तेलंगाना में राजनीतिक घमासान: फोन टैपिंग मामले में हरीश राव से पूछताछ, बीआरएस ने रेवंत रेड्डी सरकार पर लगाया ‘डाइवर्जन पॉलिटिक्स’ का आरोप
हैदराबाद: तेलंगाना की राजनीति में उस वक्त उबाल आ गया जब भारत राष्ट्र समिति (BRS) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री टी. हरीश राव फोन टैपिंग मामले में पूछताछ के लिए जुबली हिल्स पुलिस स्टेशन पहुंचे। इस घटनाक्रम के बाद बीआरएस और सत्तारूढ़ कांग्रेस के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। बीआरएस ने इसे मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की ‘प्रतिशोध की राजनीति’ करार दिया है। पार्टी का आरोप है कि सरकार अपनी विफलताओं और कथित घोटालों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए वरिष्ठ नेताओं को निशाना बना रही है।
जुबली हिल्स थाने पहुंचे हरीश राव: ‘यह महज एक राजनीतिक हथकंडा’
विशेष जांच टीम (SIT) द्वारा जारी नोटिस के बाद पूर्व मंत्री हरीश राव मंगलवार को पुलिस के समक्ष पेश हुए। थाने में प्रवेश करने से पहले मीडिया से बात करते हुए उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को खारिज कर दिया। हरीश राव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह सब कुछ और नहीं बल्कि एक “राजनीतिक हथकंडा” है। उन्होंने कहा कि वे जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं क्योंकि उनके पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है। बीआरएस समर्थकों ने हरीश राव के समर्थन में थाने के बाहर नारेबाजी भी की, जिससे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
सत्यवती राठौड़ का प्रहार: ‘दो साल बाद नए नाम क्यों?’
बीआरएस की वरिष्ठ नेता सत्यवती राठौड़ ने इस मामले में सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि हरीश राव पूरी तरह निर्दोष हैं और उनके खिलाफ की जा रही कार्रवाई केवल जनता की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास है। राठौड़ ने एसआईटी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा, “फोन टैपिंग मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी को लगभग दो साल का समय बीत चुका है। इतने लंबे समय तक खामोश रहने के बाद अब अचानक नए-नए नाम क्यों सामने लाए जा रहे हैं? यह साफ दिखाता है कि कांग्रेस पार्टी राजनीतिक रूप से कमजोर पड़ रही है और अपनी साख बचाने के लिए विपक्षी नेताओं को प्रताड़ित कर रही है।” उन्होंने रेवंत रेड्डी को ‘ध्यान भटकाने वाली राजनीति’ (Diversion Politics) का विशेषज्ञ करार दिया।
केटीआर का गंभीर आरोप: कोयला घोटाले से ध्यान हटाने की कोशिश
बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामा राव (केटीआर) ने इस पूरे विवाद को एक नया मोड़ दे दिया है। केटीआर ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के परिवार के सदस्यों से जुड़े कथित ‘कोयला घोटाले’ में नाम आने के बाद सरकार घबरा गई है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री के बहनोई सृजन रेड्डी का नाम हाल ही में एक बड़े विवाद में सामने आया है, जिससे सरकार की छवि को धक्का लगा है। इसी छवि को सुधारने और लोगों की चर्चा का विषय बदलने के लिए हरीश राव को फोन टैपिंग मामले में घसीटा गया है।
केटीआर ने कहा कि हरीश राव तेलंगाना आंदोलन के शुरुआती दिनों से ही जनता के साथ मजबूती से खड़े रहे हैं और उनकी छवि एक निष्ठावान जनसेवक की है। उन्होंने तर्क दिया कि रेवंत रेड्डी राजनीतिक रूप से हरीश राव का मुकाबला करने में सक्षम नहीं हैं, इसलिए वे पुलिस और जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर उन्हें परेशान करने की कोशिश कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के रुख का हवाला और कानूनी वैधता पर सवाल
केटीआर ने कानूनी पहलुओं पर चर्चा करते हुए कहा कि फोन टैपिंग के इस कथित मामले में कोई दम नहीं है। उन्होंने दावा किया कि माननीय उच्चतम न्यायालय पहले ही इस तरह के मुद्दों पर अपनी टिप्पणी कर चुका है, जिसमें इसे राजनीतिक प्रतिशोध का उदाहरण बताया गया था। बीआरएस नेतृत्व का कहना है कि जब देश की शीर्ष अदालत की ओर से इस तरह के मामलों में कड़ी टिप्पणियां आई हैं, तो रेवंत रेड्डी सरकार द्वारा नए सिरे से नोटिस जारी करना कानूनी प्रक्रियाओं का मजाक उड़ाना है। केटीआर के अनुसार, सरकार के पास विकास के नाम पर दिखाने के लिए कुछ नहीं है, इसलिए वे ‘पुरानी फाइलों’ को खोलकर राजनीति चमकाना चाहते हैं।
बीआरएस का एकजुट रुख: आंदोलन की चेतावनी
पार्टी के भीतर हरीश राव के प्रति एकजुटता दिखाते हुए कई विधायकों और पूर्व मंत्रियों ने बयान जारी किए हैं। बीआरएस का मानना है कि हरीश राव को निशाना बनाना पूरी पार्टी के मनोबल को तोड़ने की एक कोशिश है। सत्यवती राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस के इन हथकंडों से बीआरएस डरने वाली नहीं है और यदि यह ‘राजनीतिक उत्पीड़न’ बंद नहीं हुआ, तो पार्टी राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करेगी। बीआरएस का आरोप है कि कांग्रेस अपनी ‘गारंटी’ योजनाओं को लागू करने में विफल रही है और अब इस विफलता को छिपाने के लिए ‘पुलिस राज’ का सहारा ले रही है।
राजनीतिक भविष्य और प्रशासनिक चुनौतियां
तेलंगाना की राजनीति में फोन टैपिंग का मामला पिछले कई महीनों से छाया हुआ है। इस मामले में कई पूर्व पुलिस अधिकारियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। अब इस जांच की आंच वरिष्ठ राजनेताओं तक पहुँचने से आने वाले दिनों में और अधिक तनाव बढ़ने की संभावना है। जहां कांग्रेस सरकार इसे ‘कानून की प्रक्रिया’ बता रही है, वहीं बीआरएस इसे लोकतंत्र के लिए खतरा करार दे रही है। यह देखना दिलचस्प होगा कि एसआईटी की पूछताछ में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या बीआरएस इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच अपनी पैठ मजबूत कर पाती है।
फिलहाल, तेलंगाना के राजनीतिक गलियारों में चर्चा यही है कि क्या यह जांच किसी तार्किक निष्कर्ष तक पहुँचेगी या केवल चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने का एक जरिया बनकर रह जाएगी।