महाराष्ट्र ने खोया अपना ‘दादा’: बारामती में राजकीय सम्मान के साथ अजित पवार का अंतिम संस्कार, उमड़ा जनसैलाब
बारामती: महाराष्ट्र की राजनीति के एक युग का अंत हो गया है। उपमुख्यमंत्री अजित पवार, जिन्हें उनके समर्थक प्यार से ‘दादा’ पुकारते थे, गुरुवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। उनके पैतृक निवास बारामती में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। बुधवार को हुए एक हृदयविदारक विमान हादसे में उनके आकस्मिक निधन ने न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। बारामती के विद्या प्रतिष्ठान मैदान में आयोजित अंतिम संस्कार के दौरान लाखों की संख्या में उमड़े जनसैलाब ने नम आंखों से अपने प्रिय नेता को विदाई दी। “अजित दादा अमर रहें” के नारों से पूरा बारामती गूंज उठा और माहौल पूरी तरह गमगीन रहा।
अंतिम संस्कार की रस्में दोपहर बाद शुरू हुईं, जब अजित पवार के पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटकर उनके पैतृक गांव काटेवाड़ी से विद्या प्रतिष्ठान मैदान लाया गया। उनके दोनों बेटों, पार्थ और जय पवार ने अपने पिता की चिता को मुखाग्नि दी। यह दृश्य अत्यंत भावुक कर देने वाला था, जिसे देख वहां मौजूद हजारों लोगों की आंखें भर आईं। इस दौरान उनकी पत्नी और राज्यसभा सदस्य सुनेत्रा पवार अपने आंसुओं को रोक नहीं पा रही थीं। परिवार के लिए यह अपूरणीय क्षति थी और इस दुखद घड़ी में पूरा पवार परिवार एक साथ खड़ा नजर आया।
अजित पवार के अंतिम सफर में शामिल होने के लिए भारतीय राजनीति के कई दिग्गज बारामती पहुंचे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह विशेष रूप से दिल्ली से बारामती पहुंचे और दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके साथ केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, मुरलीधर मोहोल और भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन भी मौजूद थे। सबसे मार्मिक दृश्य तब दिखा जब राकांपा (एसपी) प्रमुख और अजित पवार के चाचा शरद पवार वहां पहुंचे। अपने भतीजे को खोने का गम उनके चेहरे पर साफ झलक रहा था। वे पूरे समय शांत भाव से बैठे रहे और अपने राजनीतिक उत्तराधिकारी और परिवार के सदस्य को अंतिम विदाई दी।
राज्य सरकार की ओर से मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बारामती पहुंचकर पुष्पचक्र अर्पित किए। प्रशासन और सत्ता के गलियारों में अजित पवार के प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता था कि सत्तापक्ष और विपक्ष के लगभग सभी बड़े नेता एक ही स्थान पर नजर आए। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने भी काटेवाड़ी जाकर परिवार से मुलाकात की और अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। सांसद सुप्रिया सुले पूरे समय अपनी भाभी सुनेत्रा पवार का हाथ थामे उन्हें सांत्वना देती रहीं, जो कठिन समय में परिवार की एकजुटता का प्रतीक बना।
अजित पवार अपने सख्त अनुशासन और कार्यशैली के लिए मशहूर थे। उनकी इसी छवि को ध्यान में रखते हुए अंतिम संस्कार के दौरान प्रशासन ने लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों से बार-बार शांति बनाए रखने का अनुरोध किया। अधिकारियों ने कहा कि ‘दादा’ के अनुशासन प्रिय स्वभाव को देखते हुए शांति और व्यवस्था बनाए रखना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। अंतिम विदाई देने वालों में गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, पूर्व मुख्यमंत्री सुशीलकुमार शिंदे, अशोक चव्हाण, प्रफुल्ल पटेल और रामदास अठावले जैसे बड़े नेता भी शामिल थे। मनोरंजन जगत से अभिनेता रितेश देशमुख ने भी पहुंचकर उन्हें नमन किया।
विमान हादसे की भयावहता ने पूरे प्रशासन को हिला कर रख दिया है। यह दुखद घटना बुधवार को उस समय हुई जब अजित पवार का विमान बारामती एयरस्ट्रिप पर लैंड करने ही वाला था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रनवे से मात्र 200 मीटर पहले विमान अनियंत्रित होकर गिर गया और उसमें भीषण आग लग गई। इस हादसे में न केवल अजित पवार, बल्कि चार अन्य लोगों ने भी अपनी जान गंवाई। मृतकों में अनुभवी पायलट कैप्टन सुमित कपूर, को-पायलट कैप्टन शाम्भवी पाठक, सुरक्षा अधिकारी विदीप जाधव और फ्लाइट अटेंडेंट पिंकी माली शामिल थे। सभी मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम कर उन्हें उनके परिजनों को सौंप दिया गया है।
इस हाई-प्रोफाइल हादसे की जांच के लिए पुलिस ने आकस्मिक मौत का मामला दर्ज किया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने पुष्टि की है कि दुर्घटनाग्रस्त विमान का ‘ब्लैक बॉक्स’ बरामद कर लिया गया है। इस ब्लैक बॉक्स में मौजूद फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर के विश्लेषण से यह स्पष्ट हो पाएगा कि आखिर लैंडिंग के अंतिम क्षणों में ऐसा क्या हुआ जिससे यह हादसा हुआ। प्रारंभिक जांच में खराब विजिबिलिटी और तकनीकी खराबी की आशंका जताई जा रही है, लेकिन आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
अजित पवार का जाना महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा शून्य पैदा कर गया है। वे न केवल एक कुशल प्रशासक थे, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं से जुड़े रहने वाले नेता थे। उनकी विकासपरक सोच और निर्णय लेने की क्षमता का लोहा उनके विरोधी भी मानते थे। बारामती के विकास में उनका योगदान अतुलनीय है और आज उसी भूमि ने उन्हें अपनी गोद में हमेशा के लिए सुला लिया। प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे और पूरा शहर आज अपने नेता के सम्मान में स्वतः बंद रहा।
अजित पवार की विरासत उनके द्वारा किए गए कार्यों और उनके समर्थकों के दिलों में जीवित रहेगी। राजकीय सम्मान के साथ हुई उनकी विदाई ने यह साबित कर दिया कि वैचारिक मतभेदों के बावजूद वे राज्य के एक कद्दावर और सम्मानित नेता थे। अब जांच का विषय यह है कि विमान सुरक्षा में कहां चूक हुई, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं को टाला जा सके।