• February 11, 2026

मुंबई में सत्ता का नया समीकरण: रितु तावड़े होंगी भाजपा की पहली महिला मेयर, डिप्टी मेयर पद पर शिंदे गुट के संजय घाड़ी की ताजपोशी तय

मुंबई। देश की सबसे अमीर महानगरपालिका, बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) में सत्ता का वनवास खत्म करते हुए भारतीय जनता पार्टी ने ऐतिहासिक बढ़त के साथ अपने महापौर पद के चेहरे की घोषणा कर दी है। महायुति गठबंधन की ओर से भाजपा की वरिष्ठ नेता और घाटकोपर से तीन बार की पार्षद रितु तावड़े को मुंबई के मेयर पद के लिए उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं, गठबंधन धर्म को निभाते हुए शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के वरिष्ठ नेता संजय शंकर घाड़ी को डिप्टी मेयर पद का प्रत्याशी घोषित किया गया है। बीएमसी के चुनावी नतीजों के बाद आंकड़ों का गणित पूरी तरह महायुति के पक्ष में है, जिससे यह साफ हो गया है कि आगामी 11 फरवरी को होने वाले चुनाव महज एक औपचारिकता होंगे और मुंबई को इतिहास में पहली बार भाजपा का मेयर मिलना निश्चित है।

मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम ने रितु तावड़े के नाम पर मुहर लगाते हुए स्पष्ट किया कि पार्टी ने एक अनुभवी और जमीन से जुड़ी महिला नेत्री पर भरोसा जताया है। गौरतलब है कि इस बार मुंबई मेयर का पद खुली श्रेणी की महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित है। रितु तावड़े की उम्मीदवारी न केवल भाजपा के लिए बल्कि मुंबई की राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह शिक्षा समिति की पूर्व अध्यक्ष के रूप में अपनी प्रशासनिक क्षमताओं को पहले ही साबित कर चुकी हैं। तावड़े की छवि एक सक्रिय और जनहित के मुद्दों पर मुखर रहने वाली नेता की रही है, जिसका लाभ भाजपा को आगामी कार्यकाल में बीएमसी के कामकाज को सुव्यवस्थित करने में मिलेगा।

दूसरी ओर, शिवसेना के खेमे से संजय शंकर घाड़ी के नाम की घोषणा शिवसेना नेता राहुल शेवाले ने की। मागाथाने के वार्ड नंबर 5 से पार्षद घाड़ी शिवसेना के उन कद्दावर नेताओं में शुमार हैं जिन्होंने उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व पर भरोसा जताया था। शिवसेना सचिव संजय मोरे ने इस नियुक्ति के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि घाड़ी का कार्यकाल 15 महीने यानी सवा साल का होगा। शिवसेना ने अपने आंतरिक सांगठनिक संतुलन को बनाए रखने के लिए डिप्टी मेयर के कार्यकाल को विभाजित करने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत घाड़ी के बाद शिवसेना अपने अन्य तीन वरिष्ठ पार्षदों को भी इस पद पर बारी-बारी से अवसर प्रदान करेगी, ताकि गठबंधन के भीतर सत्ता का विकेंद्रीकरण सुनिश्चित किया जा सके।

बीएमसी चुनाव के हालिया नतीजों ने मुंबई की राजनीतिक बिसात को पूरी तरह पलट कर रख दिया है। 227 सदस्यीय सदन में भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। वहीं, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने 29 सीटों पर जीत दर्ज की है। इस तरह सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के पास कुल 118 पार्षदों का समर्थन है, जो बहुमत के जादुई आंकड़े 114 से चार अधिक है। इस संख्या बल ने विपक्षी खेमे की चुनौतियों को लगभग समाप्त कर दिया है। हालांकि, सियासी गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस भी प्रतीकात्मक रूप से अपने उम्मीदवार मैदान में उतार सकते हैं, लेकिन आंकड़ों के लिहाज से उनकी राह अत्यंत कठिन नजर आ रही है।

करीब नौ साल के लंबे अंतराल के बाद हुए इन चुनावों ने शिवसेना (यूबीटी) के उस वर्चस्व को भी हिला दिया है जो 1997 से लगातार 25 वर्षों तक कायम था। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना इस बार मात्र 65 सीटों पर सिमट गई है। उनके सहयोगियों की स्थिति भी कुछ खास बेहतर नहीं रही; महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को छह और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) को केवल एक सीट से संतोष करना पड़ा है। अन्य दलों की बात करें तो कांग्रेस ने 24 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि एआईएमआईएम ने आठ, एनसीपी (अजीत पवार गुट) ने तीन और समाजवादी पार्टी ने दो सीटें जीती हैं। सदन में दो निर्दलीय उम्मीदवार भी अपनी जगह बनाने में सफल रहे हैं।

आज, सात फरवरी को नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि है, जिसे देखते हुए मुंबई के राजनीतिक माहौल में भारी गहमागहमी बनी हुई है। महायुति के दोनों उम्मीदवार आज ही अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। इस अवसर पर गठबंधन अपनी एकजुटता और शक्ति का प्रदर्शन करने के लिए एक विशाल रैली और शक्ति प्रदर्शन की तैयारी में है। 11 फरवरी को होने वाले मतदान में सभी पार्षदों की उपस्थिति अनिवार्य की गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने रितु तावड़े को चुनकर न केवल महिला सशक्तिकरण का संदेश दिया है, बल्कि एक अनुभवी चेहरा सामने रखकर बीएमसी के भारी-भरकम बजट के कुशल प्रबंधन का संकेत भी दिया है।

बीएमसी का महत्व इसी बात से समझा जा सकता है कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए इसका कुल बजट 74,450 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। यह राशि भारत के कई छोटे राज्यों के कुल वार्षिक बजट से भी अधिक है। इतने विशाल संसाधनों वाले निगम की कमान अब भाजपा और शिंदे गुट के हाथों में आने वाली है। रितु तावड़े और संजय घाड़ी की जोड़ी के सामने मुंबई की बुनियादी ढांचागत समस्याओं, मानसून की चुनौतियों और शहरी विकास की बड़ी परियोजनाओं को गति देने की जिम्मेदारी होगी। आने वाले 11 फरवरी को होने वाला चुनाव महज एक पद की प्राप्ति नहीं, बल्कि मुंबई की सत्ता में एक नए युग की शुरुआत का गवाह बनेगा।

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