बीएमसी चुनाव परिणामों पर वर्षा गायकवाड़ का बड़ा हमला: लोकतंत्र पर प्रहार और चुनावी धांधली का आरोप, कांग्रेस ने हार के बाद भी जारी रखा संघर्ष
मुंबई: बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनाव के नतीजे आने के बाद मुंबई की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस की मुंबई इकाई की अध्यक्ष और सांसद वर्षा गायकवाड़ ने सोमवार को सत्ताधारी गठबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इन चुनावों के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचला गया है। गायकवाड़ ने दावा किया कि इस बार बीएमसी चुनाव केवल वोट और विचारधारा की लड़ाई नहीं थे, बल्कि इसमें उम्मीदवारों को डराने, उन पर नाम वापसी के लिए दबाव बनाने और धनबल का खुला प्रयोग करने जैसे अनैतिक हथकंडे अपनाए गए। उनके मुताबिक, मतगणना के दौरान भी कई तरह की विसंगतियां देखी गईं, जिसने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
मुंबई कांग्रेस मुख्यालय में नवनिर्वाचित पार्षदों और पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए वर्षा गायकवाड़ का दर्द और गुस्सा साफ झलक रहा था। उन्होंने कहा कि बीएमसी की सत्ता हासिल करने के लिए जिस तरह की मशीनरी का दुरुपयोग किया गया, वह मुंबई के राजनीतिक इतिहास में काला अध्याय है। हालांकि, कांग्रेस इस हार से टूटी नहीं है, बल्कि वह अब नगर निकाय के भीतर एक सजग प्रहरी की भूमिका निभाने के लिए कमर कस चुकी है। गायकवाड़ ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस के चुने हुए प्रतिनिधि बीएमसी सदन में मुंबई के आम नागरिकों की आवाज को दबने नहीं देंगे।
‘सत्ता और धनबल का नंगा नाच’: उम्मीदवारों पर दबाव के आरोप
वर्षा गायकवाड़ ने पत्रकारों से बातचीत में चुनावी प्रक्रिया के दौरान हुई कथित गड़बड़ियों का सिलसिलेवार ब्यौरा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव शुरू होने से लेकर परिणाम आने तक विपक्ष के उम्मीदवारों को निशाना बनाया गया। गायकवाड़ ने दावा किया कि कई सीटों पर कांग्रेस और उसके गठबंधन के उम्मीदवारों को अपना नामांकन वापस लेने के लिए धमकियां दी गईं और उन्हें प्रलोभन दिए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या एक स्वस्थ लोकतंत्र में चुनाव इस तरह जीते जाने चाहिए?
गायकवाड़ ने आगे कहा कि मुंबई के कई संवेदनशील और महत्वपूर्ण इलाकों में मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए पानी की तरह पैसा बहाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग और स्थानीय प्रशासन ने इन शिकायतों पर वह तत्परता नहीं दिखाई जो आवश्यक थी। सबसे गंभीर आरोप उन्होंने मतगणना (Counting) को लेकर लगाया। गायकवाड़ के अनुसार, कई राउंड की गिनती में जिस तरह से वोट शेयर में अचानक बदलाव आए, उससे संदेह पैदा होता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इन सभी मामलों का कानूनी और राजनीतिक रूप से अध्ययन कर रही है ताकि जनता के सामने सच लाया जा सके।
गठबंधन की हार और आंकड़ों का विश्लेषण: कांग्रेस के लिए आत्ममंथन का समय
हाल ही में संपन्न हुए 227 सदस्यीय बीएमसी चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन का प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा। कांग्रेस ने इस बार वंचित बहुजन अघाड़ी (VBA), आरएसपी (RSP) और आरपीआई (गवई) के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। इस संयुक्त मोर्चे को कुल मिलाकर केवल 27 सीटों पर ही जीत नसीब हुई। यह 2017 के प्रदर्शन से भी नीचे है, जब कांग्रेस ने अकेले लड़ते हुए 31 सीटें हासिल की थीं। वर्षा गायकवाड़ ने स्वीकार किया कि सीटों की संख्या कम होना चिंताजनक है, लेकिन उन्होंने इसके पीछे के ‘अदृश्य’ कारणों को जनता के सामने रखना जरूरी समझा।
