स्टालिन का भाजपा पर बड़ा प्रहार: ‘भ्रष्टाचार के दोषियों को अपनी वॉशिंग मशीन में धो दिया, क्या अब एआईएडीएमके साफ हो गई?’
चेन्नई: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए एक बड़ा हमला बोला है। शुक्रवार को चेन्नई में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्टालिन ने भाजपा और एआईएडीएमके (AIADMK) के गठबंधन पर सवाल उठाए और ‘वॉशिंग मशीन’ वाले कटाक्ष के जरिए भाजपा की शुचिता की राजनीति को घेरा। मुख्यमंत्री ने न केवल भ्रष्टाचार के आरोपों पर जवाब दिया, बल्कि वंशवाद और हिंदुत्व जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी अपनी सरकार का पक्ष मजबूती से रखा।
मुख्यमंत्री स्टालिन ने अपने संबोधन की शुरुआत भाजपा के बहुचर्चित ‘वॉशिंग मशीन’ वाले उपमा से की। उन्होंने सीधे तौर पर पूछा कि क्या भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों में संलिप्त और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दोषी ठहराई गई एआईएडीएमके को भाजपा ने अपने गठबंधन की ‘वॉशिंग मशीन’ में डालकर साफ कर दिया है? स्टालिन ने याद दिलाया कि जब भाजपा और एआईएडीएमके साथ नहीं थे, तब खुद भाजपा के नेताओं ने तत्कालीन एआईएडीएमके सरकार पर भ्रष्टाचार के अनगिनत आरोप लगाए थे। उन्होंने सवाल किया कि अब ऐसा क्या बदल गया है कि वे सभी दाग अचानक धुल गए? स्टालिन का यह हमला विपक्ष के उस नैरेटिव को जवाब था जिसमें डीएमके पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जा रहे हैं।
भ्रष्टाचार के आरोपों पर कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री ने चुनौती दी कि उनके या उनकी सरकार के खिलाफ लगाए गए एक भी आरोप को अब तक साबित नहीं किया जा सका है। उन्होंने कहा कि भाजपा के पास बोलने के लिए कुछ नहीं है, इसलिए वे उन लोगों के साथ हाथ मिला रहे हैं जो असल में भ्रष्टाचार में लिप्त रहे हैं। स्टालिन ने कहा कि जनता सब देख रही है कि कैसे सत्ता की खातिर नैतिकताओं को ताक पर रखकर उन दलों के साथ गठबंधन किया जा रहा है जिन्हें देश की सबसे बड़ी अदालत ने अपराधी माना है।
वंशवाद की राजनीति के आरोपों पर भी स्टालिन ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने इसे भाजपा की ‘घिसी-पिटी कहानी’ करार देते हुए कहा कि राजनीति में किसी भी व्यक्ति को आने की पूरी आजादी है, चाहे वह किसी भी परिवार से हो। लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल किसी परिवार में जन्म लेने से राजनीति में सफलता नहीं मिल जाती। स्टालिन के अनुसार, अंतिम फैसला जनता की अदालत में होता है। किसी को भी नेता बनने के लिए जनता के बीच जाना पड़ता है, उनका विश्वास जीतना पड़ता है और कड़ी मेहनत के बाद वोट हासिल करने होते हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग जमीनी स्तर पर डीएमके का सामना करने की हिम्मत नहीं रखते, वे ही इस तरह के निराधार आरोप लगाते हैं।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया और विशेष रूप से ‘व्हाट्सएप विश्वविद्यालय’ के जरिए फैलाए जा रहे झूठ के प्रति भी लोगों को आगाह किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग तमिलनाडु के विकास को पचा नहीं पा रहे हैं, वे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का सहारा लेकर डीएमके सरकार की छवि बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उनके मुताबिक, डीएमके सरकार के पिछले 1,730 दिनों का कार्यकाल विकास और सामाजिक न्याय का प्रतीक रहा है, जिसे झूठ के सहारे दबाया नहीं जा सकता।
भाषण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा धर्म और हिंदुत्व पर केंद्रित रहा। विपक्षी दलों, विशेषकर भाजपा द्वारा डीएमके को ‘हिंदू विरोधी’ बताए जाने के दावों को स्टालिन ने आंकड़ों के जरिए खारिज कर दिया। उन्होंने गर्व के साथ घोषणा की कि पिछले 1,730 दिनों के शासन में उनकी सरकार ने 4,000 से अधिक मंदिरों का अभिषेक और कुंभाभिषेकम कराया है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि इतने बड़े पैमाने पर मंदिरों का जीर्णोद्धार और धार्मिक कार्यों का संपादन देश के किसी भी भाजपा शासित राज्य में नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि डीएमके सरकार सभी धर्मों का सम्मान करती है और ‘सच्चे भक्त’ सरकार के इन कार्यों से अत्यंत प्रसन्न हैं।
अंततः, एम.के. स्टालिन ने यह स्पष्ट कर दिया कि तमिलनाडु की राजनीति में वे किसी भी बाहरी दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं। ‘द्रविड़ मॉडल’ के शासन को उन्होंने अपनी सबसे बड़ी ताकत बताया। स्टालिन का यह आक्रामक अंदाज आगामी चुनावों और राज्य में भाजपा के बढ़ते कदमों को रोकने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। उन्होंने जनता से अपील की कि वे दुष्प्रचार के झांसे में न आएं और केवल ठोस कार्यों के आधार पर ही सरकार का मूल्यांकन करें।