• February 4, 2026

केरल चुनाव के लिए कांग्रेस का मास्टरप्लान: शशि थरूर ने पेश किया ‘विज़न डॉक्यूमेंट’ का खाका, भ्रष्टाचार और विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ फूंका बिगुल

तिरुवनंतपुरम/नई दिल्ली: केरल विधानसभा चुनाव 2026 की आहट के साथ ही राज्य की राजनीतिक बिसात पर शह और मात का खेल शुरू हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने पार्टी की चुनावी रणनीति का खुलासा करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि इस बार यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) केवल नारों के सहारे नहीं, बल्कि एक ठोस और विस्तृत ‘विज़न डॉक्यूमेंट’ के साथ जनता के बीच जाएगा। नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान थरूर ने संकेत दिए कि यह दस्तावेज़ केरल के भविष्य के लिए एक मुकम्मल रोडमैप होगा, जिसका मुख्य फोकस युवाओं के लिए अवसर पैदा करना, विकास की गति को तेज करना और राज्य की आर्थिक सेहत को सुधारना होगा। थरूर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब केरल में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार बन रहे हैं और कांग्रेस सत्ता में वापसी के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है।

शशि थरूर ने यूडीएफ के चुनावी एजेंडे को ‘समृद्ध केरल’ के विचार के इर्द-गिर्द केंद्रित बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के पास शासन का लंबा अनुभव है। उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस ने केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर सफलतापूर्वक सरकारें चलाई हैं और इसी अनुभव का लाभ उठाते हुए एक ऐसा विकास मॉडल तैयार किया जा रहा है जो केरल की विशिष्ट सामाजिक और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल हो। थरूर के अनुसार, आगामी विज़न डॉक्यूमेंट केवल घोषणापत्र नहीं होगा, बल्कि इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, आईटी और पर्यटन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए एक समयबद्ध कार्ययोजना शामिल होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि यूडीएफ का उद्देश्य केरल को एक ऐसा निवेश गंतव्य बनाना है जहाँ से प्रतिभाओं का पलायन रुके और स्थानीय स्तर पर रोजगार के द्वार खुलें।

अपनी रणनीति साझा करने के साथ-साथ शशि थरूर ने प्रतिद्वंद्वी दलों पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) सरकार को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेरते हुए कहा कि वर्तमान शासन के दौरान केरल के लोगों का भरोसा पूरी तरह टूट चुका है। थरूर ने आरोप लगाया कि कई बड़े भ्रष्टाचार के मामलों ने राज्य की छवि को नुकसान पहुँचाया है और विकास कार्य ठप पड़े हैं। एलडीएफ सरकार की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि जनता अब एक पारदर्शी और जवाबदेह सरकार चाहती है, जो केवल यूडीएफ ही प्रदान कर सकती है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का नाम लिए बिना उन्होंने विभाजनकारी राजनीति का मुद्दा उठाया। थरूर ने कहा कि एक तरफ वह पार्टी है जो समाज को धर्म और जाति के आधार पर बांटने की कोशिश करती है, और दूसरी तरफ यूडीएफ है जो सबको साथ लेकर चलने और विकास पर आधारित राजनीति में विश्वास रखती है।

इस चुनावी सुगबुगाहट के बीच शशि थरूर की अपनी पार्टी के भीतर की स्थिति को लेकर भी काफी चर्चा रही है। पिछले कुछ समय से केरल कांग्रेस के भीतर थरूर को किनारे किए जाने और कोच्चि के एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उनके साथ हुए व्यवहार को लेकर कयासों का बाजार गर्म था। इन तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए थरूर ने जानकारी दी कि उन्होंने हाल ही में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से विस्तार से मुलाकात की है। थरूर ने संतोष जताते हुए कहा कि अब सब ठीक है और पार्टी के सभी शीर्ष नेता एक ही सोच और ऊर्जा के साथ चुनावी मैदान में उतरने को तैयार हैं। इस मुलाकात को केरल कांग्रेस के भीतर गुटबाजी खत्म करने और थरूर जैसे कद्दावर नेता को चुनावी कमान में प्रमुख भूमिका देने के तौर पर देखा जा रहा है।

बजट के मोर्चे पर भी थरूर ने केंद्र सरकार के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर की। केंद्रीय बजट 2026-27 पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के भाषण में केरल की उपेक्षा की गई है। उन्होंने निराशा जताते हुए कहा कि शुरुआती भाषण में केरल के लिए ऐसी कोई विशेष घोषणा या राहत पैकेज नहीं दिखा जिससे राज्य की जनता को खुशी हो सके। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे बजट दस्तावेजों का गहन अध्ययन कर रहे हैं और उसके बाद ही यह पूरी तरह साफ हो पाएगा कि राज्य को वास्तव में क्या मिला है और किन महत्वपूर्ण परियोजनाओं को फंड से वंचित रखा गया है। थरूर का यह रुख दर्शाता है कि कांग्रेस आगामी चुनाव में ‘केंद्र की उपेक्षा’ को भी एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में है।

केरल के राजनीतिक परिदृश्य की बात करें तो आगामी विधानसभा चुनाव ऐतिहासिक होने की संभावना है। जहाँ एलडीएफ मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल कर ‘हैट्रिक’ बनाने की कोशिश में है, वहीं यूडीएफ अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए बेताब है। इन दोनों पारंपरिक मोर्चों के बीच भाजपा भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए पूरी ताकत लगा रही है। ऐसे में शशि थरूर का ‘विज़न डॉक्यूमेंट’ वाला दांव कांग्रेस को बौद्धिक और विकासोन्मुख बढ़त दिलाने की एक सोची-समझी कोशिश मानी जा रही है। थरूर का मानना है कि केरल की शिक्षित और जागरूक जनता अब केवल भावनात्मक मुद्दों पर नहीं, बल्कि प्रदर्शन और भविष्य की योजनाओं के आधार पर वोट देगी।

निष्कर्ष के तौर पर, शशि थरूर के बयानों ने यह साफ कर दिया है कि केरल चुनाव इस बार भ्रष्टाचार बनाम विकास और विभाजन बनाम एकता के मुद्दों पर लड़ा जाएगा। यूडीएफ अपने विज़न डॉक्यूमेंट के जरिए एक सकारात्मक विकल्प पेश करना चाहता है, जिसमें रोजगार और आर्थिक समृद्धि की गारंटी होगी। खरगे और राहुल गांधी के साथ थरूर के तालमेल ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नई जान फूंक दी है। अब देखना यह होगा कि थरूर का यह ‘विकास का रोडमैप’ केरल के मतदाताओं को कितना प्रभावित कर पाता है और क्या यूडीएफ सत्ता के सिंहासन तक पहुँचने में सफल रहती है। आने वाले महीनों में केरल की राजनीति और भी दिलचस्प मोड़ लेने वाली है, जिसमें थरूर एक प्रमुख रणनीतिकार की भूमिका में नजर आएंगे।

Digiqole Ad

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *