संजय भंडारी मनी लॉन्ड्रिंग केस: रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ चार्जशीट पर बहस के लिए ईडी को मिला समय, कोर्ट ने दस्तावेजों को लेकर लगाई फटकार
नई दिल्ली: राजधानी की राउज एवेन्यू कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक कथित मामले में बिजनेसमैन रॉबर्ट वाड्रा की मुश्किलें बढ़ाने वाली प्रवर्तन निदेशालय (ED) की सप्लीमेंट्री चार्जशीट पर सुनवाई के लिए जांच एजेंसी को अतिरिक्त समय दे दिया है। यह मामला भगोड़े हथियार डीलर संजय भंडारी से जुड़ा हुआ है। शनिवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने ईडी की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए उसे फटकार भी लगाई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एजेंसी ने उन दस्तावेजों की सूची अब तक दाखिल नहीं की है, जिन पर वह इस मामले में भरोसा नहीं कर रही है। अदालत ने ईडी को कड़ा निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई की तारीख तक सभी आवश्यक दस्तावेज अनिवार्य रूप से फाइल किए जाएं।
क्या है संजय भंडारी और रॉबर्ट वाड्रा का कनेक्शन?
प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में 2023 में अपनी पहली चार्जशीट दाखिल की थी, जिसके बाद अब एक सप्लीमेंट्री (पूरक) चार्जशीट पेश की गई है। ईडी का मुख्य आरोप है कि हथियार डीलर संजय भंडारी ने साल 2009 में लंदन में एक आलीशान मकान खरीदा था। जांच एजेंसी का दावा है कि इस संपत्ति का सौंदर्यीकरण और रिनोवेशन रॉबर्ट वाड्रा के निर्देशों पर किया गया था और इसके लिए भुगतान भी वाड्रा द्वारा ही किया गया था। ईडी इस कड़ी को मनी लॉन्ड्रिंग के सबूत के तौर पर देख रही है।
संजय भंडारी एक कुख्यात हथियार डीलर है, जो साल 2016 में दिल्ली में आयकर विभाग की छापेमारी के बाद भारत छोड़कर लंदन भाग गया था। हालांकि भारत सरकार लंबे समय से उसके प्रत्यर्पण की कोशिश कर रही है, लेकिन हाल ही में ब्रिटेन की एक अदालत ने भारत की उस अर्जी को खारिज कर दिया है जिसमें भंडारी को भारत वापस लाने के मामले को ब्रिटेन की सुप्रीम कोर्ट में ले जाने की अनुमति मांगी गई थी। इस कानूनी झटके के बाद भंडारी को भारत लाना अब लगभग नामुमकिन नजर आ रहा है, जिसके चलते इस केस में साक्ष्यों की कड़ियां जोड़ना ईडी के लिए एक बड़ी चुनौती है।
रॉबर्ट वाड्रा का पलटवार: ‘मुद्दों से ध्यान भटकाने की साजिश’
अदालती कार्यवाही और ईडी की चार्जशीट पर प्रतिक्रिया देते हुए रॉबर्ट वाड्रा ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि लंदन में उनकी कोई भी संपत्ति नहीं है। वाड्रा ने आरोप लगाया कि जब भी देश में संसद सत्र शुरू होने वाला होता है और विपक्ष सरकार से जनता के हितों से जुड़े मुश्किल सवाल पूछने की तैयारी करता है, तब सरकार इन मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए जांच एजेंसियों को हथियार की तरह इस्तेमाल करती है।
वाड्रा ने कहा कि इस मामले की ‘टाइमिंग’ ही सब कुछ बयां कर देती है। उनके मुताबिक, उन्हें केवल राजनीतिक द्वेष और प्रतिशोध के चलते परेशान किया जा रहा है ताकि सरकार अपनी विफलताओं को छिपा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे कानून का सम्मान करते हैं और अदालती प्रक्रिया में सहयोग कर रहे हैं, लेकिन उन्हें निशाना बनाना एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी और भविष्य की राह
राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने ईडी द्वारा दस्तावेजों की अधूरी सूची पेश करने पर गंभीर रुख अपनाया। कोर्ट ने कहा कि विश्वसनीय और गैर-विश्वसनीय दस्तावेजों की स्पष्ट सूची न होना प्रक्रिया में देरी का कारण बनता है। अब ईडी को अगली सुनवाई पर अपनी दलीलों के साथ-साथ उन सभी सबूतों का ब्योरा देना होगा जिन पर वह रॉबर्ट वाड्रा को इस मामले में घसीटने का प्रयास कर रही है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि संजय भंडारी के प्रत्यर्पण की उम्मीदें धूमिल होने के बाद ईडी के लिए वाड्रा के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों को साबित करना तकनीकी रूप से कठिन हो सकता है, क्योंकि मुख्य आरोपी तक एजेंसी की पहुंच नहीं है। फिलहाल, सभी की निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि सप्लीमेंट्री चार्जशीट में दिए गए दावों में कितनी सच्चाई है।