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तेलंगाना निकाय चुनाव परिणाम: कांग्रेस की जबरदस्त लहर, नगर पालिकाओं और निगमों में बीआरएस पिछड़ी, भाजपा की राह हुई कठिन

हैदराबाद: तेलंगाना के शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव परिणामों ने राज्य की राजनीति में एक नई इबारत लिख दी है। 11 फरवरी को हुए मतदान के बाद आज सुबह से जारी मतगणना के रुझानों और परिणामों में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी ने विपक्षी दलों पर भारी बढ़त बना ली है। राज्य की 116 नगर पालिकाओं और सात नगर निगमों के लिए हो रही इस मतगणना में कांग्रेस का पलड़ा शुरुआत से ही भारी नजर आ रहा है, जबकि भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) दूसरे स्थान पर संघर्ष कर रही है और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को शहरी क्षेत्रों में कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

राज्य चुनाव आयोग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, बुधवार को हुए मतदान में कुल 73.01 फीसदी वोटिंग दर्ज की गई थी, जो शहरी मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी को दर्शाती है। आज सुबह आठ बजे से राज्यभर के 123 केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा के बीच वोटों की गिनती शुरू हुई। कुल 2,996 वार्डों के लिए हो रहे इस चुनावी मुकाबले में कांग्रेस ने अब तक आए रुझानों में अपनी बढ़त को 500 के आंकड़े के पार पहुंचा दिया है। प्रारंभिक परिणामों के विश्लेषण से पता चलता है कि अब तक घोषित 30 नगर पालिकाओं में से 24 में कांग्रेस ने अपनी सत्ता की नींव रख दी है, जबकि बीआरएस केवल 6 पालिकाओं में बढ़त बनाने में सफल रही है।

विशेष रूप से रंगा रेड्डी जिले के नतीजों ने सभी का ध्यान खींचा है। यहां घोषित 59 वार्डों के परिणामों में कांग्रेस 24 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। हालांकि, बीआरएस ने भी यहां कड़ी टक्कर देते हुए 23 सीटें हासिल की हैं। भाजपा को इस जिले में केवल सात सीटों से संतोष करना पड़ा है, जबकि निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में पांच सीटें गई हैं। देवरकद्रा नगर पालिका का उदाहरण भी कांग्रेस के पक्ष में जाता दिख रहा है, जहां कुल 12 वार्डों में से कांग्रेस ने 6 सीटों पर कब्जा किया है, बीआरएस को 4, जबकि भाजपा और एक निर्दलीय उम्मीदवार को केवल एक-एक वार्ड में जीत मिली है।

वार्डवार परिणामों की कुल स्थिति पर गौर करें तो अब तक के आंकड़ों के अनुसार, कांग्रेस 525 सीटों पर अपना परचम लहरा चुकी है। बीआरएस 274 सीटों के साथ काफी पीछे चल रही है। भाजपा के लिए ये नतीजे चिंताजनक हो सकते हैं क्योंकि वह फिलहाल केवल 71 सीटों पर ही सिमटती दिख रही है, वहीं अन्य और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 83 सीटों पर जीत दर्ज की है। इन परिणामों से स्पष्ट है कि राज्य सरकार की नीतियों और शहरी विकास के एजेंडे पर जनता ने कांग्रेस को अपना भरपूर समर्थन दिया है।

मतगणना केंद्रों पर किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। प्रत्येक मतगणना केंद्र के बाहर धारा 144 लागू की गई है और केवल अधिकृत व्यक्तियों को ही प्रवेश की अनुमति दी गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये निकाय चुनाव परिणाम आने वाले समय में राज्य की बड़ी राजनीति की दिशा तय करेंगे। बीआरएस के लिए यह हार एक बड़े झटके के रूप में देखी जा रही है, क्योंकि शहरी निकायों पर कभी उनका एकछत्र राज हुआ करता था। दूसरी ओर, भाजपा जो राज्य में मुख्य विकल्प के रूप में उभरने का दावा कर रही थी, इन चुनावों में वैसा प्रदर्शन नहीं कर पाई है।

जैसे-जैसे दिन ढल रहा है, शेष वार्डों के परिणाम भी धीरे-धीरे स्पष्ट होते जा रहे हैं। फिलहाल राज्यभर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच जश्न का माहौल है और जीत के गुलाल उड़ने शुरू हो गए हैं। अंतिम परिणाम आने तक कांग्रेस की सीटों की संख्या में और भी वृद्धि होने की संभावना है, जो मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के लिए एक बड़ी जीत मानी जाएगी।

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