• February 11, 2026

बिहार विधानसभा में बजट सत्र के दौरान भारी हंगामा: तेजस्वी के ’40 हजार करोड़ी’ वार पर सम्राट चौधरी का पलटवार, सदन में छिड़ा सियासी वाकयुद्ध

पटना: बिहार विधानसभा के बजट सत्र का आगाज उम्मीद के मुताबिक ही हंगामेदार और तल्ख रहा। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच शब्दों के ऐसे बाण चले कि पूरा सदन युद्ध के मैदान में तब्दील होता नजर आया। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने जहां शायराना अंदाज में एनडीए सरकार पर ‘धनबल’ और ‘भय के शासन’ का गंभीर आरोप लगाया, वहीं उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने भी पलटवार करने में देर नहीं की। उपमुख्यमंत्री ने राजद के शासनकाल को ‘जंगलराज’ बताते हुए लालू प्रसाद यादव के पुराने मामलों का जिक्र कर विपक्ष को आईना दिखाने की कोशिश की। इस तीखी नोकझोंक और व्यक्तिगत हमलों के कारण सदन की गरिमा पर सवाल खड़े हुए और कार्यवाही के दौरान भारी शोर-शराबा देखने को मिला।

सदन की शुरुआत में ही नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मोर्चा संभाल लिया। उन्होंने अपनी बात की शुरुआत एक शेर से की, जिसके जरिए उन्होंने सरकार की नीयत पर निशाना साधा। तेजस्वी ने सीधे तौर पर एनडीए सरकार को लोकतांत्रिक मूल्यों के हनन का दोषी ठहराया। उन्होंने एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की जीत को रोकने के लिए एनडीए ने बेहिसाब धनशक्ति का प्रदर्शन किया था। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि बिहार के चुनाव में उन्हें और उनके गठबंधन को हराने के लिए सत्तारूढ़ एनडीए ने करीब 40,000 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च की। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी राशि आखिर कहां से आई और इसका स्रोत क्या था? तेजस्वी ने मांग की कि इस बेहिसाब खर्च की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए ताकि जनता को पता चल सके कि लोकतंत्र को खरीदने की कोशिश कैसे की गई।

तेजस्वी यादव यहीं नहीं रुके, उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि एनडीए ने जनता का विश्वास जीतने के बजाय केवल पैसे के दम पर सत्ता हथियाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि यह शर्मनाक है कि 40 हजार करोड़ रुपये जैसी विशाल राशि झोंकने के बाद भी एनडीए को जनता के बीच टिकने के लिए संघर्ष करना पड़ा। तेजस्वी के अनुसार, यह इस बात का प्रमाण है कि बिहार की जनता का झुकाव महागठबंधन की ओर था, लेकिन धनबल के जरिए जनादेश को प्रभावित किया गया। उन्होंने इसे लोकतंत्र की हत्या करार देते हुए कहा कि एनडीए ने राजनीति को व्यापार बना दिया है।

भ्रष्टाचार और चुनावी खर्च के आरोपों के साथ-साथ तेजस्वी यादव ने बिहार की वर्तमान कानून-व्यवस्था और लोकतांत्रिक ढांचे पर भी करारा प्रहार किया। उन्होंने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि आज बिहार में लोकतंत्र सुरक्षित नहीं रह गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि एनडीए सरकार ने राज्य में ‘भय का शासन’ स्थापित कर दिया है। तेजस्वी ने कहा कि आज विपक्ष की आवाज को संवैधानिक तरीके से दबाने की कोशिश की जा रही है और आम जनता को डरा-धमकाकर सत्ता चलाई जा रही है। उन्होंने सत्ता पक्ष की ओर इशारा करते हुए चेतावनी दी कि मुद्दों की राजनीति को दरकिनार कर डराने-धमकाने का जो खेल खेला जा रहा है, वह बिहार के भविष्य के लिए अत्यंत घातक सिद्ध होगा।

तेजस्वी यादव के इन गंभीर और तीखे बयानों ने सत्ता पक्ष के विधायकों और मंत्रियों के भीतर खलबली मचा दी। जैसे ही तेजस्वी ने 40 हजार करोड़ रुपये के खर्च का आंकड़ा पेश किया, एनडीए के विधायक अपनी सीटों से खड़े हो गए और कड़ा ऐतराज जताया। सत्ता पक्ष की ओर से शोर-शराबा शुरू हो गया और तेजस्वी के दावों को पूरी तरह आधारहीन, काल्पनिक और चुनावी हताशा में दिया गया बयान बताया गया। सदन में स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि विधानसभा अध्यक्ष को बार-बार सदस्यों से शांत रहने की अपील करनी पड़ी, लेकिन गतिरोध थमता नजर नहीं आया।

जैसे ही तेजस्वी यादव ने अपना वक्तव्य समाप्त किया, उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने कमान संभाली और विपक्ष पर जवाबी हमला बोला। विजय सिन्हा ने तेजस्वी के आरोपों का जवाब विकास की बातों से देने के बजाय राजद के पुराने इतिहास से दिया। उन्होंने सीधे तौर पर राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव का नाम लेते हुए उन्हें ‘चारा चोर’ कहकर संबोधित किया। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों के दामन भ्रष्टाचार के दागों से भरे हुए हैं, वे आज पारदर्शिता की बात कर रहे हैं। उन्होंने सदन में ‘जंगलराज’ की यादें ताजा करते हुए कहा कि बिहार की जनता भूली नहीं है कि किस तरह एक दौर में राज्य में अपराधी समानांतर सरकार चलाते थे। विजय सिन्हा ने कहा कि आज बिहार में सुशासन की सरकार है और विकास के काम हो रहे हैं, जिससे घबराकर विपक्ष मनगढ़ंत आंकड़े पेश कर रहा है।

सदन में काफी देर तक दोनों तरफ से नारेबाजी होती रही। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने ‘चारा चोर’ के नारे लगाए तो विपक्ष की ओर से ‘लोकतंत्र बचाओ’ की आवाज बुलंद की गई। इस हंगामे के बीच बजट सत्र की अन्य महत्वपूर्ण विधायी प्रक्रियाएं गौण नजर आईं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बजट सत्र के पहले ही दिन हुई यह भिड़ंत संकेत दे रही है कि आने वाले दिनों में सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलना मुश्किल होगा। तेजस्वी यादव ने जहां सरकार को भ्रष्टाचार और भय के मुद्दे पर घेरकर अपनी भावी रणनीति स्पष्ट कर दी है, वहीं सरकार ने भी यह साफ कर दिया है कि वह विपक्ष के हर हमले का जवाब उनके अतीत की याद दिलाकर देगी।

कुल मिलाकर, बिहार विधानसभा का यह सत्र पूरी तरह से राजनीतिक दांव-पेंच की भेंट चढ़ता दिख रहा है। जनता के असल मुद्दों, जैसे बेरोजगारी, पलायन और बाढ़ राहत पर चर्चा होने के बजाय, सदन व्यक्तिगत आरोपों और पुराने घोटालों के शोर में डूबा हुआ है। 2026 के इस राजनीतिक परिदृश्य में यह साफ है कि सत्ता और विपक्ष के बीच की खाई अब संवाद से नहीं, बल्कि केवल संघर्ष से भरने वाली है।

Digiqole Ad

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *