• February 3, 2026

केरल की सियासी बिसात: बेपोर में ‘दामाद’ बनाम ‘बागी’ की जंग, क्या मुख्यमंत्री विजयन के गढ़ में सेंध लगा पाएंगे पीवी अनवर?

तिरुवनंतपुरम: केरल विधानसभा चुनाव के बिगुल बजने में अभी कुछ महीनों का समय शेष है, लेकिन राज्य की राजनीतिक सरगर्मी ने अभी से चरम सीमा छू ली है। इस चुनावी समर में सबसे दिलचस्प मुकाबला कोझिकोड जिले के बेपोर निर्वाचन क्षेत्र में देखने को मिल सकता है, जहां मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन के दामाद और मौजूदा पर्यटन मंत्री पी.ए. मोहम्मद रियास को कड़ी चुनौती देने के लिए पूर्व वामपंथी सहयोगी पीवी अनवर मैदान में उतरने को तैयार हैं। सोमवार को केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के अध्यक्ष सनी जोसेफ द्वारा की गई एक महत्वपूर्ण घोषणा ने इस मुकाबले को आधिकारिक रूप से ‘हाई-प्रोफाइल’ बना दिया है।

सनी जोसेफ ने मीडिया से बात करते हुए स्पष्ट किया कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता पीवी अनवर आगामी विधानसभा चुनाव में बेपोर से यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) गठबंधन के साझा उम्मीदवार होंगे। हालांकि, यूडीएफ ने अभी तक अपनी आधिकारिक उम्मीदवार सूची जारी नहीं की है, लेकिन केपीसीसी अध्यक्ष के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। जोसेफ ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि अनवर न केवल चुनाव लड़ेंगे, बल्कि वे बेपोर के अगले विधायक के रूप में विजयी होकर निकलेंगे। उन्होंने अनवर की सक्रियता और गठबंधन में उनकी नई भूमिका को लेकर सकारात्मक संकेत दिए।

गौरतलब है कि पीवी अनवर का राजनीतिक सफर पिछले कुछ महीनों में काफी नाटकीय रहा है। पूर्व में एलडीएफ (LDF) के विधायक रहे अनवर ने मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन और सीपीआई(एम) नेतृत्व के खिलाफ बगावत का झंडा बुलंद करते हुए वाम मोर्चा छोड़ दिया था। विधानसभा से इस्तीफा देने के बाद, उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया, जिसे हाल ही में यूडीएफ गठबंधन का हिस्सा बनाया गया है। अनवर पिछले कई हफ्तों से बेपोर निर्वाचन क्षेत्र में अपनी जमीन मजबूत करने में जुटे हैं। सोमवार को उनकी सक्रियता तब और अधिक चर्चा में आई जब उन्होंने चालियम बंदरगाह का दौरा किया। वहां उन्होंने स्थानीय मछुआरों और मछली व्यापारियों से सीधी बात की और उनकी समस्याओं को सुना।

हालांकि, जब पत्रकारों ने स्वयं अनवर से उनकी उम्मीदवारी की आधिकारिक पुष्टि के बारे में पूछा, तो उन्होंने बहुत ही नपे-तुले शब्दों में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि चुनाव तो किसी न किसी को लड़ना ही होगा और इसका अंतिम फैसला समय आने पर होगा। लेकिन उनके बयानों की धार पूरी तरह से पर्यटन मंत्री मोहम्मद रियास और मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन के परिवारवाद पर केंद्रित रही। अनवर ने रियास पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें केवल ‘दामाद’ के संबोधन से नवाजा और आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार और सीपीआई(एम) पूरी तरह से एक ही परिवार के वर्चस्व के चंगुल में फंस गई है।

अनवर ने अपने तीखे प्रहारों में पूछा कि वे वरिष्ठ वामपंथी नेता अब कहां हैं जिन्होंने दशकों तक खून-पसीना बहाकर पार्टी को खड़ा किया था? उन्होंने दावा किया कि आज स्थिति यह है कि जमीनी कार्यकर्ता भी पार्टी नेतृत्व के साथ नहीं हैं। मोहम्मद रियास की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए अनवर ने कहा कि मंत्री आम जनता के मुद्दों को सुलझाने में पूरी तरह विफल रहे हैं और वे केवल मुख्यमंत्री का दामाद होने के ‘आनंद’ में डूबे हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी यह लड़ाई व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि रियास के कामकाज और सरकार की नीतियों के खिलाफ है।

केरल की एलडीएफ सरकार द्वारा निकाली जा रही राज्यव्यापी ‘विकास रैली’ पर भी अनवर ने जमकर तंज कसा। उन्होंने इसे जनता के साथ एक बड़ा धोखा करार देते हुए कहा कि यदि राज्य में वाकई पिछले पांच वर्षों में वास्तविक विकास हुआ है, तो सरकार को ऐसी रैलियां करने और करोड़ों खर्च करने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है? उनके अनुसार, यूडीएफ के अभियान को लेकर जनता में जबरदस्त उत्साह है और लोग सत्ता परिवर्तन का मन बना चुके हैं।

दूसरी तरफ, सीपीआई(एम) और एलडीएफ ने फिलहाल अनवर के इन आरोपों पर चुप्पी साधे रखी है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि अनवर की बगावत का बेपोर के मतदाताओं पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अनवर, जो पहले मलप्पुरम के निलंबूर से जीत चुके हैं, एक चतुर रणनीतिकार हैं। बेपोर में उनका ध्यान केंद्रित करना सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए चिंता का विषय हो सकता है, विशेषकर तब जब विपक्षी गठबंधन यूडीएफ आने वाले हफ्तों में अपनी सीटों के बंटवारे और उम्मीदवारों के चयन को अंतिम रूप देने वाला है।

बेपोर का यह मुकाबला अब केवल दो उम्मीदवारों के बीच की जंग नहीं रह गया है, बल्कि यह पिनारयी विजयन के राजनीतिक उत्तराधिकार और उनके परिवार पर लग रहे आरोपों की अग्निपरीक्षा बन गया है। यदि पीवी अनवर यूडीएफ के बैनर तले यहां से प्रभावी प्रदर्शन करते हैं, तो यह न केवल रियास के लिए बल्कि सीधे तौर पर मुख्यमंत्री विजयन की साख पर भी एक बड़ा प्रहार होगा। जैसे-जैसे चुनाव की तारीखें नजदीक आएंगी, बेपोर की यह चुनावी लड़ाई केरल की राजनीति के भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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