुष्प्रभाव एवं रोगों से बचाव व उपचार हेतु जिले में मैदानी स्तर तक स्वास्थ्य अमले को दिशा-निर्देश जारी किये गये है। आमजनता लू के प्रकोप से बचाव एवं उपचार के संबंध में आवश्यक सावधानियां बरतें।

लू से बचाव के लिये ये सावधानियां अपनाई जाना चाहिए

प्रभारी अधिकारी आपदा प्रबंधन ने बताया है कि लू लगने का प्रमुख कारण तेज धूप और गर्मी में ज्यादा देर रहने के कारण शरीर में पानी और खनिज मुख्यतः नमक की कमी हो जाती है। इससे बचाव के लिये समस्त नागरिक यथासंभव दोपहर 12 से 4 तक घर से बाहर न निकले। धूप में निकलने से पहले सिर एवं कानों को कपड़े, गमछा से अच्छी तरह से बांध लें।

खाली पेट घर से बाहर न निकले, यथासंभव पानी, मठा, ओ.आर.एस. का घोल, घरेलू पेयजल जैसे लस्सी, नीबू पानी, आम का पना, सत्तू आदि का सेवन करते रहें। अधिक समय तक धूप में न रहे। गर्मी के दौरान सूती मुलायम कपड़े पहने तथा सिंथेटिक एवं गहरे रंग के वस्त्रों को कम से कम पहनें। उल्टी, सिरदर्द, तेज बुखार की दशा में निकट के स्वास्थ्य केन्द्र में चिकित्सक से परामर्श लें। जानवरों को छाया में रखे और पर्याप्त मात्रा में पीने का पानी दे।

गरिष्ठ वसायुक्त ज्यादा प्रोटीन वाले भोजन तथा अल्कोहल, चाय, काफी जैसे पेय पदार्थ का उपयोग कम से कम करें।स्वास्थ्य केन्द्रों पर उपलब्ध सुविधा -प्रभारी अधिकारी आपदा प्रबंधन ने बताया है कि जिले के समस्त स्वास्थ्य केन्द्रों में कम से कम दो विस्तर लू(तापघात) से पीडित व्यक्तियों आरक्षित किये गये हैं। अस्पताल के प्रत्येक वार्ड में शीतलता हेतु कूलर एवं अन्य आवश्यक उपाय किये गये हैं। बाह्यरोगी कक्ष में मरीजों के बैठने की समुचित व्यवस्था के साथ-साथ पेयजल की व्यवस्था की गई है। लू से उपचार के लिये जिले में आशा कार्यकर्ता, ए.एन.एम., आंगनवाडी कार्यकर्ता को 05 लू मैनेजमेंट किट उपलब्ध कराई गई है।

ग्रीष्मकाल में लू (तापघात) आगजनी एवं वर्षाकाल में बाढ़ आपदा के लिये चेतावनी पद्धति को विकसित कर जनजाग्रती की पहल आपदा प्रबंधन केन्द्र का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। इस संबंध में जिला एवं तहसील स्तर पर आपदा प्रबंधन केन्द्र की स्थापना की गई है, जो प्रतिदिन 24 घण्टे कार्यरत रहेगा। जिला स्तरीय कण्ट्रोल रूम का नंबर 07532-222557 हैं, जहाँ आपदा की स्थिति में सूचना दी जा सकती हैं।

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