बारामती विमान हादसा: जांच के लिए AAIB की तीन सदस्यीय टीम गठित, ब्लैक बॉक्स से खुलेंगे उपमुख्यमंत्री अजित पवार की मौत के राज
मुंबई/बारामती: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार और चार अन्य लोगों की जान लेने वाले दुखद विमान हादसे की गुत्थी सुलझाने के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कमर कस ली है। मंत्रालय ने इस हाई-प्रोफाइल दुर्घटना की गहन जांच के लिए विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की एक तीन सदस्यीय विशेष टीम का गठन किया है। इस टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, AAIB की इस टीम के साथ मुंबई कार्यालय के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के तीन अधिकारी भी शामिल हैं, जिन्होंने दुर्घटना के दिन ही मलबे का मुआयना किया था। जांच की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि AAIB के महानिदेशक ने स्वयं बारामती पहुंचकर उस स्थान का दौरा किया जहां यह भयावह हादसा हुआ था।
जांच टीम के लिए सबसे बड़ी सफलता ‘ब्लैक बॉक्स’ की बरामदगी रही है। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि मलबे से कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) सुरक्षित निकाल लिए गए हैं। ये उपकरण किसी भी विमान हादसे की जांच में रीढ़ की हड्डी माने जाते हैं, क्योंकि इनमें पायलटों के बीच हुई आखिरी बातचीत और विमान के तकनीकी मापदंडों का पूरा डेटा रिकॉर्ड होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन रिकॉर्डर्स के विश्लेषण से ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि लैंडिंग के अंतिम क्षणों में क्या कोई तकनीकी खराबी आई थी या मानवीय त्रुटि इस हादसे का कारण बनी। फिलहाल, टीम ने फॉरेंसिक प्रक्रियाओं के तहत विमान के मलबे को सील कर दिया है और महत्वपूर्ण साक्ष्यों को लैब भेजने की तैयारी कर ली गई है।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा साझा किए गए विवरण के अनुसार, 28 जनवरी की सुबह विमान की गतिविधियों का क्रम बेहद चौंकाने वाला रहा। विमान ने सुबह 8:10 बजे मुंबई से उड़ान भरी थी और ठीक 8 मिनट बाद यानी 8:18 बजे बारामती एयरफील्ड के कंट्रोल रूम से संपर्क स्थापित किया। रनवे 11 पर लैंडिंग के लिए पहली कोशिश (अप्रोच) के दौरान क्रू ने कंट्रोल रूम को सूचित किया कि खराब विजिबिलिटी के कारण उन्हें रनवे स्पष्ट दिखाई नहीं दे रहा है। इसके बाद पायलटों ने मानक प्रक्रिया के तहत ‘गो-अराउंड’ (विमान को वापस ऊपर ले जाना) किया। इसके बाद विमान ने दोबारा लैंडिंग के लिए अपनी पोजीशन बनाई और एयरफील्ड को संदेश दिया कि जैसे ही रनवे दिखाई देगा, वे रिपोर्ट करेंगे। सुबह 8:43 बजे विमान को लैंडिंग की अनुमति तो मिली, लेकिन उसके बाद क्रू की तरफ से कोई फीडबैक नहीं आया। महज एक मिनट बाद, ग्राउंड स्टाफ ने रनवे के पास आग की लपटें देखीं और तुरंत आपातकालीन सेवाओं को सूचित किया।
शुरुआती जांच में टीम का पूरा ध्यान तीन मुख्य पहलुओं पर केंद्रित है: दुर्घटना के समय विजिबिलिटी की वास्तविक स्थिति, पायलट द्वारा लिए गए त्वरित निर्णय और बारामती जैसे ‘अनकंट्रोल्ड एयरफील्ड’ पर विमान संचालन की सीमाएं। जांच के दायरे को विस्तृत करते हुए AAIB ने दिल्ली स्थित विमान ऑपरेटर ‘VSR वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड’ से विमान के एयरफ्रेम और इंजन की लॉगबुक, पिछले रखरखाव के रिकॉर्ड, निरीक्षण का इतिहास और वर्क ऑर्डर मांगे हैं। साथ ही, DGCA से पायलटों की योग्यता के रिकॉर्ड और विमान के प्रमाणन दस्तावेजों की भी बारीकी से जांच की जा रही है।
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यद्यपि प्रारंभिक संकेत खराब विजिबिलिटी और धुंध की ओर इशारा कर रहे हैं, लेकिन अभी किसी भी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि AAIB एक सक्षम और स्वतंत्र संस्था है जो पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ तथ्यों को सामने लाएगी। दूसरी ओर, DGCA ने अपनी टिप्पणी में कहा कि हादसे के वक्त अनुमानित दृश्यता लगभग 3,000 मीटर थी और हवाएं शांत थीं, जो आमतौर पर विजुअल फ्लाइट रूल्स (VFR) के तहत लैंडिंग के लिए पर्याप्त मानी जाती हैं। ऐसे में यह जांच का विषय है कि पायलट ने रनवे न दिखने की बात क्यों कही थी।
हादसे का शिकार हुए विमान की कंपनी, VSR वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक विजय कुमार सिंह ने विमान में किसी भी तकनीकी खराबी की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि विमान पूरी तरह से उड़ान के योग्य था और उसका रखरखाव अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप किया गया था। सिंह के अनुसार, पायलट ने पहली बार में विजिबिलिटी कम होने के कारण ‘मिस्ड अप्रोच’ लिया था, लेकिन दूसरी बार लैंडिंग के प्रयास के दौरान यह अनहोनी हो गई। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि विमान के मुख्य पायलट (कैप्टन) के पास 16,000 घंटे से अधिक की उड़ान का विशाल अनुभव था, जबकि सह-पायलट भी 1,500 घंटे के अनुभव के साथ काफी अनुभवी थे।
इस हादसे ने न केवल महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा शून्य पैदा कर दिया है, बल्कि वीआईपी उड़ानों की सुरक्षा और छोटे एयरफील्ड्स पर लैंडिंग प्रोटोकॉल को लेकर भी नए सवाल खड़े कर दिए हैं। बारामती में उपमुख्यमंत्री अजित पवार का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ कर दिया गया है, लेकिन उनके समर्थकों और परिवार के मन में अब भी इस सवाल का जवाब बाकी है कि आखिर उस सुबह ऐसा क्या हुआ जिसने ‘दादा’ को उनसे हमेशा के लिए छीन लिया। AAIB की टीम अगले कुछ हफ्तों तक डेटा का विश्लेषण करेगी और उम्मीद है कि जल्द ही प्रारंभिक रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी।