‘विश्वगुरु’ की कूटनीति पर जयराम रमेश का प्रहार: ट्रंप के युद्ध रुकवाने के दावे और अमेरिका-पाक सैन्य अभ्यास पर घेरा
नई दिल्ली: भारत की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को लेकर शनिवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच एक नया वाकयुद्ध छिड़ गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महासचिव जयराम रमेश ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों और अमेरिकी-पाकिस्तानी सेनाओं के बीच हुए संयुक्त सैन्य अभ्यास को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। जयराम रमेश ने दावा किया कि स्वयं को ‘विश्वगुरु’ बताने वाली सरकार की आत्मप्रशंसापूर्ण कूटनीति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े झटके लग रहे हैं। विवाद की मुख्य जड़ राष्ट्रपति ट्रंप का वह दावा है जिसमें उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच एक संभावित परमाणु युद्ध को रोकने का श्रेय खुद को दिया है।
अमेरिकी-पाक सैन्य अभ्यास ‘इंस्पायर्ड गैम्बिट’ पर कांग्रेस की आपत्ति
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए केंद्र सरकार की विदेश नीति की विफलता को उजागर किया। उन्होंने हाल ही में संपन्न हुए ‘इंस्पायर्ड गैम्बिट-2026’ नामक संयुक्त सैन्य अभ्यास का हवाला दिया। यह अभ्यास अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) और पाकिस्तानी सेना के बीच आयोजित किया गया था।
रमेश ने तंज कसते हुए लिखा कि जो सरकार अपनी कूटनीतिक जीत के बड़े-बड़े दावे करती है, उसके लिए यह एक बड़ा झटका है कि भारत का रणनीतिक साझेदार अमेरिका, पाकिस्तान के साथ सैन्य प्रशिक्षण साझा कर रहा है। उन्होंने अमेरिकी केंद्रीय कमान के उस बयान का भी जिक्र किया जिसमें इस अभ्यास के सफल समापन की बात कही गई है। कांग्रेस नेता के अनुसार, यह सैन्य अभ्यास भारत की सुरक्षा चिंताओं को नजरअंदाज करने जैसा है।
जनरल माइकल कुनिला और पाकिस्तान का ‘असाधारण सहयोगी’ होना
अपनी पोस्ट में जयराम रमेश ने पिछले एक साल के घटनाक्रमों को क्रमवार तरीके से रखा। उन्होंने याद दिलाया कि जून 2025 में तत्कालीन अमेरिकी केंद्रीय कमान प्रमुख जनरल माइकल कुनिला ने आतंकवाद विरोधी अभियानों के संदर्भ में पाकिस्तान को एक ‘असाधारण सहयोगी’ बताया था। कांग्रेस सांसद ने इस बात पर हैरानी जताई कि जो देश आतंकवाद का गढ़ माना जाता है, उसे अमेरिका द्वारा इतनी बड़ी पदवी दी जा रही है और भारत की ‘विश्वगुरु’ वाली कूटनीति मूकदर्शक बनी हुई है।
रमेश ने आगे आरोप लगाया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के प्रति अपनी गहरी प्रशंसा बार-बार व्यक्त की है। उन्होंने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि आसिम मुनीर की भड़काऊ और सांप्रदायिक टिप्पणियों ने ही उन हमलों की पृष्ठभूमि तैयार की थी। जयराम रमेश का तर्क है कि भारत सरकार इन कूटनीतिक बदलावों को भांपने और अमेरिका पर दबाव बनाने में पूरी तरह विफल रही है।
डोनाल्ड ट्रंप का ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और युद्ध रुकवाने का दावा
इस राजनीतिक घमासान का सबसे चर्चित हिस्सा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान है, जिसमें उन्होंने 10 मई 2025 को भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले ‘युद्ध’ को टालने का दावा किया है। ट्रंप ने अपनी दावेदारी को मजबूती से रखते हुए कहा कि उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (संभावित भारतीय सैन्य कार्रवाई) को रुकवाने के लिए व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप किया था।
