सिमरिया धाम में बंद हो टैक्स वसूली, आस्था पर चोट नहीं करे बिहार सरकार : गंगा समग्र
मिथिला के पावन गंगा तट सिमरिया धाम में संवेदक द्वारा वाहन एवं दुकानों से की जा रही अप्रत्याशित वसूली का मामला तूल पकड़ चुका है। गंगा स्नान एवं अंतिम संस्कार के लिए आने वाले वाहनों से दो से तीन सौ रुपये तथा दुकानदारों से अधिक राशि वसूलने के कारण तीन गुणा दाम को लेकर गंगा समग्र ने बड़ा सवाल खड़ा किया।
गंगा समग्र ने सिमरिया गंगा धाम से टैक्स की वसूली बंद करने, वन विभाग द्वारा अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी की दुकान खोलने, पर्यावरण संरक्षण के लिए गोकास्ट की बिक्री करने तथा मुखाग्नि के लिए डोम राजा का दर निर्धारित करने की मांग किया है। गंगा समग्र का कहना है कि बिहार सरकार श्रद्धा और विश्वास पर जबरदस्ती टैक्स वसूल रही है। यह गलत है, सदन में भी सवाल उठाए जाएंगे।
गंगा समग्र के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमरेन्द्र प्रसाद सिंह उर्फ लल्लू बाबू ने कहा है कि बिहार सरकार गंगा को कमाई का जरिया बना चुकी है। गंगा का पानी और बालू बेचकर पैसा कमा रही है। लेकिन गंगा के लिए कुछ नहीं कर गंगा के अस्तित्व और आस्था पर चोट कर रही है। यही स्थिति रही तो गंगा और गंगा पर आश्रित परिवार बर्बाद हो जाएगा। स्नान और अंतिम संस्कार करने के लिए आने वालों से जबरन मनमाना टैक्स वसूला जा रहा है।

बेगूसराय में आयोजित प्रेसवार्ता में राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि सरकार जो चीज देती है, उसका टैक्स लेती है। सड़क, पानी, बिजली का हमसे टैक्स लेती है। फिर गंगा से ले रही पानी और बालू का पैसा गंगा पर क्यों नहीं खर्च कर रही है। यह संस्कृति के लिए खतरनाक है। व्यक्ति इतिहास लिखता है और प्रकृति भूगोल बनाती है, लेकिन जब मानव भूगोल और प्रकृति इतिहास लिखे तो बर्बादी तय है।
उन्होंने कहा कि बिहार सरकार सिमरिया से गंगाजल राजगीर ले गई, उससे पैसा कमा रही है। बालू बेचा जा रहा है धड़ल्ले से अवैध खनन हो रहा है। जिससे गंगा के अस्तित्व पर संकट है। सिमरिया से प्रत्येक वर्ष करोड़ों टैक्स वसूले जाते हैं, लेकिन सिमरिया के समग्र विकास की चिंता नहीं है। श्रद्धालुओं के साथ आस्था पर चोट कर लूट मचाई जा रही है। चोर के बदले चोर पकड़ने वाले को थाना में बंद किया जाता है।

प्रांत संयोजक-सह-विधान पार्षद सर्वेश कुमार ने कहा कि बिहार सरकार स्नान और अंतिम संस्कार पर भी मनमाने तरीके से टैक्स वसूल रही है। सिमरिया गंगा स्नान और अंतिम संस्कार करने के लिए जाने वाले चार चक्का वाहनों से जबरदस्ती दो सौ रुपये लिए जा रहे हैं। इस घाट का करोड़ों में बंदोबस्त किया जाता है। जिसके कारण दुकानदार बाजार से तीन गुणा दामों पर सामान बेचते हैं।
संस्कार के लिए बाजार से चार गुणा अधिक कीमत पर लकड़ी बिकता है। अंतिम संस्कार का कर्म करने के लिए डोम मनमाना पैसा वसूलते हैं। सरकार को आस्था पर चोट करना बंद करके सैरात की वसूली रद्द किया जाना चाहिए। आस्थावान और शोकाकुल लोगों को परेशान किया जाना गलत है। इसके लिए गंगा समग्र शासन-प्रशासन को प्रस्ताव दे रहा है। विधान परिषद के आगामी सत्र में यह मामला उठेगा।
बिहार सरकार पुल के पश्चिम स्थित रामघाट सहित स्थलों के विकास के लिए कोई योजना नहीं बना रही है। समग्र विकास से सिमरिया हरिद्वार जैसा बढ़िया पर्यटक केंद्र बनेगा। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग प्रत्येक वर्ष करोड़ों वसूली करता है, लेकिन खर्च कुछ नहीं करता है। बदले में लोगों को परेशान होना पड़ता है। राजस्व विभाग का कहना है कि हम सिर्फ वसूली कर बिहार सरकार के खाते में पैसा दे देते हैं, ऐसा क्यों। सिमरिया घाट का समग्र विकास हो।
यहां सैरात की वसूली बंद हो, डोम राजा का रेट फिक्स हो। वन एवं पर्यावरण विभाग अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी बिक्री केंद्र खोले। देश के अन्य जगहों की तरह गोबर से बने गोकास्ट की व्यवस्था हो, इससे पर्यावरण संरक्षण भी होगा। बाजार की स्थिति बदतर है, इसलिए सुव्यवस्थित और पक्के बाजार का निर्माण किया जाए। अव्यवस्था के कारण अब लोग अंतिम संस्कार एवं स्नान के लिए दूसरे घाट पर जाने लगे हैं। जिससे गंगा पर आश्रित परिवार पर संकट छाने लगा है।




