बंगाल में चुनावी घमासान: खारदाह में पूजा पंडाल में आग को लेकर भाजपा और पुलिस आमने-सामने, टीएमसी पर लगा ‘भारत माता’ के अपमान का आरोप
कोलकाता/खारदाह: पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही राजनीतिक हिंसा और आरोपों का दौर चरम पर पहुंच गया है। ताजा मामला कोलकाता के बाहरी इलाके खारदाह विधानसभा क्षेत्र का है, जहां एक पूजा पंडाल में आग लगने की घटना ने राज्य के सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। भारतीय जनता पार्टी ने सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि टीएमसी समर्थकों ने जानबूझकर पंडाल को आग के हवाले किया और वहां स्थापित ‘भारत माता’ की प्रतिमा को खंडित करने का प्रयास किया। दूसरी ओर, पुलिस और प्रशासन ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक तकनीकी दुर्घटना करार दिया है।
इस पूरे विवाद की शुरुआत शनिवार की रात हुई, जब खारदाह इलाके में स्थित एक पूजा पंडाल के एक हिस्से में अचानक आग की लपटें दिखाई दीं। भाजपा का आरोप है कि टीएमसी के ‘गुंडों’ ने अंधेरे का फायदा उठाकर इस घृणित कार्य को अंजाम दिया। केंद्रीय मंत्री और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार सोमवार को स्वयं घटनास्थल पर पहुंचे, जहां उन्होंने स्थिति का जायजा लिया और क्षतिग्रस्त पंडाल की मरम्मत करवाकर वहां विधिवत पूजा-अर्चना की। मजूमदार ने मीडिया से बातचीत में तीखे तेवर अपनाते हुए कहा कि यह हमला केवल एक पंडाल पर नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक अस्मिता और भारत माता के सम्मान पर है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय निवासियों की सतर्कता के कारण एक बड़ी अनहोनी टल गई, अन्यथा उपद्रवियों की योजना प्रतिमा को पूरी तरह नष्ट करने की थी।
घटना के विरोध में रविवार को भाजपा कार्यकर्ताओं ने खारदाह पुलिस स्टेशन के बाहर जमकर प्रदर्शन किया। माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज कर दिया। भाजपा का दावा है कि पुलिस की इस कार्रवाई में उनके कई कार्यकर्ता चोटिल हुए हैं और एक कार्यकर्ता की स्थिति अत्यंत गंभीर है, जिसका अस्पताल में उपचार चल रहा है। सुकांत मजूमदार ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल पुलिस अब एक निष्पक्ष बल के बजाय टीएमसी के ‘कैडर’ की तरह व्यवहार कर रही है। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि अपराधियों को पकड़ने के बजाय पुलिस उन लोगों को पीट रही है जो न्याय की मांग कर रहे हैं।
वहीं, इस संवेदनशील मामले पर पुलिस का आधिकारिक पक्ष भाजपा के दावों से बिल्कुल विपरीत है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने स्पष्ट किया कि प्रारंभिक जांच और फॉरेंसिक साक्ष्यों के अनुसार, पंडाल में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट था। पुलिस का कहना है कि किसी भी बाहरी व्यक्ति द्वारा आग लगाने के प्रमाण नहीं मिले हैं। लाठीचार्ज की घटना पर सफाई देते हुए अधिकारी ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने पुलिस स्टेशन के बाहर हिंसक प्रदर्शन शुरू कर दिया था और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ‘हल्का बल प्रयोग’ करना अनिवार्य हो गया था। पुलिस प्रशासन का दावा है कि फिलहाल क्षेत्र में शांति है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।
तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा के इन आरोपों को ‘चुनावी स्टंट’ करार दिया है। टीएमसी नेतृत्व का कहना है कि आगामी विधानसभा चुनाव में अपनी निश्चित हार को देखते हुए भाजपा अब ‘धार्मिक कार्ड’ खेलने की कोशिश कर रही है। टीएमसी के प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा जानबूझकर एक दुर्घटना को सांप्रदायिक और राजनीतिक रंग दे रही है ताकि राज्य की कानून-व्यवस्था को बिगाड़ा जा सके और मतों का ध्रुवीकरण किया जा सके। सरकार का तर्क है कि भाजपा के पास विकास के नाम पर कोई मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वे इस तरह के मनगढ़ंत आरोपों का सहारा ले रहे हैं।
जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, खारदाह जैसी घटनाएं पश्चिम बंगाल की राजनीति में और अधिक देखने को मिल सकती हैं। एक तरफ जहां भाजपा इसे बंगाल की अस्मिता और हिंदू गौरव से जोड़कर देख रही है, वहीं टीएमसी इसे बाहरी ताकतों द्वारा राज्य की शांति भंग करने की कोशिश बता रही है। फिलहाल खारदाह में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया गया है और खुफिया विभाग सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर नजर रख रहा है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बंगाल का चुनावी रण इस बार विकास के वादों के साथ-साथ धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों के इर्द-गिर्द भी लड़ा जाएगा।