• January 19, 2026

महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव: जीत के उल्लास के बीच हिंसा और विवादों का साया; लाठीचार्ज, तोड़फोड़ और जेल से चली सियासी चालें

मुंबई/छत्रपति संभाजीनगर: महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों के चुनावी नतीजों ने राज्य की सियासत में हलचल मचा दी है। शुक्रवार को हुई मतगणना के दौरान जहां कई दिग्गजों के किले ढह गए, वहीं चुनावी प्रक्रिया हिंसा, लाठीचार्ज और झड़पों से लहूलुहान भी हुई। छत्रपति संभाजीनगर में पुलिसिया कार्रवाई से लेकर ठाणे में दफ्तरों में तोड़फोड़ और नागपुर-पुणे में दागी चेहरों की जीत ने लोकतंत्र के इस उत्सव पर कई सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। प्रशासन को कई जगहों पर बल प्रयोग करना पड़ा, तो कहीं धारा 163 (पूर्ववर्ती धारा 144) लगाकर भीड़ को नियंत्रित करना पड़ा।

छत्रपति संभाजीनगर में मतगणना केंद्र पर तनाव और लाठीचार्ज

चुनाव परिणामों की घोषणा के बीच सबसे गंभीर घटना छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) में घटी। यहां के गरवारे स्टेडियम स्थित मतगणना केंद्र पर शुक्रवार को उस समय स्थिति अनियंत्रित हो गई, जब दो राजनीतिक दलों के समर्थक आपस में भिड़ गए। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग और लाठीचार्ज का सहारा लिया। इस कार्रवाई की चपेट में शिवसेना के वरिष्ठ नेता और पूर्व महापौर विकास जैन भी आ गए, जो गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घटना के वायरल वीडियो में पुलिस को प्रदर्शनकारियों पर लाठियां भांजते हुए देखा जा सकता है।

इस घटना के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया। महाराष्ट्र के सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसात तुरंत मतगणना केंद्र पहुंचे और उन्होंने पुलिसिया कार्रवाई की कड़ी निंदा की। उन्होंने जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल निलंबन की मांग की। दूसरी ओर, पुलिस आयुक्त प्रवीण पवार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि पुलिस की ओर से अत्यधिक बल प्रयोग या गलती पाई जाती है, तो दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। इस झड़प में एक महिला पुलिस कांस्टेबल के भी घायल होने की खबर है।

ठाणे में भाजपा-शिवसेना के बीच टकराव: कार्यालय में तोड़फोड़

ठाणे और नवी मुंबई के राजनीतिक रणक्षेत्र में इस बार भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच सीधी और कांटे की टक्कर देखने को मिली। नवी मुंबई में भाजपा ने शिवसेना (शिंदे गुट) को करारी शिकस्त दी, जिसका असर ठाणे की सड़कों पर भी देखने को मिला। नेरुल इलाके में जीत-हार की रंजिश के चलते भाजपा कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर एक शिवसेना नेता के कार्यालय में घुसकर तोड़फोड़ की।

पुलिस के अनुसार, इस हिंसा के सिलसिले में एक दर्जन से अधिक लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। हालांकि, अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। यह घटना सत्ताधारी गठबंधन के भीतर बढ़ रहे आंतरिक मतभेदों और स्थानीय स्तर पर वर्चस्व की लड़ाई को उजागर करती है। नवी मुंबई के नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा ने अपनी जमीन मजबूत की है, जबकि शिंदे गुट को अपने ही गढ़ में कड़े संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है।

राज ठाकरे के ‘शिवतीर्थ’ और सेना भवन वाले वार्ड में मनसे का परचम

मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के नतीजों में भले ही मनसे को बड़ा लाभ न मिला हो, लेकिन वार्ड नंबर 192 की जीत ने राज ठाकरे को बड़ी राहत दी है। यह वही वार्ड है जिसमें राज ठाकरे का निवास स्थान ‘शिवतीर्थ’ और शिवसेना का वैचारिक केंद्र ‘शिवसेना भवन’ स्थित है। यहां से मनसे उम्मीदवार यशवंत किल्लेदार ने जीत दर्ज की है।

किल्लेदार की जीत के बाद एक दिलचस्प वाकया सामने आया। उन्होंने पत्रकारों को बताया कि जीत के बाद उन्हें शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे का फोन आया था। उद्धव ने उनसे कहा कि भले ही वे विपक्षी पार्टी से हैं, लेकिन चूंकि शिवसेना भवन उनके वार्ड में आता है, जिसे ठाकरे परिवार अपना ‘हृदय’ मानता है, इसलिए उन्हें इसकी विशेष देखभाल करनी होगी। किल्लेदार ने इस जीत का श्रेय ‘ठाकरे चचेरे भाइयों’ (उद्धव और राज) के बीच चुनाव पूर्व हुए अनौपचारिक समन्वय को दिया, जिसने मतदाताओं के बीच एक सकारात्मक संदेश भेजा।