दूसरी ओर, सत्ताधारी महायुति गठबंधन ने बीएमसी में अपनी पकड़ बेहद मजबूत कर ली है। भारतीय जनता पार्टी 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने 29 सीटें जीती हैं। इस गठबंधन के पास स्पष्ट बहुमत है। वहीं, शिवसेना (यूबीटी) ने 65 सीटों पर जीत दर्ज कर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है और उसकी सहयोगी राज ठाकरे की मनसे को छह सीटें मिली हैं। इस चुनावी गणित में कांग्रेस पिछड़ती नजर आ रही है, लेकिन गायकवाड़ का मानना है कि उनकी पार्टी ने सबसे कठिन परिस्थितियों में ‘बहादुरी से लड़ाई’ लड़ी है।
‘हारे हैं पर हिम्मत नहीं खोई’: कार्यकर्ताओं से जमीनी संघर्ष जारी रखने की अपील
वर्षा गायकवाड़ ने उन पार्टी कार्यकर्ताओं और उम्मीदवारों की जमकर सराहना की जिन्होंने इन बाधाओं के बावजूद मैदान नहीं छोड़ा। उन्होंने कहा, “हमारे कार्यकर्ता और उम्मीदवार उन शक्तियों के खिलाफ मजबूती से खड़े रहे जिनके पास असीमित संसाधन और सत्ता का संरक्षण था। यह हार केवल आंकड़ों की है, हौसले की नहीं।” उन्होंने उन उम्मीदवारों से विशेष रूप से मुलाकात की जो बहुत कम अंतर से चुनाव हार गए और उन्हें ढांढस बंधाया कि उनका संघर्ष बेकार नहीं जाएगा।
मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष ने पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे चुनावी नतीजों से निराश होने के बजाय वापस जनता के बीच जाएं। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतना या हारना राजनीति का हिस्सा है, लेकिन जनता के मुद्दों से विमुख होना कांग्रेस की संस्कृति नहीं है। गायकवाड़ ने संकेत दिया कि आने वाले हफ्तों में कांग्रेस मुंबई के विभिन्न वार्डों में ‘जनसंपर्क अभियान’ शुरू करेगी ताकि लोगों को उन चुनावी गड़बड़ियों के बारे में बताया जा सके जिनका दावा पार्टी कर रही है।
बीएमसी के भीतर जवाबदेही और पारदर्शिता की लड़ाई
नवनिर्वाचित पार्षदों को संबोधित करते हुए वर्षा गायकवाड़ ने भविष्य का रोडमैप भी तैयार किया। उन्होंने कहा कि बीएमसी का प्रशासन अब तक की सबसे बड़ी चुनौती का सामना करने वाला है क्योंकि सत्ता पक्ष के पास प्रचंड बहुमत है। ऐसे में विपक्ष की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। गायकवाड़ ने नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों को निर्देश दिया कि वे निगम के भीतर होने वाले हर वित्तीय निर्णय, टेंडर प्रक्रिया और विकास कार्यों पर कड़ी नजर रखें।
उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस यह सुनिश्चित करेगी कि नगर प्रशासन जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ काम करे। वर्षा गायकवाड़ ने कहा, “बीएमसी मुंबईकरों के पसीने की कमाई का टैक्स इकट्ठा करती है, और हम इसे किसी की निजी जागीर नहीं बनने देंगे। हमारे पार्षद सदन के अंदर भ्रष्टाचार के खिलाफ ढाल बनकर खड़े होंगे।” उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे बुनियादी मुद्दों पर कांग्रेस बीएमसी के भीतर और बाहर दोनों जगह आक्रामक रुख अपनाएगी।
मुंबई की राजनीति अब एक नए दौर में प्रवेश कर रही है जहां सत्ता पक्ष अपनी जीत का जश्न मना रहा है, तो वहीं विपक्ष चुनावी शुचिता पर सवाल उठाकर इसे ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दे रहा है। वर्षा गायकवाड़ के ये तीखे तेवर आने वाले दिनों में मुंबई महानगरपालिका की बैठकों में भारी हंगामे का संकेत दे रहे हैं।