सर्राफा बाजार में ऐतिहासिक भूचाल: चांदी ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, ₹3.23 लाख के पार पहुंची कीमतें; सोना भी ₹1.5 लाख के करीब
नई दिल्ली: भारतीय सर्राफा बाजार में इस समय एक ऐसी सुनामी आई है जिसने निवेशकों और आम जनता दोनों को हैरान कर दिया है। वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग के बीच सोने और चांदी की कीमतों ने मंगलवार को एक नया इतिहास रच दिया। सबसे चौंकाने वाला प्रदर्शन चांदी का रहा है, जिसकी रफ्तार ने विशेषज्ञों के तमाम अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है। जिस चांदी को 1 लाख रुपये प्रति किलोग्राम से 2 लाख रुपये तक पहुँचने में 14 महीने का लंबा समय लगा था, उसने 2 लाख से 3 लाख रुपये का जादुई आंकड़ा महज एक महीने के भीतर पार कर लिया। मंगलवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी ₹3.20 लाख के स्तर को पार कर गई, जबकि दिल्ली के हाजिर बाजार में यह ₹3.23 लाख प्रति किलोग्राम के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच गई।
सोने की चमक भी इस दौड़ में पीछे नहीं रही। दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना पहली बार ₹1.5 लाख प्रति 10 ग्राम के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमती धातुओं की कीमतों में भारी उछाल देखा जा रहा है, जहाँ सोना 4,700 डॉलर प्रति औंस के पार निकल गया है। बाजार की इस विस्फोटक तेजी ने विशेषज्ञों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या यह केवल एक सामयिक उछाल है या कीमती धातुओं के मूल्य निर्धारण में कोई स्थायी बड़ा बदलाव आ गया है।
चांदी की अभूतपूर्व रैली: 14 महीने बनाम 1 महीने का सफर
आंकड़ों का विश्लेषण करें तो चांदी की हालिया तेजी किसी चमत्कार से कम नहीं लगती। अक्टूबर 2024 में चांदी का भाव 1 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास था। इसे 2 लाख रुपये प्रति किलोग्राम (दिसंबर 2025) तक पहुंचने में लगभग 14 महीने का वक्त लगा। लेकिन, दिसंबर 2025 से 19 जनवरी 2026 के बीच की अवधि में चांदी ने जो छलांग लगाई, उसने बाजार के जानकारों को स्तब्ध कर दिया। महज एक महीने में चांदी 2 लाख से बढ़कर 3 लाख रुपये के पार निकल गई।
सिर्फ पिछले दो कारोबारी सत्रों की बात करें तो चांदी की कीमतों में 32,187 रुपये यानी लगभग 11.18 प्रतिशत का भारी उछाल दर्ज किया गया है। मंगलवार को मार्च डिलीवरी वाली चांदी का वायदा भाव 9,674 रुपये उछलकर ₹3,19,949 प्रति किलोग्राम पर ट्रेड करता दिखा। वहीं, हाजिर बाजार में मांग इतनी बढ़ गई कि अखिल भारतीय सर्राफा एसोसिएशन के अनुसार कीमतें ₹3.23 लाख के स्तर को छू गईं। यह रफ्तार दर्शाती है कि बाजार में इस समय जबरदस्त खरीदारी का दबाव है।
सोना पहली बार ₹1.5 लाख के पार
चांदी के साथ-साथ सोने ने भी नए रिकॉर्ड स्थापित किए हैं। मंगलवार को एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 2,560 रुपये बढ़कर ₹1,48,199 प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया। हालांकि, दिल्ली के स्थानीय बाजार में इसकी कीमतें ₹1.5 लाख प्रति 10 ग्राम के पार दर्ज की गईं। अंतरराष्ट्रीय बाजार (कॉमेक्स) में भी सोना पहली बार 4,722.55 डॉलर प्रति औंस पर पहुँच गया, जो वैश्विक स्तर पर सोने की बढ़ती स्वीकार्यता और डर के माहौल को दर्शाता है।
डिलीवरी कॉन्ट्रैक्ट्स का गणित: क्यों चर्चा में हैं फरवरी और मार्च?
