असम चुनाव 2026: अमित शाह का कांग्रेस पर बड़ा हमला; ‘गमोसा’ के अपमान से लेकर 64 लाख घुसपैठियों तक, छिड़ा सियासी संग्राम
डिब्रूगढ़/धेमाजी: असम विधानसभा चुनाव 2026 की आहट के बीच राज्य का राजनीतिक पारा अपने चरम पर पहुंच गया है। दो दिवसीय असम दौरे पर पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कांग्रेस और राहुल गांधी के खिलाफ अब तक का सबसे आक्रामक रुख अपनाया। डिब्रूगढ़ के खानिकर परेड ग्राउंड और धेमाजी की जनसभाओं में शाह ने ‘असमिया अस्मिता’ और ‘जनसांख्यिकीय सुरक्षा’ को केंद्र में रखते हुए कांग्रेस पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने जहां राहुल गांधी पर असम की संस्कृति के प्रतीक ‘गमोसा’ के अपमान का आरोप लगाया, वहीं आंकड़ों के जरिए यह दावा भी किया कि कांग्रेस के शासनकाल में असम के सात जिले घुसपैठियों के गढ़ बन चुके हैं।
इस दौरे का सबसे चर्चित मुद्दा रहा ‘गमोसा’ विवाद। डिब्रूगढ़ में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित ‘एट होम’ कार्यक्रम की एक घटना का जिक्र किया। शाह ने दावा किया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा आयोजित इस विशिष्ट कार्यक्रम में सभी मेहमानों को सम्मान के तौर पर असम का पारंपरिक स्कार्फ ‘गमोसा’ भेंट किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां मौजूद विदेशी मेहमानों और देश के लगभग सभी बड़े नेताओं ने इसे सहर्ष धारण किया, लेकिन राहुल गांधी ने इसे पहनने से साफ इनकार कर दिया। शाह ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी ऐसा करने वाले एकमात्र व्यक्ति थे। गृह मंत्री ने गर्जना करते हुए कहा कि राहुल गांधी अपनी व्यक्तिगत मर्जी के मालिक हो सकते हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी उत्तर-पूर्व की महान संस्कृति और परंपराओं का अपमान कतई बर्दाश्त नहीं करेगी।
संस्कृति के मुद्दे को सुरक्षा और इतिहास से जोड़ते हुए अमित शाह ने कांग्रेस के पुराने शासन पर कड़े सवाल दागे। उन्होंने सीधा हमला करते हुए पूछा कि राहुल गांधी और उनकी पार्टी ने दशकों तक असम पर राज किया, लेकिन इस राज्य को बंदूकों, गोलियों, संघर्ष और युवाओं की लाशों के सिवा क्या दिया? शाह ने कहा कि कांग्रेस के समय में असम केवल हिंसा और अस्थिरता का केंद्र बना रहा, जबकि भाजपा सरकार के आने के बाद यहां शांति और विकास के नए द्वार खुले हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जब तक भाजपा सत्ता में है, राज्य की परंपराएं और सुरक्षा पूरी तरह अक्षुण्ण रहेंगी।
असम दौरे के दूसरे पड़ाव धेमाजी में अमित शाह का रुख और भी कड़ा नजर आया। यहां उन्होंने राज्य में हो रहे जनसांख्यिकीय बदलाव (Demographic Change) को लेकर कांग्रेस को कटघरे में खड़ा किया। शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हमेशा घुसपैठ को अपने वोट बैंक के लिए एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया है। उन्होंने विशिष्ट जिलों का नाम लेते हुए दावा किया कि कांग्रेस के बीस साल के शासन के दौरान धुबरी, बारपेटा, दरांग, मोरीगांव, बोंगाईगांव, नगांव और गोलपारा जैसे सात जिले घुसपैठियों से भर गए हैं। शाह के अनुसार, आज इन सात जिलों में घुसपैठियों की आबादी बढ़कर 64 लाख तक पहुंच गई है, जो राज्य की मूल पहचान के लिए एक गंभीर खतरा है।
घुसपैठ की इस समस्या का समाधान बताते हुए गृह मंत्री ने आगामी चुनावों में भाजपा के लिए समर्थन मांगा। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अगर असम की भूमि को इन घुसपैठियों से मुक्त करना है, तो राज्य में एक बार फिर भाजपा की मजबूत सरकार की आवश्यकता है। उन्होंने अवैध रूप से भारत आए लोगों की पहचान करने और उन्हें वापस भेजने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही, युवाओं को एक महत्वपूर्ण संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि अब असम के युवाओं को अपनी सुरक्षा के लिए हथियार उठाने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि घुसपैठियों को रोकने और कानून का राज स्थापित करने का काम मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की सरकार पूरी मुस्तैदी से कर रही है।
अमित शाह का यह दौरा स्पष्ट संकेत दे रहा है कि भाजपा आगामी चुनावों में ‘असमिया पहचान’ (Assamese Identity) और ‘अवैध घुसपैठ’ को मुख्य चुनावी मुद्दा बनाने जा रही है। एक तरफ जहां उन्होंने राहुल गांधी को असम विरोधी साबित करने की कोशिश की, वहीं दूसरी तरफ घुसपैठ के आंकड़ों के जरिए राज्य की मूल आबादी के भीतर असुरक्षा की भावना को संबोधित किया। भाजपा का यह ‘राष्ट्रवाद और विकास’ का कार्ड कांग्रेस के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रहा है। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस इन गंभीर आरोपों और ‘गमोसा’ विवाद पर क्या स्पष्टीकरण देती है और असम की जनता इस चुनावी महासंग्राम में किसका साथ देती है।