• January 19, 2026

मनरेगा बनाम VB-G RAM G: ग्रामीण रोजगार पर आर-पार, शिवराज सिंह चौहान का कांग्रेस पर पलटवार

नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित नई ग्रामीण रोजगार योजना ‘विकसित भारत-रोजगार आजीविका मिशन’ (VB-G RAM G) को लेकर देश की सियासत में भूचाल आ गया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच ग्रामीण विकास के इस सबसे बड़े मुद्दे पर तलवारें खिंच गई हैं। एक तरफ जहां केंद्र सरकार इसे मनरेगा का अधिक सशक्त और आधुनिक विकल्प बता रही है, वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे ‘मनरेगा के अंत की शुरुआत’ करार देते हुए मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक प्रेस वार्ता के जरिए कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व, मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी पर सीधा हमला बोला। चौहान ने स्पष्ट किया कि नई योजना न केवल रोजगार की गारंटी को बढ़ाएगी, बल्कि पंचायतों को विकास के नए पंख भी देगी।

ग्रामीण रोजगार का यह मुद्दा अब केवल नीतिगत बदलाव तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि 2026 के राजनीतिक परिदृश्य में एक बड़ा चुनावी हथियार बनता जा रहा है। कांग्रेस ने ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ के जरिए गांव-गांव जाकर मोदी सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है, तो दूसरी तरफ शिवराज सिंह चौहान ने कमान संभालते हुए आंकड़ों और नए प्रावधानों के जरिए विपक्ष के दावों को ‘भ्रामक’ करार दिया है। केंद्र सरकार का दावा है कि ‘काम का अधिकार’ अब कागजों से निकलकर जमीन पर अधिक मजबूती के साथ लागू होगा।

शिवराज का हमला: ‘राहुल और खड़गे फैला रहे हैं भ्रम’

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को आयोजित प्रेस वार्ता में बेहद सख्त लहजा अख्तियार किया। उन्होंने सीधे तौर पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी का नाम लेते हुए कहा कि विपक्षी नेता अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए देश के ग्रामीण गरीबों के बीच झूठ का जाल बुन रहे हैं। चौहान ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नई योजना ‘VB-G RAM G’ के बारे में गलत जानकारी फैलाकर देश को गुमराह कर रही है। उन्होंने कहा, “यह विडंबना है कि जो लोग खुद को गरीबों का हितैषी बताते हैं, वे ही एक ऐसी योजना का विरोध कर रहे हैं जो रोजगार के दिनों को बढ़ाने और भत्ते को सुनिश्चित करने के लिए लाई गई है।”

शिवराज सिंह चौहान ने जोर देकर कहा कि विपक्ष का यह कहना कि सरकार ‘काम का अधिकार’ छीन रही है, पूरी तरह निराधार है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता तथ्यों की जांच किए बिना बयानबाजी कर रहे हैं, जिससे उनकी खुद की पार्टी की विश्वसनीयता कम हो रही है। चौहान के मुताबिक, नई योजना का ढांचा इस तरह तैयार किया गया है कि यह न केवल रोजगार देगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी संपत्तियों (Infrastructure) के निर्माण को भी गति देगी, जो मनरेगा के पिछले दौर में गायब थी।

सभी पंचायतों में लागू होगी योजना: विपक्ष के दावों का खंडन

विपक्ष की ओर से यह तर्क दिया जा रहा था कि नई योजना केवल कुछ चुनिंदा विकसित पंचायतों या पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू की जाएगी, जिससे देश का एक बड़ा हिस्सा रोजगार की गारंटी से वंचित हो जाएगा। इन आशंकाओं को सिरे से खारिज करते हुए केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि ‘विकसित भारत-रोजगार आजीविका मिशन’ देश की हर एक ग्राम पंचायत में लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य समावेशी विकास है और इसमें किसी भी भौगोलिक क्षेत्र को पीछे नहीं छोड़ा जाएगा।

चौहान ने यह भी साफ किया कि राज्यों पर इस नई योजना का कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। अक्सर यह आरोप लगाया जाता है कि केंद्र अपनी योजनाएं राज्यों पर थोप देता है और फंड काट लेता है। इस पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पहले ही ग्रामीण विकास के मद में पर्याप्त धनराशि आवंटित कर रही है। राज्य जो भी निवेश करेंगे, वह उनके अपने गांवों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के काम आएगा, जिससे भविष्य में ग्रामीण अर्थव्यवस्था आत्मनिर्भर बनेगी।