नागपुर और पुणे: विवादित पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों की जीत

नगर निगम चुनावों के नतीजों ने एक बार फिर राजनीति के अपराधीकरण पर बहस छेड़ दी है। नागपुर में 2025 के दंगों के मुख्य आरोपी फहीम खान की पत्नी अलीशा खान ने एआईएमआईएम के टिकट पर शानदार जीत हासिल की। उन्होंने आशी नगर क्षेत्र के वार्ड नंबर 3 से भाजपा की भाग्यश्री कनाटोडे को पराजित किया। अलीशा के पति फहीम खान पिछले साल छत्रपति संभाजीनगर में भड़की हिंसा के मुख्य आरोपी हैं और फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। नागपुर में एआईएमआईएम ने कुल छह सीटें जीतकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।

वहीं पुणे में भी स्थिति कुछ ऐसी ही रही। जेल में बंद कुख्यात गैंगस्टर सूर्यकांत उर्फ बंदू अंदेकर के दो रिश्तेदारों ने अजीत पवार की एनसीपी के टिकट पर जीत हासिल की। बंदू अंदेकर की बहू सोनाली अंदेकर और साली लक्ष्मी अंदेकर वार्ड नंबर 23 से निर्वाचित हुईं। गौरतलब है कि इन दोनों को टिकट दिए जाने पर भाजपा ने अजीत पवार की कड़ी आलोचना की थी। अंदेकर परिवार का नाम पिछले साल नाना पेठ इलाके में हुई वनराज अंदेकर की हत्या और उसके बाद प्रतिशोध में हुई आयुष कोमकर की हत्या के मामले से जुड़ा है। इन विवादित जीतों ने यह साबित कर दिया है कि स्थानीय चुनावों में बाहुबल और पारिवारिक रसूख अब भी एक बड़ा कारक बना हुआ है।

पूरे राज्य में झड़पों और हाथापाई का दौर

शुक्रवार को हुई मतगणना के दौरान महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों से हिंसा की खबरें आती रहीं। मुंबई के वार्ड नंबर 146 में वंचित बहुजन अघाड़ी के उम्मीदवार सतीश राजगुरु की शिवसेना समर्थकों ने बेरहमी से पिटाई कर दी। ठाणे में भी मतगणना प्रक्रिया के दौरान तनाव बना रहा, जहां शिवसेना उम्मीदवार मीनाक्षी शिंदे और एक निर्दलीय उम्मीदवार के समर्थक आपस में भिड़ गए। मनपाड़ा मतगणना केंद्र के पास कुछ प्रदर्शनकारियों ने ईवीएम ले जा रही बसों का रास्ता रोकने का प्रयास किया, जिसके बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।

अहिल्यानगर में भी पुलिस को लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा, क्योंकि राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने निषेधाज्ञा का उल्लंघन करते हुए वेयरहाउस कॉर्पोरेशन मतगणना केंद्र को घेर लिया था। अमरावती में सूत गिरनी केंद्र के बाहर दो गुटों के बीच जमकर हाथापाई हुई। वहीं लालखाड़ी चौक पर एनसीपी समर्थकों द्वारा एआईएमआईएम उम्मीदवार के घर के बाहर नारेबाजी और अराजकता फैलाने से इलाके में दहशत का माहौल बन गया।

जालना में ढांगर आंदोलन के चलते प्रतिबंधात्मक आदेश

चुनावी गहमागहमी के बीच जालना जिले में सामाजिक तनाव भी देखने को मिला। ढांगर समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग में शामिल करने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन ने उग्र रूप ले लिया है। इसे देखते हुए जालना की जिलाधिकारी आशिमा मित्तल ने जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू कर दी है।

यह प्रतिबंधात्मक आदेश जालना और अंबाड के संवेदनशील इलाकों में रविवार मध्य रात्रि तक लागू रहेंगे। इसके तहत पांच से अधिक लोगों के इकट्ठा होने, हथियार ले जाने और सभा करने पर पूर्ण प्रतिबंध है। आंदोलन के चलते कई बाजार और व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी बंद रहे। प्रशासन को डर है कि चुनावी नतीजों के साथ सामाजिक असंतोष का मिलन जिले की कानून-व्यवस्था को बिगाड़ सकता है।

महाराष्ट्र के इन नगर निगम चुनावों ने यह साफ कर दिया है कि राज्य की राजनीति अब केवल नीतियों की लड़ाई नहीं रह गई है, बल्कि यह वर्चस्व, बाहुबल और भावनात्मक मुद्दों का एक जटिल मिश्रण बन चुकी है। जहां एक ओर ठाकरे भाइयों के बीच नई केमिस्ट्री दिखी, वहीं दूसरी ओर अपराधियों और उनके परिजनों की जीत ने लोकतांत्रिक मूल्यों को नई चुनौती दी है।

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