बाजार की इस तेजी को समझने के लिए वायदा बाजार (MCX) के कामकाज को समझना जरूरी है। वर्तमान में जो रिकॉर्ड कीमतें सुर्खियां बटोर रही हैं, वे मुख्य रूप से ‘फरवरी’ और ‘मार्च’ डिलीवरी कॉन्ट्रैक्ट्स की हैं। वायदा बाजार में निवेशक आज की तारीख में एक तय भाव पर भविष्य के लिए सौदा करते हैं। सोने के लिए अभी सबसे सक्रिय कॉन्ट्रैक्ट फरवरी का है, जबकि चांदी के लिए मार्च का। इन महीनों का चुनाव इसलिए किया जाता है क्योंकि इनमें तरलता (Liquidity) सबसे ज्यादा होती है और अधिकांश बड़े ट्रेडर इन्हीं कॉन्ट्रैक्ट्स में अपनी पोजीशन बनाते हैं। इसीलिए जब हम कहते हैं कि चांदी 3 लाख पार कर गई है, तो इसका सीधा संबंध मार्च डिलीवरी वाले अनुबंधों से होता है।
तेजी के पीछे के बड़े कारण: युद्ध का डर और सप्लाई की कमी
विशेषज्ञों ने इस विस्फोटक तेजी के पीछे कई बड़े वैश्विक कारणों की पहचान की है। सबसे प्रमुख कारण ‘भू-राजनीतिक संकट’ (Geopolitical Crisis) है। ईरान के साथ बढ़ता तनाव, वेनेजुएला में अमेरिका का सैन्य दबाव और ग्रीनलैंड जैसे मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितताओं ने दुनिया भर के निवेशकों को डरा दिया है। जब भी वैश्विक राजनीति में अनिश्चितता बढ़ती है, निवेशक डॉलर या शेयर बाजार के बजाय सोने-चांदी को सबसे सुरक्षित ठिकाना मानते हैं।
दूसरा बड़ा कारण ‘सप्लाई और डिमांड’ के बीच का बड़ा अंतर है। चांदी की औद्योगिक मांग अभूतपूर्व रूप से बढ़ी है। सोलर पावर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स में चांदी का बड़े पैमाने पर उपयोग हो रहा है। इसके विपरीत, वैश्विक स्तर पर चांदी की खदानों से उत्पादन उस गति से नहीं बढ़ पा रहा है, जिससे बाजार में भारी किल्लत (Shortage) पैदा हो गई है। स्मार्ट वेल्थ एआई के फाउंडर पंकज सिंह का कहना है कि अब निवेशक बुलियन को केवल मुनाफा कमाने के लिए नहीं, बल्कि अपने पोर्टफोलियो के ‘बीमा’ (Insurance) के तौर पर देख रहे हैं।
निवेश की रणनीति: क्या अभी चांदी खरीदना समझदारी है?
आसमान छूती कीमतों के बीच अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इस स्तर पर निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है? बाजार के कुछ विश्लेषक अब सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं। ‘ऑग्मेंट रिपोर्ट’ जैसी कुछ हालिया रिपोर्ट्स में यह चेतावनी दी गई है कि इतनी तेज बढ़त के बाद बाजार में ‘मुनाफावसूली’ (Profit Booking) आ सकती है। इस रिपोर्ट के अनुसार, कीमतों में अचानक गिरावट आ सकती है और चांदी ₹2,60,000 प्रति किलोग्राम तक नीचे गिर सकती है। हालांकि, यह गिरावट अस्थायी हो सकती है और इसके बाद फिर से लंबी तेजी आने के आसार हैं।
बजट 2026 पर टिकी हैं निगाहें
भारतीय निवेशकों के लिए 1 फरवरी को पेश होने वाला केंद्रीय बजट अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाला है। सर्राफा व्यापारियों और निवेशकों को उम्मीद है कि सरकार सोने और चांदी पर आयात शुल्क (Import Duty) से जुड़े कुछ बड़े ऐलान कर सकती है। यदि सरकार शुल्क में कटौती करती है, तो कीमतों में कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन यदि भू-राजनीतिक स्थिति नहीं सुधरी, तो वैश्विक कीमतें घरेलू बाजार को ऊंचाइयों पर बनाए रखेंगी।
कुल मिलाकर, सर्राफा बाजार इस समय एक ऐसे दौर में है जहाँ हर दिन एक नया रिकॉर्ड बन रहा है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे ‘फोमो’ (FOMO – छूट जाने का डर) में आकर एकमुश्त निवेश करने के बजाय गिरावट का इंतजार करें और विशेषज्ञों की राय लेकर ही कदम बढ़ाएं।