• January 31, 2026

सीआईएसएफ में ‘एनपीएस’ घोटाले का पर्दाफाश: एएसआई ने सहकर्मियों की पेंशन राशि से रचाई शादी और चुकाए कर्ज, ईडी ने कसा शिकंजा

हैदराबाद: देश की औद्योगिक सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के भीतर से एक चौंकाने वाला धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। राष्ट्रीय औद्योगिक सुरक्षा अकादमी (एनआईएसए), हैदराबाद में तैनात एक पूर्व सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) ने अपने ही सहकर्मियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हुए उनके राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) के करोड़ों रुपये के अंशदान का गबन कर दिया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी रूप सिंह मीणा के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत आरोप पत्र दाखिल किया है, जिस पर हैदराबाद की रंगारेड्डी अदालत ने 28 जनवरी 2026 को संज्ञान लिया है।

यह पूरा मामला विश्वासघात और तकनीकी हेराफेरी की एक जटिल कहानी है। आरोपी रूप सिंह मीणा, जो उस समय एनआईएसए हैदराबाद के एनपीएस अनुभाग में हेड कांस्टेबल/क्लर्क के रूप में तैनात था, के पास संस्थान के सभी ग्राहकों के एनपीएस खातों तक पहुंच के लिए लॉगिन क्रेडेंशियल (यूजर आईडी और पासवर्ड) उपलब्ध थे। इसी अधिकार का दुरुपयोग करते हुए उसने एक बड़ी साजिश रची। मीणा ने न केवल वर्तमान में सेवा दे रहे जवानों के खातों के साथ छेड़छाड़ की, बल्कि उन कर्मियों के खातों को भी निशाना बनाया जो बल से इस्तीफा दे चुके थे।

जांच में यह खुलासा हुआ कि रूप सिंह मीणा ने बेहद शातिराना तरीके से इन कर्मियों के स्थायी सेवानिवृत्ति खाता संख्या (PRAN) से जुड़े बैंक विवरणों में बदलाव किया। उसने सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर कर इन खातों में जमा धन की ‘समय पूर्व निकासी’ (Premature Withdrawal) के अनुरोध डाले। जैसे ही निकासी की राशि स्वीकृत होकर बैंक खातों में आई, मीणा ने बिना किसी कानूनी अधिकार के 60,26,321 रुपये की भारी-भरकम राशि का गबन कर लिया।

इस घोटाले की परतें तब खुलनी शुरू हुईं जब तेलंगाना पुलिस ने 18 अप्रैल 2023 को आईपीसी की धारा 409 (लोक सेवक द्वारा विश्वासघात) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत प्राथमिकी दर्ज की। मामले की गंभीरता को देखते हुए जून 2025 में इसकी जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी), हैदराबाद को सौंप दी गई थी। चूंकि इसमें वित्तीय धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग का पुख्ता आधार था, इसलिए ईडी ने भी पीएमएलए के तहत अपनी जांच शुरू की।

ईडी की जांच में धन के उपयोग को लेकर जो तथ्य सामने आए हैं, वे हैरान करने वाले हैं। आरोपी रूप सिंह मीणा ने गबन की गई राशि का उपयोग अपनी विलासिता और व्यक्तिगत जरूरतों को पूरा करने के लिए किया। जांच एजेंसी के अनुसार, अपराध की इस कमाई (Proceeds of Crime) का एक बड़ा हिस्सा मीणा ने अपनी शादी के भव्य आयोजन, पुराने व्यक्तिगत कर्ज चुकाने और परिवार के चिकित्सा उपचार पर खर्च कर दिया। इतना ही नहीं, उसने सरकारी कर्मचारियों के खून-पसीने की कमाई को अपने निजी डेयरी व्यवसाय में भी निवेश कर दिया।

पैसे के लेन-देन को छिपाने के लिए मीणा ने ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ के पारंपरिक तरीकों का सहारा लिया। उसने अपने परिवार के सदस्यों, करीबी दोस्तों और कुछ ऐसे अनजान व्यक्तियों के बैंक खातों का उपयोग किया जिन्हें इस पूरी साजिश की भनक तक नहीं थी। आरोपी पहले गबन की गई राशि को इन विभिन्न खातों में स्थानांतरित करता था और फिर वहां से नकदी के रूप में निकाल लेता था या सीधे अपने खातों में जमा कर लेता था। इस तरह उसने अवैध धन को वैध बनाने का प्रयास किया।

प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में पहले ही कड़ी कार्रवाई करते हुए मार्च 2025 में एक अनंतिम कुर्की आदेश जारी किया था। इसके तहत रूप सिंह मीणा की लगभग 80,626 रुपये की चल और अचल संपत्तियों की पहचान कर उन्हें कुर्क किया गया था। हालांकि गबन की गई कुल राशि की तुलना में यह जब्ती छोटी है, लेकिन अदालत द्वारा आरोप पत्र का संज्ञान लिए जाने के बाद अब आरोपी की अन्य संपत्तियों और इस घोटाले में शामिल संभावित अन्य कड़ियों पर भी कानूनी फंदा कसना तय माना जा रहा है।

यह घटना सुरक्षा बलों के भीतर प्रशासनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों की जवाबदेही और डिजिटल सुरक्षा प्रणालियों की मजबूती पर बड़े सवालिया निशान खड़े करती है। जिन जवानों का पैसा रिटायरमेंट के बाद उनके बुढ़ापे का सहारा बनना था, उसे एक क्लर्क ने अपनी शादी और व्यापार में उड़ा दिया। फिलहाल, रंगारेड्डी न्यायालय में इस मामले की सुनवाई शुरू हो चुकी है, और ईडी का दावा है कि उनके पास रूप सिंह मीणा के खिलाफ पर्याप्त डिजिटल और दस्तावेजी सबूत मौजूद हैं जो उसे कड़ी सजा दिलाने के लिए काफी हैं।

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