• January 31, 2026

महमूद गजनवी को ‘भारतीय’ बताने पर सियासी घमासान: भाजपा का हामिद अंसारी पर तीखा हमला, ‘बीमार मानसिकता’ का लगाया आरोप

नई दिल्ली: पूर्व उपराष्ट्रपति एम. हामिद अंसारी के एक हालिया साक्षात्कार ने देश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। इतिहास की व्याख्या और विदेशी आक्रमणकारियों की पहचान को लेकर दिए गए उनके एक बयान पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को कड़ा ऐतराज जताते हुए उन पर तीखा हमला बोला। भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उससे जुड़ा ‘पारिस्थितिकीतंत्र’ (इकोसिस्टम) लगातार विदेशी आक्रांताओं को महिमामंडित करने और हिंदुओं पर अत्याचार करने वालों का बचाव करने की कोशिश कर रहा है।

विवाद की जड़ पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का वह साक्षात्कार है, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर महमूद गजनवी जैसे आक्रांताओं को ‘विदेशी’ मानने से इनकार कर दिया। साक्षात्कारों के दौरान अंसारी को यह कहते हुए सुना गया कि जिन्हें हमारी इतिहास की किताबों में विदेशी आक्रमणकारी और लुटेरा बताया गया है, वे वास्तव में ‘भारतीय लुटेरे’ थे। उन्होंने लोदी और गजनवी का उदाहरण देते हुए तर्क दिया कि राजनीतिक रूप से यह कहना सुविधाजनक हो सकता है कि उन्होंने मंदिरों को नष्ट किया या बाहर से आए, लेकिन असल में वे भारतीय ही थे। अंसारी के इस बयान ने उन ऐतिहासिक तथ्यों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनमें गजनवी को मध्य एशिया (वर्तमान अफगानिस्तान) से आया एक हमलावर माना जाता है।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे अंसारी की ‘बीमार मानसिकता’ का परिचायक बताया। त्रिवेदी ने कहा कि विदेशी आक्रमणकारियों और लुटेरों के प्रति इस तरह का लगाव दिखाना न केवल इतिहास के साथ छेड़छाड़ है, बल्कि उन करोड़ों लोगों की आस्था का अपमान है जिनके धार्मिक स्थलों को इन आक्रांताओं ने तहस-नहस किया था। भाजपा ने आरोप लगाया कि इस तरह के बयानों के जरिए विदेशी हमलावरों को भारतीय पहचान देने की कोशिश की जा रही है, ताकि उनके द्वारा किए गए अत्याचारों की गंभीरता को कम किया जा सके।

वहीं, भाजपा के एक अन्य प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने अंसारी की टिप्पणियों का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा करते हुए इस मुद्दे को और हवा दी। पूनावाला ने पूर्व उपराष्ट्रपति पर सीधा आरोप लगाया कि वे उस महमूद गजनवी का महिमामंडन कर रहे हैं, जिसने भारत के गौरव और आस्था के प्रतीक सोमनाथ मंदिर को बेरहमी से लूटा और खंडित किया था। पूनावाला ने सवाल उठाया कि जो व्यक्ति देश के दूसरे सबसे बड़े संवैधानिक पद पर आसीन रहा हो, वह इतिहास की ऐसी व्याख्या कैसे कर सकता है जो सर्वमान्य तथ्यों के पूर्णतः विपरीत हो।

भाजपा का तर्क है कि गजनवी, गोरी और लोदी जैसे शासक स्पष्ट रूप से विदेशी धरती से आए थे और उनका उद्देश्य भारत की संपत्ति लूटना और अपने साम्राज्य का विस्तार करना था। पार्टी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सब एक सोची-समझने रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत भारत के वास्तविक इतिहास को धुंधला करने और आक्रमणकारियों को ‘रक्षक’ या ‘स्थानीय’ बताने की कोशिश की जाती रही है। भाजपा प्रवक्ताओं ने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति का बयान नहीं है, बल्कि उस विचारधारा का प्रतिबिंब है जो भारत की सांस्कृतिक विरासत को चोट पहुंचाने वालों के प्रति सहानुभूति रखती है।

इतिहासकारों के एक बड़े वर्ग का भी यही मानना है कि महमूद गजनवी ने गजनी (अफगानिस्तान) से भारत पर 17 बार आक्रमण किए थे। ऐसे में उसे ‘भारतीय लुटेरा’ कहना ऐतिहासिक साक्ष्यों को झुठलाने जैसा है। भाजपा ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय अस्मिता से जोड़ते हुए कहा कि देश अब इस तरह के छद्म इतिहास को स्वीकार नहीं करेगा। फिलहाल, हामिद अंसारी के इस बयान ने सोशल मीडिया से लेकर टीवी डिबेट्स तक एक नई बहस छेड़ दी है, जहां एक पक्ष इसे इतिहास को देखने का अलग नजरिया बता रहा है, तो वहीं दूसरा पक्ष इसे राष्ट्र विरोधी और तथ्यों के साथ खिलवाड़ करार दे रहा है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी चुनावों से पहले इतिहास और पहचान से जुड़े ये मुद्दे ध्रुवीकरण को और तेज कर सकते हैं। भाजपा इस मुद्दे को कांग्रेस के खिलाफ एक बड़े हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है, यह दिखाने के लिए कि विपक्षी खेमे के विचार भारतीय संस्कृति और इतिहास के प्रति कितने असंवेदनशील हैं।

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