काशी में सियासी तपिश: मणिकर्णिका घाट पर विवाद के बीच सीएम योगी का वाराणसी दौरा; कांग्रेस पर साधा निशाना, पर घाट निरीक्षण से बनाई दूरी
वाराणसी: धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में शनिवार को उस समय राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई, जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक दिवसीय दौरे पर वाराणसी पहुंचे। महाश्मशान मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास और वहां स्थित ऐतिहासिक धरोहरों के साथ कथित छेड़छाड़ को लेकर छिड़े राष्ट्रव्यापी विवाद के बीच सीएम का यह दौरा अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा था। हालांकि, दिन भर चली भारी प्रशासनिक तैयारियों और कयासों के विपरीत मुख्यमंत्री मणिकर्णिका घाट नहीं गए। सर्किट हाउस में मीडिया से रूबरू होते हुए उन्होंने विकास कार्यों में बाधा डालने के लिए कांग्रेस पर तीखा प्रहार किया और इसे ‘विरासत का अपमान’ करने वाली राजनीति करार दिया।
मणिकर्णिका घाट पर भारी तैयारी, पर नहीं पहुंचे मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर वाराणसी जिला प्रशासन शनिवार सुबह से ही ‘अलर्ट मोड’ पर था। विशेष रूप से मणिकर्णिका घाट और उससे जुड़े रास्तों पर सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए थे। सतुआ बाबा आश्रम से लेकर मणिकर्णिका घाट की सीढ़ियों तक रेड कार्पेट बिछाया गया था, जो इस बात का स्पष्ट संकेत था कि मुख्यमंत्री विकास कार्यों का स्थलीय निरीक्षण करने वाले हैं। सुबह से ही गोदौलिया, मैदागिन और चौक क्षेत्र में यातायात प्रतिबंध लागू कर दिए गए थे।
पुलिस और पीएसी के जवानों ने पूरे घाट क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया था। नगर निगम और विकास प्राधिकरण के अधिकारी भी मौके पर मुस्तैद थे। लेकिन दोपहर बाद अचानक कार्यक्रम में बदलाव की सूचना मिली। बाबा काल भैरव और श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन करने के बाद मुख्यमंत्री का काफिला सीधे सर्किट हाउस के लिए रवाना हो गया। मुख्यमंत्री के घाट न पहुंचने को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। जानकारों का मानना है कि वर्तमान विवाद और स्थानीय विरोध की संवेदनशीलता को देखते हुए फिलहाल मुख्यमंत्री ने वहां जाने से परहेज किया।
कांग्रेस पर बरसे सीएम योगी: ‘विरासत और आस्था का अपमान करना पुरानी आदत’
सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मणिकर्णिका घाट विवाद को लेकर कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का इतिहास हमेशा से भारत की सनातन आस्था को अपमानित करने का रहा है। सीएम ने आरोप लगाया कि जब भी देश में सांस्कृतिक पुनरुत्थान और विकास के कार्य होते हैं, कांग्रेस और उसके सहयोगी संगठन अड़ंगे लगाने का काम शुरू कर देते हैं।
योगी आदित्यनाथ ने कहा, “विश्व में सबसे न्यारी काशी आज विकास के पथ पर अग्रसर है। माता अहिल्याबाई होल्कर ने जिस काशी को संवारा था, आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उसी विरासत को और भव्य रूप दिया जा रहा है। लेकिन कांग्रेस भ्रामक मुद्दे उठाकर सनातनी जनता को दिग्भ्रमित कर रही है।” उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने शासनकाल में कभी विरासत का सम्मान नहीं किया और न ही कभी मंदिर क्षेत्रों के विकास के लिए कोई ठोस कदम उठाए। आज जब काशी विश्वनाथ धाम और मणिकर्णिका घाट का कायाकल्प हो रहा है, तो उन्हें इसमें दोष नजर आ रहे हैं।
‘कॉरिडोर का विरोध करने वाले भी ले रहे हैं बाबा का आशीर्वाद’
मुख्यमंत्री ने मणिकर्णिका घाट विवाद की तुलना काशी विश्वनाथ कॉरिडोर (धाम) के निर्माण के समय हुए विरोध से की। उन्होंने याद दिलाया कि जब विश्वनाथ धाम का काम शुरू हुआ था, तब भी कुछ लोगों ने ऐसा ही नकारात्मक माहौल बनाया था। उन्होंने दावा किया कि उस वक्त विरोध करने वाले लोग आज सबसे पहले कॉरिडोर की सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं और बाबा विश्वनाथ का सुगम दर्शन कर रहे हैं।
सीएम ने कहा कि मंदिर क्षेत्रों के विकास से न केवल श्रद्धालुओं को सुविधा मिली है, बल्कि इससे स्थानीय पर्यटन और रोजगार को भी जबरदस्त बढ़ावा मिला है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बदलाव को आज पूरा देश और दुनिया देख रही है, लेकिन राजनीतिक चश्मे से देखने वाली कांग्रेस को यह विकास दिखाई नहीं दे रहा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि विकास की यह प्रक्रिया रुकने वाली नहीं है और काशी को उसके प्राचीन गौरव के साथ आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा।
क्या है मणिकर्णिका घाट विवाद, जिसने बढ़ाई राजनीतिक गर्मी?
वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर मणिकर्णिका कायाकल्प परियोजना के तहत बड़े पैमाने पर निर्माण और सौंदर्यीकरण का कार्य चल रहा है। विवाद की शुरुआत पिछले कुछ दिनों में सोशल मीडिया पर वायरल हुए उन वीडियो से हुई, जिनमें ऐतिहासिक धरोहरों, विशेष रूप से माता अहिल्याबाई द्वारा निर्मित मढ़ी और कुछ प्राचीन मूर्तियों के साथ कथित तौर पर तोड़फोड़ होते हुए दिखाया गया था।
कांग्रेस और कई स्थानीय सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर काशी की प्राचीन पहचान और अहिल्याबाई की विरासत को नष्ट किया जा रहा है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर वाराणसी से लेकर दिल्ली तक विरोध प्रदर्शन किया है। हालांकि, प्रशासन का दावा है कि किसी भी प्राचीन ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचाया जा रहा है, बल्कि जीर्ण-शीर्ण हो चुके हिस्सों का संरक्षण किया जा रहा है। इसी तनावपूर्ण पृष्ठभूमि के कारण सीएम योगी का दौरा और मणिकर्णिका घाट से उनकी दूरी चर्चा का विषय बनी हुई है।
दर्शन-पूजन के बाद विकास कार्यों की समीक्षा
मणिकर्णिका घाट न जाने के बावजूद मुख्यमंत्री ने काशी की धार्मिक मर्यादा का पालन किया। वाराणसी पहुँचते ही उन्होंने सबसे पहले काशी के कोतवाल बाबा काल भैरव के दरबार में हाजिरी लगाई। इसके बाद उन्होंने श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में षोडशोपचार विधि से पूजन कर लोक कल्याण की कामना की।
मंदिरों में दर्शन के बाद मुख्यमंत्री ने सर्किट हाउस में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक में उन्होंने वाराणसी में चल रही मेगा परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि विकास कार्य समय सीमा के भीतर पूरे होने चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाए कि निर्माण कार्य के दौरान प्राचीन धरोहरों और आम जनता की आस्था को किसी भी प्रकार की ठेस न पहुंचे। उन्होंने मणिकर्णिका घाट और ललिता घाट पर चल रहे कार्यों की रिपोर्ट भी तलब की।
विपक्ष का पलटवार और भविष्य की रणनीति
मुख्यमंत्री के बयान के बाद विपक्षी खेमे में भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। स्थानीय कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री मणिकर्णिका घाट इसलिए नहीं गए क्योंकि उनके पास जनता के सवालों का कोई जवाब नहीं था। विपक्ष का आरोप है कि रेड कार्पेट बिछाने से सत्य नहीं छिप सकता और जो तोड़फोड़ हुई है, वह काशी की जनता देख रही है।
फिलहाल, वाराणसी में सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी गई है। मुख्यमंत्री का यह दौरा संदेश देने की एक कोशिश थी कि सरकार विकास के मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगी, लेकिन मणिकर्णिका घाट से उनकी दूरी यह भी बताती है कि सरकार विवाद को और अधिक हवा नहीं देना चाहती। आने वाले दिनों में यह विवाद शांत होता है या नया मोड़ लेता है, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।