मुंबई की कमान संभालेंगी रितु तावड़े: बीएमसी में पहली बार भाजपा का मेयर बनना तय, जानें कौन हैं आक्रामक मराठी चेहरा मानी जाने वाली रितु
मुंबई। देश की सबसे प्रतिष्ठित और आर्थिक रूप से संपन्न महानगरपालिका, बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। हालिया चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी भारतीय जनता पार्टी ने मेयर पद के लिए रितु तावड़े के नाम की आधिकारिक घोषणा कर दी है। यह घोषणा न केवल सत्ता के हस्तांतरण का संकेत है, बल्कि मुंबई की राजनीति में उस ढाई दशक पुराने वर्चस्व के अंत की मुनादी भी है, जिसमें मेयर पद पर हमेशा शिवसेना का कब्जा रहता था। रितु तावड़े की उम्मीदवारी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि वे न केवल भाजपा की एक अनुभवी पार्षद हैं, बल्कि उन्हें एक ऐसे चेहरे के रूप में देखा जाता है जो मराठी और गुजराती दोनों समुदायों के बीच समान रूप से लोकप्रिय हैं।
मुंबई मेयर का पद इस बार खुली श्रेणी की महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित है, जिसके चलते भाजपा ने एक ऐसी महिला नेतृत्व को आगे किया है जिसका सियासी सफर संघर्ष और उपलब्धियों से भरा रहा है। 18 अप्रैल 1973 को जन्मी रितु तावड़े ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद एसवाईबी.कॉम (S.Y.B.Com) तक की पढ़ाई की है। उनके व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो उनका परिवार भी काफी सुशिक्षित और सुदृढ़ है। उनके पति राजेश तावड़े एक सफल उद्यमी हैं, जबकि उनका बेटा यश कंप्यूटर इंजीनियर और बेटी मधुरा एक अधिवक्ता के रूप में समाज सेवा से जुड़े हैं। परिवार के इस मजबूत आधार ने रितु को राजनीति के उतार-चढ़ाव भरे रास्ते पर मजबूती से खड़े होने का संबल प्रदान किया है।
रितु तावड़े का राजनीतिक करियर केवल पदों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि उन्होंने जमीनी स्तर पर अपनी पैठ बनाई है। वे घाटकोपर क्षेत्र से तीन बार की पार्षद रह चुकी हैं। उनके चुनावी जीत का सिलसिला वर्ष 2012 में प्रभाग संख्या 127 से शुरू हुआ, जिसे उन्होंने 2017 में प्रभाग 121 और अब 2025 के चुनाव में प्रभाग 132 में बरकरार रखा। यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि घाटकोपर को परंपरागत रूप से गुजराती बहुल क्षेत्र माना जाता है, और एक मराठा चेहरा होने के बावजूद रितु तावड़े ने वहां बड़े अंतर से जीत हासिल कर अपनी सर्वसमावेशी छवि को पुख्ता किया है। भाजपा के भीतर वे महाराष्ट्र प्रदेश महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष जैसी अहम जिम्मेदारी भी निभा चुकी हैं।
नगर निगम के कामकाज में उनकी विशेषज्ञता की चर्चा हमेशा होती रही है। बीएमसी की शिक्षा समिति की अध्यक्षा के रूप में उन्होंने मुंबई के सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने और शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाने के लिए कई ठोस कदम उठाए थे। उनकी इसी प्रशासनिक सूझबूझ को देखते हुए भाजपा नेतृत्व ने उन्हें इस प्रतिष्ठित पद के लिए सबसे उपयुक्त माना है। रितु तावड़े की पहचान केवल एक शांत राजनेता की नहीं, बल्कि एक आक्रामक आंदोलनकारी की भी रही है। उन्होंने महिलाओं के सम्मान के लिए लंबी लड़ाई लड़ी है। विशेष रूप से अश्लील विज्ञापनों के खिलाफ उनके द्वारा चलाए गए आंदोलनों की गूँज न केवल मुंबई और महाराष्ट्र में सुनाई दी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी चर्चा हुई।
सामाजिक सरोकारों से जुड़े उनके कार्यों में घाटकोपर की जल समस्या का समाधान सबसे प्रमुख रहा है। क्षेत्र में व्याप्त पानी की किल्लत और पानी माफियाओं के आतंक को खत्म करने के लिए उन्होंने ऐतिहासिक ‘हंडा मोर्चा’ निकाला था। इस कड़े विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासन को झुकना पड़ा और पानी माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित हुई। इसके अतिरिक्त, ‘महिला आर्थिक विकास महामंडल’ की पूर्व निदेशक के रूप में उन्होंने हजारों महिलाओं को रोजगार के अवसर प्रदान किए और उन्हें वित्तीय रूप से स्वावलंबी बनाने की दिशा में काम किया। चुनाव प्रचार के दौरान भी उन्होंने स्पष्ट किया था कि उनकी प्राथमिकता राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं जैसे ‘शासन आपल्या दारी’ और ‘लाडकी बहीण’ योजना को सीधे मुंबई की जनता की दहलीज तक पहुँचाना है।
बीएमसी में सत्ता का समीकरण अब पूरी तरह से बदल चुका है। 227 सदस्यीय सदन में भाजपा 89 सीटों के साथ अग्रणी भूमिका में है, जबकि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने 29 सीटें जीतकर गठबंधन को मजबूती प्रदान की है। इस प्रकार, सत्तारूढ़ महायुति के पास कुल 118 पार्षदों का समर्थन है, जो बहुमत के लिए अनिवार्य 114 के आंकड़े से स्पष्ट रूप से अधिक है। इसी शक्ति प्रदर्शन के तहत शिवसेना (शिंदे गुट) ने उप महापौर पद पर अपना दावा किया है और संजय शंकर घाड़ी को उम्मीदवार बनाया है। बहुमत का यह स्पष्ट गणित रितु तावड़े के निर्बाध चयन का मार्ग प्रशस्त करता है।
बीएमसी के आगामी चुनाव परिणाम और रितु तावड़े की ताजपोशी मुंबई के विकास मॉडल में एक बड़ा बदलाव ला सकती है। जहाँ पिछले 25 वर्षों से शिवसेना (यूबीटी) का निकाय पर एकछत्र राज था, वहीं अब भाजपा का नेतृत्व मुंबई के 74 हजार करोड़ रुपये से अधिक के बजट को एक नई दिशा देने के लिए तैयार है। रितु तावड़े के रूप में मुंबई को एक ऐसी मेयर मिलने जा रही है जो न केवल अनुभवी है, बल्कि जिसके पास प्रशासनिक पारदर्शिता और सामाजिक प्रतिबद्धता का लंबा रिकॉर्ड है।