• February 11, 2026

कोलकाता: पार्क स्ट्रीट रेस्टोरेंट विवाद में वेटर को मिली जमानत, प्रबंधन ने ‘अनजाने में हुई गलती’ बताते हुए मांगी माफी

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजधानी के सबसे व्यस्त और प्रतिष्ठित व्यापारिक केंद्र पार्क स्ट्रीट इलाके में स्थित एक मशहूर रेस्टोरेंट में ‘प्रतिबंधित मांसाहारी भोजन’ परोसने के मामले ने इन दिनों तूल पकड़ रखा है। इस घटना के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए वेटर शेख नसीमुद्दीन को कोलकाता की एक अदालत ने मंगलवार को जमानत दे दी है। धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के गंभीर आरोपों के बीच, रेस्टोरेंट प्रबंधन ने भी एक आधिकारिक बयान जारी कर इस पूरी घटना को ‘अनजाने में हुई एक गंभीर मानवीय भूल’ करार दिया है।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब कोलकाता के एक लोकप्रिय कंटेंट क्रिएटर सायक चक्रवर्ती ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया। चक्रवर्ती के अनुसार, वे अपने दो दोस्तों के साथ पार्क स्ट्रीट स्थित ‘ओलिपब’ रेस्टोरेंट में भोजन करने गए थे। उन्होंने वहां साधारण मांसाहारी भोजन का ऑर्डर दिया था, लेकिन उनके दावों के मुताबिक, उन्हें परोसे गए भोजन में प्रतिबंधित मांस का अंश था। वीडियो के सार्वजनिक होते ही यह मामला तेजी से वायरल हो गया और लोगों ने रेस्टोरेंट के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग शुरू कर दी। विवाद बढ़ता देख पुलिस ने कार्रवाई की और शनिवार को रेस्टोरेंट के वेटर शेख नसीमुद्दीन को गिरफ्तार कर लिया गया था।

मंगलवार को कोलकाता के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत में इस मामले की अहम सुनवाई हुई। आरोपी वेटर शेख नसीमुद्दीन को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत के समक्ष पेश किया गया। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि नसीमुद्दीन पिछले कई दिनों से न्यायिक हिरासत में हैं और पुलिस जांच में अब तक ऐसी कोई नई या साजिशन बात सामने नहीं आई है जिससे उन्हें हिरासत में रखा जाए। वकील ने अदालत को बताया कि यह केवल एक सेवा संबंधी त्रुटि थी न कि जानबूझकर किया गया कोई अपराध।

दूसरी ओर, अभियोजन पक्ष ने जमानत का कड़ा विरोध किया। सरकारी वकील का तर्क था कि इस संवेदनशील मामले से समाज के एक बड़े वर्ग की धार्मिक भावनाएं जुड़ी हुई हैं और ऐसे में आरोपी को रिहा करना जांच को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने नसीमुद्दीन की जमानत याचिका स्वीकार कर ली। अदालत ने माना कि जांच के वर्तमान चरण में आरोपी को और अधिक समय तक जेल में रखने का पर्याप्त आधार नहीं है।

इस पूरे घटनाक्रम पर ‘ओलिपब’ रेस्टोरेंट प्रबंधन ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए एक विस्तृत स्पष्टीकरण और माफीनामा जारी किया है। रेस्टोरेंट की ओर से कहा गया कि 30 जनवरी 2026 की शाम जो कुछ भी हुआ, वह एक ‘अनजाने में हुई गंभीर गलती’ थी। प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य कभी भी किसी व्यक्ति या समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। बयान में आगे कहा गया कि ओलिपब पिछले 80 वर्षों से कोलकाता की संस्कृति का हिस्सा रहा है और इस दौरान उन्होंने हमेशा सभी धर्मों, जातियों और वर्गों के ग्राहकों का समान रूप से सम्मान किया है। उन्हें अपनी आठ दशक पुरानी विरासत पर गर्व है और वे भविष्य में ऐसी किसी भी त्रुटि को रोकने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

रोचक बात यह है कि आरोपी वेटर शेख नसीमुद्दीन का परिवार मूल रूप से ओडिशा का रहने वाला है और उनकी पिछली दो पीढ़ियां इसी रेस्टोरेंट में अपनी सेवाएं देती आ रही हैं। रेस्टोरेंट प्रबंधन ने भी नसीमुद्दीन के लंबे जुड़ाव का हवाला देते हुए इसे एक मानवीय भूल बताया है। जानकारों का कहना है कि पार्क स्ट्रीट जैसे हाई-प्रोफाइल इलाके में इस तरह की घटना से रेस्टोरेंट की छवि पर गहरा असर पड़ा है, जिसे सुधारने के लिए अब कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।

फिलहाल, वेटर की रिहाई के बाद यह मामला शांत होता दिख रहा है, लेकिन खाद्य सुरक्षा और धार्मिक संवेदनशीलता को लेकर एक नई बहस जरूर छिड़ गई है। प्रशासन अब इस बात की भी जांच कर रहा है कि क्या रेस्टोरेंट के किचन प्रोटोकॉल में कोई खामी थी जिसके कारण यह भ्रम या गलती पैदा हुई। इस घटना ने शहर के अन्य रेस्टोरेंट मालिकों को भी सतर्क कर दिया है ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

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