मौनी अमावस्या पर प्रयागराज में भारी बवाल: शंकराचार्य और पुलिस के बीच टकराव से संगम क्षेत्र बना छावनी
प्रयागराज: आस्था और भक्ति का केंद्र प्रयागराज आज मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर भीषण तनाव और हंगामे का साक्षी बना। जहाँ एक ओर देश-दुनिया से आए करोड़ों श्रद्धालु संगम की लहरों में शांति की तलाश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के ‘राजसी स्नान’ को लेकर हुए विवाद ने पूरे मेला क्षेत्र में अफरातफरी मचा दी है। प्रशासन द्वारा शंकराचार्य के रथ को रोके जाने और उसके बाद हुई साधुओं की गिरफ्तारी ने मामले को इतना तूल दे दिया है कि अब संगम क्षेत्र किसी धार्मिक आयोजन स्थल के बजाय पुलिस छावनी में तब्दील हो गया है।
विवाद की शुरुआत रविवार सुबह हुई, जब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपने पारंपरिक लाव-लश्कर और अनुयायियों के साथ राजसी ठाठ-बाट से संगम की ओर प्रस्थान कर रहे थे। जैसे ही उनका भव्य रथ संगम के करीब पहुँचा, वहां तैनात सुरक्षा बलों ने उसे आगे बढ़ने से रोक दिया। पुलिस का कहना था कि मौनी अमावस्या पर उमड़ी श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व भीड़ के कारण रथ और विशाल जुलूस को संगम की ‘नोज’ (स्नान के मुख्य स्थान) तक ले जाना सुरक्षा की दृष्टि से संभव नहीं है। प्रशासन ने प्रस्ताव रखा कि शंकराचार्य अपने रथ से उतरकर केवल पांच सहयोगियों के साथ पैदल जाकर स्नान कर सकते हैं।
राजसी परंपरा बनाम प्रशासनिक नियम: टकराव की जड़
प्रशासन के इस प्रस्ताव को शंकराचार्य और उनके समर्थकों ने अपनी सदियों पुरानी परंपरा और धार्मिक गरिमा पर प्रहार माना। शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि पीठ की परंपरा के अनुसार उनका स्नान एक निर्धारित विधि और जुलूस के साथ होता है। पुलिस द्वारा रास्ता रोके जाने पर माहौल तुरंत गरमा गया। शंकराचार्य के समर्थकों और पुलिस कर्मियों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। देखते ही देखते बात धक्का-मुक्की तक पहुँच गई। शंकराचार्य ने मौके पर ही प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए इसे ‘मनमानी और तानाशाही’ करार दिया।
शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि मेला प्रशासन और पुलिस अपनी विफलता को छिपाने के लिए साधु-संतों को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि “हम कोई अपराधी नहीं हैं, हम अपनी परंपरा का निर्वहन करने आए हैं, लेकिन प्रशासन का रवैया पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है।” इस विरोध के बीच शंकराचार्य ने रथ से उतरने से मना कर दिया और वहीं धरने पर बैठ गए, जिससे संगम की ओर जाने वाला एक मुख्य मार्ग पूरी तरह बाधित हो गया।
20 से अधिक साधु हिरासत में, समर्थकों का फूटा गुस्सा
जैसे-जैसे समय बीतता गया, झड़प हिंसक रूप लेने लगी। स्थिति को अनियंत्रित होता देख पुलिस ने बल प्रयोग शुरू किया और प्रदर्शन कर रहे लगभग 20 से अधिक साधु-संतों को हिरासत में ले लिया। साधुओं को हिरासत में लिए जाने की खबर जैसे ही पूरे मेला क्षेत्र में फैली, शंकराचार्य के समर्थकों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। भीड़ ने पांटून पुल संख्या चार के पास लगाई गई सरकारी बैरिकेडिंग को उखाड़ दिया और वहां जमकर तोड़फोड़ की।
पुल संख्या चार के पास हुई इस तोड़फोड़ ने प्रशासन के हाथ-पांव फुला दिए। वायरलेस सेटों पर गूंजती अधिकारियों की आवाजों ने पूरे संगम क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी। प्रयागराज की मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल, पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार और मेलाधिकारी ऋषिराज भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे। अधिकारियों ने स्थिति को संभालने के लिए पीएसी की अतिरिक्त टुकड़ियों को तैनात कर दिया, जिससे पूरा इलाका संगीनों के साये में आ गया।
शंकराचार्य का अडिग रुख और प्रशासन की लाचारी
हंगामे के बावजूद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने अपना रुख नहीं बदला। वे समर्थकों के साथ संगम के कुछ ही दूरी पहले जमीन पर बैठ गए और नारेबाजी शुरू कर दी। पुलिस ने उन्हें दोबारा समझाने का प्रयास किया कि वे कम से कम लोगों के साथ जाकर स्नान कर लें, लेकिन शंकराचार्य ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक उनके गिरफ्तार किए गए साथियों को रिहा नहीं किया जाता और उन्हें उनके रथ के साथ ससम्मान नहीं जाने दिया जाता, वे कदम भी पीछे नहीं हटाएंगे।
शंकराचार्य के समर्थकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन अब बैकफुट पर नजर आ रहा है। स्थानीय अधिकारियों ने महसूस किया कि बल प्रयोग करने से स्थिति और भी बिगड़ सकती है, इसलिए अब सुलह का रास्ता निकाला जा रहा है। संगम तट पर तनाव इतना अधिक है कि आम श्रद्धालु भी सहमे हुए हैं। जहाँ आज के दिन ‘मौन’ रहने की परंपरा है, वहाँ आज पुलिस की सीटियाँ और प्रदर्शनकारियों के नारों का शोर गूँज रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हस्तक्षेप की तैयारी
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अब प्रयागराज प्रशासन ने इसे शासन स्तर पर ले जाने का निर्णय लिया है। सूत्रों के अनुसार, मंडलायुक्त और पुलिस कमिश्नर लगातार मुख्यमंत्री कार्यालय से संपर्क बनाए हुए हैं। अधिकारियों का मानना है कि इस स्तर के धार्मिक विवाद को सुलझाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा-निर्देशों की आवश्यकता है। अधिकारी मुख्यमंत्री को पूरी स्थिति से अवगत कराने का प्रयास कर रहे हैं ताकि कोई सर्वमान्य हल निकाला जा सके।
प्रशासन को डर है कि यदि शंकराचार्य बिना स्नान किए वापस लौट जाते हैं, तो यह पूरे देश के संत समाज में एक गलत संदेश जाएगा। वहीं, सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए पुलिस अपनी कार्रवाई को सही ठहरा रही है। फिलहाल, मुख्यमंत्री की ओर से किसी आधिकारिक निर्देश का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद ही पुलिस आगे की कार्रवाई तय करेगी।
श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच सुरक्षा की बड़ी चुनौती
मौनी अमावस्या पर प्रयागराज की धरती पर करोड़ों लोगों का रेला उमड़ा हुआ है। ऐसी स्थिति में एक भी छोटी सी घटना बड़े हादसे को जन्म दे सकती है। प्रशासन का कहना है कि उनकी पहली प्राथमिकता जनसुरक्षा है। संगम के घाटों पर जहाँ लाखों लोग एक साथ स्नान कर रहे हैं, वहाँ किसी भी बड़े जुलूस या रथ को अनुमति देना तकनीकी रूप से संभव नहीं था। पुलिस के अनुसार, उन्होंने शंकराचार्य को काफी पहले ही इस बारे में सूचित करने का प्रयास किया था, लेकिन विवाद तब बढ़ गया जब समर्थकों ने बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की।
दूसरी ओर, भक्तों का कहना है कि प्रशासन ने उचित प्रबंध नहीं किए थे। यदि शंकराचार्य का जुलूस आना था, तो उसके लिए अलग गलियारा या समय निर्धारित किया जा सकता था। वर्तमान में, पांटून पुलों पर आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे आम कल्पवासियों और तीर्थयात्रियों को घाटों तक पहुँचने में दो से तीन घंटे का अतिरिक्त समय लग रहा है।
निष्कर्ष और अनिश्चितता का माहौल
शाम ढलने की ओर है, लेकिन प्रयागराज संगम पर गतिरोध अभी भी बरकरार है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपने संकल्प पर टिके हुए हैं और प्रशासन मुख्यमंत्री के आदेश की प्रतीक्षा कर रहा है। यह घटना माघ मेले के इतिहास में एक काले अध्याय की तरह जुड़ गई है, जहाँ आस्था के सबसे बड़े पर्व पर साधुओं और खाकी के बीच सीधी जंग देखने को मिल रही है।
आने वाले घंटों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या प्रशासन नरम पड़ता है या शंकराचार्य अपने समर्थकों के साथ विरोध प्रदर्शन को और उग्र करते हैं। फिलहाल, प्रयागराज की रेती पर तनाव अपनी चरम सीमा पर है और पूरी दुनिया की नजरें संगम पर टिकी हैं कि क्या आज के दिन का ‘शाही स्नान’ विवादों की भेंट चढ़ जाएगा या कोई बीच का रास्ता निकलेगा।