तमिलनाडु में चुनावी बिगुल: विजय का स्टालिन पर तीखा प्रहार, कहा- ‘एसओपी का मतलब है स्टालिन ऑपरेटिंग प्रोसीजर’, लूट का अनुभव हमें नहीं
चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले सियासी पारा अपने चरम पर पहुँच गया है। चुनावी बिसात बिछ चुकी है और इस बार मुकाबला केवल पारंपरिक प्रतिद्वंद्वियों के बीच नहीं, बल्कि सिनेमा के पर्दे से निकलकर राजनीति के मैदान में उतरे अभिनेता दलपति विजय के तेवरों से और भी रोचक हो गया है। अपनी पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कझगम’ (टीवीके) के लिए जनाधार जुटाने निकले विजय ने एक विशाल जनसभा में सत्तारूढ़ डीएमके सरकार और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन पर अब तक का सबसे बड़ा हमला बोला है। विजय ने न केवल सरकार की कार्यप्रणाली पर तंज कसा, बल्कि भ्रष्टाचार और वोट के बदले पैसे बांटने की संस्कृति को लेकर भी तीखी प्रतिक्रिया दी।
जनसभा में उमड़ी भारी भीड़ को संबोधित करते हुए विजय ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को निशाने पर लिया। प्रशासनिक शब्दावली ‘एसओपी’ (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) का जिक्र करते हुए उन्होंने मजाकिया लेकिन तीखे लहजे में कहा कि तमिलनाडु के संदर्भ में उनके लिए एसओपी का मतलब केवल ‘स्टालिन ऑपरेटिंग प्रोसीजर’ है। उन्होंने आरोप लगाया कि डीएमके सरकार एक खास ढर्रे पर चल रही है जहाँ जनता के हितों से ऊपर सत्ता के समीकरणों को रखा जाता है। विजय का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इसे डीएमके के मजबूत किले को चुनौती देने के एक बड़े प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
रैली के दौरान विजय ने एक अलग अंदाज में जनता से सीधा संवाद किया और मंच से उपस्थित लोगों को एक सामूहिक शपथ भी दिलाई। उन्होंने मतदाताओं को उनके अधिकार की याद दिलाते हुए कहा कि ‘मेरा वोट मेरा अधिकार है’ और इसे कोई भी ताकत या पैसा खरीद नहीं सकता। चुनाव में धनबल के इस्तेमाल पर कटाक्ष करते हुए अभिनेता से राजनेता बने विजय ने कहा कि अक्सर चुनावों के दौरान लोगों को प्रलोभन देने के लिए पैसे बांटे जाते हैं। उन्होंने जनता को सलाह दी कि अगर कोई हजारों रुपये देने आए तो वह पैसा खुशी-खुशी ले लें, क्योंकि वह अंततः जनता का ही पैसा है जिसे गलत तरीके से कमाया गया है। लेकिन उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि पैसा लेने के बावजूद वोट अपनी अंतरात्मा की आवाज पर दें और भ्रष्ट लोगों को ‘सीटी बजाकर’ सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दें। गौरतलब है कि ‘सीटी’ उनकी पार्टी टीवीके का आधिकारिक चुनाव चिन्ह है।
विजय के राजनीति में कदम रखने के बाद से ही विपक्षी दल और आलोचक उनके अनुभव पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं। इस जनसभा में विजय ने इन आलोचनाओं का भी करारा जवाब दिया। उन्होंने भावुक और आक्रामक होते हुए कहा कि जो लोग उनके राजनीतिक अनुभव की कमी की बात करते हैं, उन्हें खुद गिरेबान में झांकना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि उनके पास घोटालों और भ्रष्टाचार करने के अलावा और कौन सा अनुभव है? विजय ने गर्व से कहा कि हाँ, हमारे पास अनुभव की कमी है, लेकिन हमें जनता की गाढ़ी कमाई लूटने का अनुभव नहीं है। हमें विकास के नाम पर भ्रष्टाचार करने का अनुभव नहीं है। यह बयान सीधे तौर पर डीएमके के उन नेताओं पर हमला था जो विजय को राजनीति में ‘नौसिखिया’ करार दे रहे हैं।
तमिलनाडु में इस बार का विधानसभा चुनाव बेहद दिलचस्प होने वाला है। एक तरफ एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके अपनी सत्ता बरकरार रखने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है, वहीं विजय की पार्टी टीवीके युवाओं और अपने प्रशंसक वर्ग के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। विजय की रैलियों में उमड़ रही भीड़ इस बात का संकेत है कि तमिलनाडु की जनता अब द्रविड़ राजनीति के पारंपरिक दो ध्रुवों से आगे बढ़कर किसी तीसरे विकल्प की तलाश में है।
विजय ने अपने संबोधन का समापन करते हुए लोगों से अपील की कि वे किसी के बहकावे में न आएं और अपने वोट की ताकत को समझें। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य तमिलनाडु की राजनीति में पारदर्शिता और शुचिता लाना है। विजय की इस रैली के बाद डीएमके खेमे में भी खलबली मची हुई है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में जुबानी जंग और तेज होगी।