ट्रंप ने नोबेल शांति पुरस्कार के लिए अपनी दावेदारी पेश करते हुए एक बार फिर दोहराया कि उनके दबाव के कारण ही दो परमाणु हथियार संपन्न पड़ोसी देशों के बीच शांति स्थापित हो पाई। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ट्रंप के इन बयानों को प्रधानमंत्री मोदी की अंतरराष्ट्रीय छवि के लिए नुकसानदेह बताया है। रमेश का कहना है कि ट्रंप बार-बार इस बात का श्रेय ले रहे हैं कि उन्होंने भारत के हाथ रोके, जो भारत की संप्रभुता और रणनीतिक स्वायत्तता पर सवालिया निशान लगाता है।
ट्रंप की दावेदारी: “पाकिस्तानी पीएम ने कहा- आपने 1 करोड़ जानें बचाईं”
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक सार्वजनिक संबोधन में दावा किया कि उनके कूटनीतिक हस्तक्षेप के कारण ही दक्षिण एशिया में एक महाविनाश टल गया। ट्रंप ने कहा, “एक साल के भीतर हमने आठ शांति समझौते किए और गाजा युद्ध को खत्म कराया। आज मध्य पूर्व में शांति है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमने भारत और पाकिस्तान को परमाणु युद्ध की ओर बढ़ने से रोका।”
ट्रंप ने अपनी बात को पुख्ता करने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के कथित बयान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने खुद मुझसे कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ने कम से कम 1 करोड़ लोगों की जान बचाई है। यह वाकई अद्भुत था।” ट्रंप का यह बयान उन दावों की कड़ी है जो वे पिछले साल 10 मई से लगातार करते आ रहे हैं। उनके अनुसार, उनके प्रशासन की ‘पीस थ्रू स्ट्रेंथ’ (शक्ति के माध्यम से शांति) की नीति ने भारत-पाक सीमा पर तनाव को कम किया।
भारत की विदेश नीति पर सवाल: विफलता या रणनीति?
जयराम रमेश ने इन तमाम बिंदुओं को जोड़ते हुए केंद्र सरकार से तीखे सवाल पूछे हैं। कांग्रेस का आरोप है कि अमेरिका और पाकिस्तान के बीच बढ़ती नजदीकी और ट्रंप के अहंकारी दावों पर भारत सरकार की चुप्पी रहस्यमयी है। रमेश ने पूछा कि क्या ‘विश्वगुरु’ की कूटनीति केवल फोटो खिंचवाने और घरेलू राजनीति में उपयोग करने के लिए है?
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को अमेरिका द्वारा सैन्य सहयोग मिलना और ट्रंप द्वारा भारतीय सैन्य ऑपरेशनों को रोकने की बात सरेआम कहना, भारत के वैश्विक सम्मान को ठेस पहुँचाता है। विपक्षी दल का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी को इन दावों पर स्पष्टीकरण देना चाहिए कि क्या वास्तव में 10 मई 2025 को कोई ऐसी स्थिति बनी थी और क्या अमेरिकी दबाव में भारत ने अपने कदम पीछे खींचे थे।
भविष्य की कूटनीतिक चुनौतियां
जयराम रमेश के इन हमलों ने आगामी बजट सत्र और संसद की कार्यवाही में विदेश नीति पर चर्चा की संभावना को बढ़ा दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का दोबारा राष्ट्रपति बनना और पाकिस्तान के साथ अमेरिका के सैन्य संबंधों का बहाल होना भारत के लिए एक नई कूटनीतिक चुनौती पेश कर रहा है। जहां एक ओर भारत ‘क्वाड’ और अन्य मंचों पर अमेरिका के साथ है, वहीं अमेरिका का पाकिस्तान के प्रति यह ‘सॉफ्ट कॉर्नर’ नई दिल्ली के लिए चिंता का विषय है।
जयराम रमेश ने अपनी पोस्ट के अंत में सरकार को सलाह दी कि वह आत्मप्रशंसा के दौर से बाहर निकलकर वास्तविक चुनौतियों का सामना करे। उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की गरिमा को केवल नारों से नहीं, बल्कि ठोस और स्वतंत्र विदेश नीति से ही सुरक्षित रखा जा सकता है।