असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का गौरव गोगोई पर कड़ा प्रहार: “पाकिस्तानी एजेंट के सामने नहीं झुकेगा कोई असमिया”
कलियाबोर (असम): असम की राजनीति में उस समय भूचाल आ गया जब मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई के खिलाफ अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना के भूमि पूजन के अवसर पर आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री सरमा ने कांग्रेस नेतृत्व और विशेष रूप से गौरव गोगोई को निशाने पर लिया। मुख्यमंत्री ने गौरव गोगोई द्वारा विकास परियोजनाओं के कथित विरोध पर तंज कसते हुए उन्हें ‘पाकिस्तानी एजेंट’ की संज्ञा तक दे डाली और स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह ‘नया असम’ है, जहाँ कोई भी स्वाभिमानी असमिया व्यक्ति ऐसे तत्वों के सामने आत्मसमर्पण नहीं करेगा।
कलियाबोर की इस रैली में मुख्यमंत्री सरमा ने न केवल राजनीतिक विरोधियों को घेरा, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर भारत में हो रहे बुनियादी ढांचे के बदलावों को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने दावा किया कि दशकों से जो परियोजनाएं केवल कागजों पर या कल्पनाओं में थीं, वे आज हकीकत बन रही हैं। मुख्यमंत्री ने 2026 के विधानसभा चुनावों का बिगुल फूंकते हुए कहा कि असम की जनता एक बार फिर भाजपा पर भरोसा जताएगी और भारी बहुमत के साथ जीत दर्ज कर प्रधानमंत्री मोदी को ‘उपहार’ स्वरूप अगली सरकार सौंपेगी।
विकास परियोजनाओं पर गौरव गोगोई के विरोध का पलटवार
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का गुस्सा मुख्य रूप से काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना के विरोध को लेकर था। उन्होंने कहा कि कल कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने इस प्रोजेक्ट पर सवाल उठाए और इसका विरोध किया, जो असम की प्रगति और वन्यजीवों की सुरक्षा में सबसे बड़ी बाधा बनने जैसा है। मुख्यमंत्री ने कड़े लहजे में कहा, “मैं कांग्रेस के नेताओं को बताना चाहता हूं कि असम बदल चुका है। कोई भी असमिया व्यक्ति अब किसी पाकिस्तानी एजेंट के सामने सरेंडर नहीं करेगा। यह नया असम अपनी पहचान और अपने विकास के लिए खड़ा होना जानता है।”
सरमा ने आगे कहा कि गौरव गोगोई और कांग्रेस पार्टी ने हमेशा उन परियोजनाओं का विरोध किया है जो असम को आधुनिक बनाती हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल केवल तुष्टीकरण और अवरोध पैदा करने की राजनीति जानते हैं, जबकि भाजपा सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र पर चल रही है। मुख्यमंत्री ने जनता से अपील की कि वे उन ताकतों को पहचानें जो बाहरी एजेंडे के तहत राज्य के विकास को रोकना चाहती हैं। उनके इस बयान ने राज्य की राजनीति में ध्रुवीकरण और तीखी बयानबाजी को एक नई दिशा दे दी है।
काजीरंगा कॉरिडोर: कनेक्टिविटी और वन्यजीव सुरक्षा का महासंगम
परियोजना की तकनीकी और व्यावहारिक बारीकियों पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर असम के लिए एक ‘गेम-चेंजर’ साबित होगा। लगभग 7000 करोड़ रुपये की इस महापरियोजना के तहत कलियाबोर से नुमालीगढ़ के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग-715 का निर्माण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कॉरिडोर के पूरा होने के बाद यात्रियों का समय लगभग एक घंटा कम हो जाएगा, जो न केवल ईंधन बचाएगा बल्कि व्यापारिक गतिविधियों को भी गति देगा।
मुख्यमंत्री ने भावुक होते हुए कहा कि पहले काजीरंगा में शिकारियों का बोलबाला था, लेकिन अब किसी की इतनी हिमाकत नहीं है कि वह राइनो (गैंडे) की ओर आंख उठाकर भी देख सके। एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण से मानसून के दौरान ब्रह्मपुत्र का जलस्तर बढ़ने पर वन्यजीवों को ऊंचे इलाकों की ओर जाने के लिए एक सुरक्षित रास्ता मिलेगा। उन्होंने कहा कि पहले सड़क पार करते समय जानवर वाहनों की चपेट में आकर मारे जाते थे, लेकिन अब यह कॉरिडोर जानवरों और इंसानों के बीच के संघर्ष को न्यूनतम कर देगा। सरमा ने इसे “मील का पत्थर” बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शिता की सराहना की।
