वंदे भारत स्लीपर का आगाज़: 22 जनवरी से कामाख्या-हावड़ा के बीच दौड़ेगी देश की पहली हाई-स्पीड स्लीपर ट्रेन, यात्रा से पहले जान लें रिफंड के सख्त नियम
कोलकाता/गुवाहाटी: भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। देश की पहली ‘वंदे भारत स्लीपर ट्रेन’ 22 जनवरी 2026 से अपनी नियमित व्यावसायिक सेवा शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह अत्याधुनिक ट्रेन पश्चिम बंगाल के हावड़ा और असम के कामाख्या (गुवाहाटी) के बीच संचालित होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले सप्ताह ही पश्चिम बंगाल के मालदा टाउन में एक भव्य समारोह के दौरान इस हाई-स्पीड स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। लंबी दूरी की यात्रा को आरामदायक और तेज बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई यह ट्रेन तकनीकी और सेवा के मामले में वैश्विक मानकों को टक्कर देती नजर आ रही है।
वंदे भारत की अब तक की चेयर कार सेवाओं की सफलता के बाद, स्लीपर कोच वाली इस ट्रेन को लेकर यात्रियों में जबरदस्त उत्साह है। हालांकि, इस ट्रेन का अनुभव सामान्य ट्रेनों से काफी अलग होने वाला है, क्योंकि रेलवे ने इसके संचालन और टिकट बुकिंग के लिए कुछ बेहद कड़े नियम और शर्तें लागू की हैं।
958 किलोमीटर का सफर और संचालन का शेड्यूल
यह बहुप्रतीक्षित वंदे भारत स्लीपर ट्रेन हावड़ा और कामाख्या के बीच की 958 किलोमीटर की विशाल दूरी को महज 14 घंटे में तय करेगी। वर्तमान में इस मार्ग पर चलने वाली अन्य सुपरफास्ट ट्रेनों की तुलना में यह समय काफी कम है, जिससे यात्रियों के कीमती घंटों की बचत होगी। 22 जनवरी से शुरू हो रही नियमित सेवा के तहत यह ट्रेन सप्ताह में छह दिन पटरियों पर दौड़ेगी।
शेड्यूल के अनुसार, हावड़ा से यह ट्रेन प्रत्येक गुरुवार को छोड़कर शेष सभी छह दिन संचालित होगी। वहीं, कामाख्या (गुवाहाटी) से वापसी की दिशा में यह ट्रेन प्रत्येक बुधवार को छोड़कर सप्ताह के बाकी छह दिन उपलब्ध रहेगी। ट्रेन की गति और इसके स्टॉपेज को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि पूर्वोत्तर भारत और पश्चिम बंगाल के बीच व्यापारिक और पर्यटन कनेक्टिविटी को एक नई मजबूती मिल सके।
कोटा और आरएसी की सुविधा पर बड़ा बदलाव
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण जानकारी यह है कि इस ट्रेन में ‘आरएसी’ (Reservation Against Cancellation) की कोई सुविधा नहीं दी गई है। रेलवे ने स्पष्ट किया है कि इस प्रीमियम ट्रेन में केवल कन्फर्म टिकट वाले यात्रियों को ही बोर्ड करने की अनुमति होगी। इसका मुख्य उद्देश्य यात्रा के दौरान कोच के भीतर भीड़ को नियंत्रित करना और यात्रियों की निजता व आराम को सुनिश्चित करना है।
टिकटों के आवंटन में कोटा प्रणाली को लेकर भी रेलवे ने अपनी नीति स्पष्ट कर दी है। इस स्लीपर ट्रेन में केवल महिला यात्रियों, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजन और ड्यूटी पास धारकों के लिए ही विशेष कोटा उपलब्ध रहेगा। इनके अलावा, सामान्य ट्रेनों में मिलने वाली किसी भी अन्य प्रकार की विशेष रियायत या छूट इस ट्रेन में लागू नहीं होगी। रेलवे का मानना है कि उच्च श्रेणी की सुविधाओं और कम यात्रा समय को देखते हुए रियायतों को सीमित रखा गया है।
टिकट रद्दीकरण और रिफंड के कड़े नियम
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के रिफंड नियम सामान्य मेल या एक्सप्रेस ट्रेनों की तुलना में काफी सख्त और अलग रखे गए हैं। हालांकि रेलवे यात्रियों को टिकट रद्द करने पर पैसा वापस देगा, लेकिन रिफंड की जाने वाली राशि इस बात पर निर्भर करेगी कि टिकट ट्रेन के छूटने से कितने समय पहले कैंसिल किया गया है। रेलवे ने इसके लिए तीन अलग-अलग समय श्रेणियां निर्धारित की हैं, और जैसे-जैसे ट्रेन के प्रस्थान का समय नजदीक आएगा, कटौती की राशि बढ़ती जाएगी।
नियमों के अनुसार, यदि आपके पास कन्फर्म टिकट है और आप उसे ट्रेन के निर्धारित प्रस्थान समय से 72 घंटे से अधिक पहले रद्द करते हैं, तो भी आपको पूरा रिफंड नहीं मिलेगा। ऐसे मामलों में रेलवे कुल किराए का 25 प्रतिशत हिस्सा ‘कैंसलेशन चार्ज’ के रूप में काट लेगा और शेष 75 प्रतिशत राशि ही वापस की जाएगी। यह नियम उन यात्रियों के लिए एक बड़ा बदलाव है जो अब तक 48 घंटे पहले मामूली शुल्क पर टिकट रद्द करने के आदी रहे हैं।
आखिरी घंटों में कैंसलेशन पर भारी आर्थिक नुकसान
यदि कोई यात्री यात्रा से कुछ दिन पहले अपना कार्यक्रम बदलता है और ट्रेन प्रस्थान से 72 घंटे से कम लेकिन 8 घंटे से अधिक पहले टिकट रद्द करता है, तो उसे भारी कटौती का सामना करना पड़ेगा। रेलवे के नए नियमों के मुताबिक, इस समयावधि में टिकट रद्द करने पर कुल किराए का 50 प्रतिशत हिस्सा काट लिया जाएगा। यानी यात्री को केवल आधी राशि ही रिफंड के तौर पर मिलेगी।
इस सख्त रिफंड नीति का उद्देश्य टिकटों की कालाबाजारी को रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि केवल वही यात्री टिकट बुक करें जो वास्तव में यात्रा करना चाहते हैं। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि स्लीपर वंदे भारत एक प्रीमियम सेवा है और इसकी प्रत्येक सीट की मांग बहुत अधिक रहने वाली है, इसलिए रद्दीकरण शुल्क को अधिक रखा गया है ताकि सीटों की बर्बादी कम से कम हो।
यात्रा का नया अनुभव: तकनीक और सुविधा का संगम
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को विशेष रूप से रात भर की यात्रा के लिए डिजाइन किया गया है। इसके कोचों में बेहतर कुशनिंग वाली सीटें, स्वचालित दरवाजे, सेंसर आधारित लाइटिंग और आधुनिक टॉयलेट्स जैसी सुविधाएं दी गई हैं। ट्रेन के भीतर शोर और झटकों को कम करने के लिए विशेष तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे 14 घंटे का सफर थकावट भरा नहीं होगा।
कामाख्या और हावड़ा के बीच शुरू हो रही यह सेवा पूर्वोत्तर के प्रवेश द्वार को देश के प्रमुख महानगरों से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी। 22 जनवरी को जब यह ट्रेन अपनी पहली नियमित यात्रा पर निकलेगी, तो यह भारतीय रेलवे के ‘स्लीपर सेगमेंट’ में एक नई क्रांति की शुरुआत होगी।