100 नहीं अब 125 दिन का रोजगार: नई योजना के क्रांतिकारी बदलाव

नई योजना ‘VB-G RAM G’ के सबसे महत्वपूर्ण पहलू पर प्रकाश डालते हुए शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की कि सरकार ने रोजगार की गारंटी के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 दिन करने का निर्णय लिया है। यह एक ऐसा कदम है जिसकी मांग ग्रामीण संगठन वर्षों से कर रहे थे। चौहान ने कहा, “हमने केवल नाम नहीं बदला है, बल्कि काम की ताकत भी बढ़ाई है। 125 दिन का रोजगार मिलने से ग्रामीण परिवारों की वार्षिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।”

रोजगार के साथ-साथ बेरोजगारी भत्ते को लेकर भी सरकार ने कड़े नियम बनाए हैं। नई व्यवस्था के तहत, यदि किसी श्रमिक को काम मांगने के 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो उसे अनिवार्य रूप से बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा। इसके लिए जवाबदेही तय की गई है ताकि अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा मजदूरों को न भुगतना पड़े। मंत्री ने इसे ‘जमीन पर मजबूत होता अधिकार’ बताया और कहा कि यह मनरेगा की कमियों को दूर करने की दिशा में एक बड़ा सुधार है।

कांग्रेस का ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’: 45 दिनों का देशव्यापी आंदोलन

दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी ने सरकार के इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। 10 जनवरी से शुरू हुआ कांग्रेस का ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ अब गति पकड़ रहा है। 45 दिनों तक चलने वाले इस देशव्यापी अभियान के माध्यम से कांग्रेस कार्यकर्ता गांवों में जाकर लोगों को यह बता रहे हैं कि नई योजना दरअसल बजट में कटौती करने और मनरेगा को कमजोर करने की एक चाल है। राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट्स में कई बार संकेत दिया है कि ‘VB-G RAM G’ के नाम पर सरकार रोजगार गारंटी कानून की कानूनी बाध्यता को खत्म करना चाहती है।

कांग्रेस का तर्क है कि मनरेगा ने कोरोना काल जैसी आपदाओं में देश की ग्रामीण आबादी को भुखमरी से बचाया था, और इसमें किसी भी तरह का बदलाव गरीबों की सुरक्षा कवच को छीनने जैसा होगा। मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया है कि सरकार डिजिटल हाजिरी और अन्य तकनीकी बाधाएं खड़ी करके मजदूरों को काम से दूर कर रही है, ताकि बजट कम खर्च करना पड़े। इसी विरोध को स्वर देने के लिए कांग्रेस ने इस 45-दिवसीय आंदोलन की रूपरेखा तैयार की है, जो आने वाले बजट सत्र तक जारी रहने की उम्मीद है।

छह महीने का ट्रांजिशन पीरियड: बजट और भविष्य का रोडमैप

योजना के कार्यान्वयन को लेकर फैले भ्रम पर विराम लगाते हुए शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि ‘VB-G RAM G’ को पूरी तरह जमीन पर उतारने में करीब छह महीने का समय लगेगा। उन्होंने यह स्पष्ट आश्वासन दिया कि जब तक नई योजना पूरी तरह लागू नहीं हो जाती, तब तक मनरेगा के तहत काम जारी रहेगा। किसी भी श्रमिक का काम बंद नहीं होगा और न ही उनके भुगतान में कोई देरी होगी।

बजट की तुलना करते हुए मंत्री ने आंकड़े पेश किए और कहा कि यूपीए के 10 वर्षों के शासनकाल में मनरेगा पर लगभग 2 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए थे, जबकि पिछले कुछ वर्षों में मौजूदा सरकार ने इस पर 9 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि सरकार ग्रामीण रोजगार को लेकर गंभीर है। उन्होंने कहा कि नई योजना ग्रामीण विकास का एक ‘विजन डॉक्यूमेंट’ है, जो रोजगार के साथ-साथ गांवों में कौशल विकास और डिजिटल साक्षरता को भी जोड़ेगा।

ग्रामीण भारत के भविष्य को तय करने वाली इन दोनों योजनाओं के बीच की यह लड़ाई अब राजनीतिक विमर्श का केंद्र बन चुकी है। जहां सरकार इसे ‘विकास का मिशन’ बता रही है, वहीं विपक्ष इसे ‘गरीबों का शोषण’ करार दे रहा है।

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