• January 31, 2026

विजय थलापति की ‘जन नायकन’ पर गहराया संकट: सेंसर विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, क्या समय पर रिलीज हो पाएगी अभिनेता की आखिरी फिल्म?

चेन्नई/नई दिल्ली: दक्षिण भारतीय सिनेमा के सुपरस्टार विजय थलापति की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘जन नायकन’ (Jana Nayagan) इन दिनों सिल्वर स्क्रीन के बजाय कानूनी गलियारों में अधिक चर्चा का विषय बनी हुई है। फिल्म की रिलीज को लेकर जारी सेंसर विवाद अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां फिल्म के निर्माता केवीएन (KVN) प्रोडक्शंस एक बार फिर देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहे हैं। मद्रास हाईकोर्ट की खंडपीठ से हाल ही में लगे झटके के बाद निर्माताओं के पास अब दिल्ली की गुहार ही आखिरी उम्मीद बची है।

यह फिल्म न केवल विजय थलापति के प्रशंसकों के लिए खास है, बल्कि खुद अभिनेता के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि सक्रिय राजनीति में कदम रखने के बाद इसे उनके फिल्मी करियर की आखिरी फिल्म माना जा रहा है। मूल योजना के अनुसार, ‘जन नायकन’ को 9 जनवरी 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक देनी थी, लेकिन सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के साथ जारी खींचतान ने इसके भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सेंसर बोर्ड ने फिल्म के कुछ दृश्यों और संवादों पर आपत्ति जताते हुए इसे प्रमाण पत्र देने में देरी की, जिसके बाद मामला अदालतों के चक्कर लगाने लगा।

विवाद का ताजा घटनाक्रम मद्रास हाईकोर्ट से जुड़ा है। बीते 27 जनवरी को मद्रास हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश के उस पुराने आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सेंसर बोर्ड को फिल्म को तत्काल ‘U/A’ सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दिया गया था। खंडपीठ के इस फैसले ने फिल्म निर्माताओं की उन उम्मीदों पर पानी फेर दिया जिसमें वे जल्द रिलीज की उम्मीद लगाए बैठे थे। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि हाईकोर्ट के इस हालिया रुख के बाद अब निर्माताओं के पास सुप्रीम कोर्ट जाने के अलावा कोई विकल्प शेष नहीं रह गया है।

न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, सेंसर बोर्ड भी इस कानूनी लड़ाई में पूरी तरह मुस्तैद है। सीबीएसई ने सुप्रीम कोर्ट में एक ‘कैविएट’ (Caveat) याचिका दायर की है। इस याचिका का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि फिल्म निर्माता सुप्रीम कोर्ट पहुंचते हैं, तो अदालत सेंसर बोर्ड का पक्ष सुने बिना कोई भी एकतरफा आदेश पारित न करे। यह कदम दर्शाता है कि फिल्म की सामग्री को लेकर बोर्ड और निर्माताओं के बीच गहरे मतभेद हैं।

इससे पहले भी निर्माताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, लेकिन 15 जनवरी को शीर्ष अदालत ने हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए उन्हें वापस मद्रास हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के पास जाने की सलाह दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने तब हाईकोर्ट को निर्देश दिया था कि वह इस संवेदनशील मामले पर 20 जनवरी तक फैसला सुनाए। हालांकि, कानूनी प्रक्रियाओं और दलीलों के दौर के कारण फैसला 27 जनवरी को आया, जो निर्माताओं के पक्ष में नहीं रहा।

‘जन नायकन’ को लेकर चल रहे इस विवाद के पीछे फिल्म की कथित राजनीतिक पृष्ठभूमि को मुख्य कारण माना जा रहा है। चूंकि विजय थलापति ने अपनी राजनीतिक पार्टी के जरिए सक्रिय राजनीति में प्रवेश कर लिया है, ऐसे में फिल्म के संवादों और विषय वस्तु को लेकर सेंसर बोर्ड अत्यंत सतर्कता बरत रहा है। प्रशंसकों में इस देरी को लेकर भारी निराशा है, क्योंकि वे अपने प्रिय ‘थलापति’ को आखिरी बार बड़े पर्दे पर देखने के लिए बेताब हैं।

फिलहाल, फिल्म की रिलीज डेट को लेकर सस्पेंस बरकरार है। यदि सुप्रीम कोर्ट निर्माताओं की याचिका को स्वीकार कर लेता है और सेंसर बोर्ड को स्पष्ट निर्देश देता है, तभी फिल्म की नई रिलीज डेट सामने आ पाएगी। अन्यथा, कानूनी पेचदगियों में फंसी यह फिल्म विजय थलापति के राजनीतिक सफर की शुरुआत के बीच लंबे समय तक डिब्बाबंद रह सकती है। आने वाले कुछ दिन ‘जन नायकन’ की किस्मत का फैसला करने के लिए निर्णायक साबित होंगे।

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