असम के बदलते परिदृश्य पर मुख्यमंत्री का गौरवपूर्ण संबोधन
अपने संबोधन के दौरान हिमंत बिस्वा सरमा ने उन उपलब्धियों को गिनाया जो पहले असंभव मानी जाती थीं। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता था कि ब्रह्मपुत्र नदी पर इतने बड़े पुल, पानी के भीतर सुरंग और काजीरंगा जैसा विश्व स्तरीय एलिवेटेड कॉरिडोर कभी बन सकता था, लेकिन आज ये हमारी आंखों के सामने सच्चाई बनकर खड़े हैं।” उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त किया कि उनके विशेष ध्यान के कारण आज असम अपने पैरों पर खड़ा होने में सक्षम हुआ है।
मुख्यमंत्री ने गुवाहाटी में आयोजित सांस्कृतिक महाकुंभ का भी जिक्र किया, जहाँ 10 हजार कलाकारों ने प्रधानमंत्री के सामने पारंपरिक ‘बागुरुंबा’ नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी थी। उन्होंने कहा कि यह असम की सांस्कृतिक शक्ति का प्रदर्शन था जिसे आज पूरा विश्व सोशल मीडिया के माध्यम से देख रहा है। सरमा ने कहा कि भाजपा की सरकार ने न केवल सड़कें और पुल बनाए हैं, बल्कि असम की संस्कृति और गौरव को भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थापित किया है। उनके अनुसार, 2026 में भाजपा की दोबारा वापसी निश्चित है क्योंकि जनता ने विकास का स्वाद चख लिया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने काजीरंगा को बताया असम की आत्मा
इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जनसभा को संबोधित किया और काजीरंगा की महत्ता पर प्रकाश डाला। प्रधानमंत्री ने कहा, “काजीरंगा केवल एक नेशनल पार्क नहीं है, बल्कि यह असम की आत्मा और भारत की जैव विविधता का एक अनमोल रत्न है।” यूनेस्को द्वारा वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा मिलने का उल्लेख करते हुए पीएम ने कहा कि यहां के वन्यजीवों की रक्षा करना केवल पर्यावरण संरक्षण नहीं है, बल्कि यह असम की आने वाली पीढ़ी के भविष्य के प्रति हमारी जिम्मेदारी है।
प्रधानमंत्री ने कांग्रेस की पुरानी नीतियों पर प्रहार करते हुए कहा कि दशकों तक पूर्वोत्तर के लोगों को यह महसूस कराया गया कि देश का विकास कहीं और हो रहा है और वे उपेक्षित हैं। इस हीन भावना को खत्म करने के लिए उनकी सरकार ने नॉर्थ ईस्ट इंडिया के विकास को प्राथमिकता बनाया। मोदी ने रेल कनेक्टिविटी का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस सरकारों ने इस पर कभी ध्यान नहीं दिया, लेकिन आज असम को वंदे भारत और अमृत भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों की सौगात मिल रही है। उन्होंने 90 किमी लंबे कॉरिडोर के महत्व को समझाते हुए कहा कि यह वन्यजीवों और स्थानीय आबादी के सह-अस्तित्व का एक आदर्श मॉडल बनेगा।
अमृत भारत ट्रेनों की सौगात और कनेक्टिविटी का विस्तार
प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरे के दौरान राज्य को दो नई ‘अमृत भारत’ एक्सप्रेस ट्रेनों की सौगात दी। पहली ट्रेन गुवाहाटी को रोहतक (हरियाणा) से जोड़ेगी, जबकि दूसरी ट्रेन डिब्रूगढ़ से लखनऊ (गोमती नगर) के रूट पर चलेगी। मुख्यमंत्री सरमा ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि दो दिनों के भीतर तीन ट्रेनों की सौगात मिलना असम के रेल इतिहास में एक अभूतपूर्व घटना है। उन्होंने कहा कि इससे असम के युवाओं को रोजगार के लिए बाहर जाने और व्यापार के नए अवसर तलाशने में बहुत मदद मिलेगी।
कुल मिलाकर, कलियाबोर की यह रैली राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन और विकास के जश्न का मिश्रण रही। जहाँ मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गौरव गोगोई और कांग्रेस को ‘पाकिस्तानी एजेंट’ जैसे शब्दों से घेरकर चुनावी माहौल को गर्माया, वहीं प्रधानमंत्री ने विकास परियोजनाओं के जरिए असम के भविष्य को सुरक्षित करने का रोडमैप पेश किया। 7000 करोड़ रुपये की काजीरंगा परियोजना और नई रेल सेवाओं के साथ, असम अब पूर्वोत्तर के विकास का सबसे मजबूत केंद्र बनकर उभरा है। आने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर, यह टकराव राज्य की राजनीति में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।