• January 2, 2026

एईएस एवं जेई के संभावित खतरों से निपटने की तैयारियों में जुटा स्वास्थ्य विभाग

 एईएस एवं जेई के संभावित खतरों से निपटने की तैयारियों में जुटा स्वास्थ्य विभाग

जिला स्वास्थ्य विभाग एईएस व जेई के संभावित खतरों से निपटने की तैयारियों में जुट गया है। इसी कड़ी में जिलाधिकारी तुषार सिंगला की अध्यक्षता में एईएस व जेई यानी चमकी बुखार व मस्तिष्क ज्वर से संबंधित टास्क फ़ोर्स का गठन समाहरणालय सभागार में किया गया।

डीएम तुषार सिंगला ने कहा कि चमकी बुखार व मस्तिष्क ज्वर का कुशल प्रबंधन जरूरी है। प्रारंभिक अवस्था में रोग की पहचान व इलाज से जान माल की क्षति को काफी हद तक कम किया जा सकता है। लिहाजा इसे लेकर स्वास्थ्य अधिकारी व कर्मियों को विशेष तौर पर सतर्क रहने की जरूरत है।

सिविल सर्जन डाॅ. राजेश कुमार ने कहा कि अप्रैल से लेकर मई का महीना रोग के प्रसार के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। ये रोग खासतौर पर 01 से 15 साल तक के बच्चों को प्रभावित करता है। कुपोषित बच्चे, वैसे बच्चे जो बिना भरपेट भोजन किये रात में सो जाते हों, खाली पेट कड़ी धूप में लंबे समय तक खेलने, कच्चे व अधपके लीची का सेवन करने वाले बच्चों को ये रोग आसानी से अपनी चपेट में ले सकता है। उन्होंने कहा कि चमकी बुखार व मस्तिष्क ज्वर के संभावित खतरों से प्रभावी तौर पर निपटने की व इसकी रोकथाम व प्रबंधन के साथ-साथ संबंधित मामलों को प्रतिवेदित करने के लिये स्पष्ट दृष्टिकोण विकसित करना मूल उद्देश्य है।

डीएम ने स्वास्थ्य अधिकारियों को जानकारी ग्रामीण स्तर पर कार्यरत एएनएम, आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, जीविका दीदियों से साझा करने के लिये निर्देशित किया। जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डा. मंजर आलम ने स्वास्थ्य अधिकारी व कर्मियों को रोग प्रबंधन व उपचार से संबंधित विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सिर में दर्द, तेज बुखार, अर्ध चेतना, मरीज में पहचानने कि क्षमता नहीं होना, भ्रम कि स्थिति में होना, बेहोशी शरीर में चमकी, हाथ व पांव में थरथराहट, रोगग्रस्त बच्चों का शारीरिक व मानसिक संतुलन बिगड़ना एईएस व जेई के सामान्य लक्षण हैं। ठीक नहीं होना मस्तिष्क ज्वर के महत्वपूर्ण लक्षण हैं। इन लक्षणों के प्रकट होने से पहले बुखार हो भी सकता है और नहीं भी। ऐसे मामले सामने आने पर रोग ग्रस्त बच्चों का उचित उपचार जरूरी है। लिहाजा हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर से लेकर सभी प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में रोग के उचित प्रबंधन के उद्देश्य से एईएस इमरजेंसी ड्रग किट की उपलब्धता सुनिश्चित कराने की बात उन्होंने कही।

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