• January 31, 2026

बजट सत्र 2026: संसद में विधायी कार्य के सुचारू संचालन के लिए सर्वदलीय बैठक, राजनाथ सिंह ने विपक्ष से मांगा सहयोग

संसद के आगामी बजट सत्र को व्यवस्थित और निर्बाध रूप से संचालित करने के उद्देश्य से मंगलवार को नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक का आयोजन किया गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सरकार ने सभी राजनीतिक दलों से सदन की कार्यवाही में सहयोग करने की अपील की। यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले कुछ सत्रों में विभिन्न मुद्दों को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक और गतिरोध देखने को मिला था। इस बार सरकार की प्राथमिकता है कि बजट जैसे महत्वपूर्ण वित्तीय और विधायी कार्यों पर स्वस्थ चर्चा हो सके।

संसदीय सौहार्द बनाए रखने की कवायद के तहत बुलाई गई इस बैठक में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू सहित सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री उपस्थित रहे। विपक्ष की ओर से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश सहित विभिन्न क्षेत्रीय दलों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक के दौरान सरकार ने आगामी सत्र के संभावित एजेंडे और प्रस्तावित विधेयकों की रूपरेखा साझा की। वहीं, विपक्षी दलों ने भी अपनी प्राथमिकताएं सामने रखीं। सूत्रों के अनुसार, विपक्षी नेताओं ने संकेत दिया है कि वे पूरे देश में चल रहे ‘चुनावी सूचियों के विशेष गहन संशोधन’ (SIR) के मुद्दे पर सदन में चर्चा चाहते हैं। इसके अतिरिक्त, आर्थिक स्थिति, महंगाई और रोजगार जैसे विषयों पर भी विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है।

संसद के इस महत्वपूर्ण बजट सत्र की औपचारिक शुरुआत बुधवार से होगी। परंपरा के अनुसार, सत्र के पहले दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) की संयुक्त बैठक को संबोधित करेंगी। राष्ट्रपति का यह अभिभाषण सरकार की आगामी प्राथमिकताओं और पिछले एक वर्ष की उपलब्धियों का एक विस्तृत दस्तावेज होगा। इसके तुरंत बाद, वित्त मंत्री द्वारा आर्थिक सर्वेक्षण पेश किए जाने की संभावना है, जो देश की अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति का लेखा-जोखा प्रदान करेगा।

इस सत्र का सबसे प्रतीक्षित क्षण 1 फरवरी, रविवार को आएगा, जब केंद्रीय बजट पेश किया जाएगा। चूंकि बजट सत्र दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है, इसलिए पहले चरण की समयसीमा 13 फरवरी तक निर्धारित की गई है। इस प्रथम चरण के दौरान संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर ‘धन्यवाद प्रस्ताव’ पर विस्तृत चर्चा की जाएगी और तत्पश्चात उसे पारित किया जाएगा। साथ ही, केंद्रीय बजट के मुख्य प्रावधानों पर प्रारंभिक बहस भी इसी अवधि में संपन्न होगी। प्रथम चरण की समाप्ति के बाद एक अंतराल रखा गया है, जिसके दौरान संसदीय समितियां विभिन्न मंत्रालयों की अनुदान मांगों की सूक्ष्मता से जांच करेंगी।

बजट सत्र का दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा। इस चरण में मंत्रालयों की अनुदान मांगों पर चर्चा और मतदान होगा, जिसके बाद वित्त विधेयक और विनियोग विधेयक को पारित करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। विधायी कार्यों के दृष्टिकोण से यह सत्र अत्यंत व्यस्त रहने वाला है, क्योंकि सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को कानून का रूप देने का प्रयास करेगी।

सर्वदलीय बैठक के समानांतर, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस भी अपनी आंतरिक रणनीति को अंतिम रूप देने में जुट गई है। कांग्रेस संसदीय दल की एक अहम बैठक सोनिया गांधी के आवास पर आयोजित की जा रही है। इस बैठक में विपक्षी गठबंधन के अन्य घटकों के साथ समन्वय और सदन के भीतर उठाए जाने वाले ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा होगी। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि बजट सत्र सरकार की नीतियों की आलोचनात्मक समीक्षा करने का सबसे उपयुक्त मंच है, इसलिए वे ‘चुनावी सूची संशोधन’ जैसे तकनीकी और राजनीतिक महत्व के मुद्दों पर सरकार से स्पष्टीकरण की मांग करेंगे।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बैठक के बाद मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में उम्मीद जताई कि सभी दल सदन की गरिमा को बनाए रखते हुए सार्थक चर्चा में भाग लेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार नियमों के तहत हर उस मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, जिस पर सभापति और अध्यक्ष की सहमति होगी। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम है कि सत्र के दौरान टकराव की स्थिति बन सकती है, विशेष रूप से उन मुद्दों पर जो सीधे तौर पर चुनावी प्रक्रियाओं और राज्यों के हितों से जुड़े हैं।

संसद का यह बजट सत्र न केवल वित्तीय नियोजन के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आगामी विधानसभा चुनावों से पहले देश के राजनीतिक मिजाज को समझने का भी एक जरिया बनेगा। अब देखना यह होगा कि मंगलवार की सर्वदलीय बैठक में बनी आपसी सहमति धरातल पर कितनी प्रभावी साबित होती है और क्या संसद बिना किसी बड़े शोर-शराबे के अपने विधायी लक्ष्यों को प्राप्त कर पाती है।

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