• January 19, 2026

महाराष्ट्र निकाय चुनाव: ओवैसी की एआईएमआईएम का ‘शक्ति प्रदर्शन’; 125 सीटों पर जीत के साथ बदला राज्य का सियासी भूगोल

मुंबई/छत्रपति संभाजीनगर: महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों के जो परिणाम सामने आए हैं, उन्होंने राज्य की पारंपरिक राजनीति की चूलें हिला दी हैं। इस चुनाव में सबसे चौंकाने वाला और प्रभावी प्रदर्शन असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) का रहा है। पार्टी ने राज्य भर के विभिन्न नगर निगमों में कुल 125 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। विशेष रूप से छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) में 33 सीटों पर मिली जीत ने यह साबित कर दिया है कि एआईएमआईएम अब केवल एक ‘वोट कटवा’ पार्टी नहीं, बल्कि एक निर्णायक राजनीतिक शक्ति बन चुकी है। मुंबई से लेकर चंद्रपुर और मालेगांव से लेकर नागपुर तक, ओवैसी की पार्टी ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराकर महायुति और महाविकास आघाड़ी दोनों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है।

ओवैसी का धन्यवाद और पार्षदों को ‘जनता के बीच रहने’ की नसीहत

चुनावी नतीजों के बाद एआईएमआईएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने महाराष्ट्र की जनता का आभार व्यक्त करते हुए इसे ‘लोकतंत्र की जीत’ करार दिया। ओवैसी ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि महाराष्ट्र के लोगों ने सक्रिय रूप से लोकतंत्र के इस उत्सव में भाग लिया और एआईएमआईएम के उम्मीदवारों को अपना आशीर्वाद दिया, जिसके लिए वे हृदय से आभारी हैं। उन्होंने कहा कि 125 पार्षदों की जीत पार्टी के प्रति जनता के बढ़ते विश्वास का प्रतीक है।

हालांकि, ओवैसी केवल जीत के जश्न तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने नवनिर्वाचित पार्षदों को कड़ी नसीहत देते हुए कहा कि जीत के साथ जिम्मेदारी भी आती है। उन्होंने आग्रह किया कि सभी पार्षद अब अगले पांच साल तक अपने वार्ड की जनता के बीच रहें और उनकी स्थानीय समस्याओं, जैसे पानी, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करें। ओवैसी का यह संदेश संकेत देता है कि वे अब पार्टी को केवल चुनावी मशीनरी के बजाय एक सेवा-उन्मुख संगठन के रूप में स्थापित करना चाहते हैं।

छत्रपति संभाजीनगर: एआईएमआईएम का अभेद्य किला

इस चुनाव का सबसे बड़ा केंद्र छत्रपति संभाजीनगर रहा, जहां एआईएमआईएम ने 33 सीटों पर कब्जा जमाया। यह आंकड़ा न केवल पार्टी के लिए उत्साहजनक है, बल्कि यह क्षेत्र में उनके बढ़ते सामाजिक और राजनीतिक आधार को भी दर्शाता है। मालेगांव में भी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 21 सीटें हासिल कीं, जो उत्तर महाराष्ट्र में उनके प्रभाव को पुख्ता करता है।

अन्य शहरों की बात करें तो नांदेड़ में 14, अमरावती में 12 और धुले में 10 सीटों पर मिली जीत ने पार्टी को एक मजबूत क्षेत्रीय खिलाड़ी बना दिया है। सोलापुर और मुंबई में 8-8 सीटें जीतना यह दर्शाता है कि पार्टी अब दलित-मुस्लिम समीकरणों के जरिए शहरी इलाकों में गहरी पैठ बना रही है। नागपुर जैसे भाजपा के गढ़ में 6 सीटें और ठाणे में 5 सीटें जीतना एआईएमआईएम के लिए एक बड़ी मनोवैज्ञानिक जीत मानी जा रही है। अहिल्यानगर और जलना में 2-2 और चंद्रपुर में 1 सीट जीतकर पार्टी ने विदर्भ और मराठवाड़ा के सुदूर इलाकों तक अपना विस्तार किया है।

रणनीतिक कौशल: कैसे पलटी हारी हुई बाजी?

एआईएमआईएम की इस बड़ी जीत के पीछे एक सोची-समझी चुनावी रणनीति और असदुद्दीन ओवैसी का व्यक्तिगत हस्तक्षेप प्रमुख रहा। चुनाव के शुरुआती दौर में, विशेषकर छत्रपति संभाजीनगर में, टिकट बंटवारे को लेकर पार्टी के भीतर काफी असंतोष देखा गया था। कई पुराने नेताओं ने बगावती तेवर अपना लिए थे। लेकिन ओवैसी ने खुद कमान संभाली और नाराज गुटों से सीधा संवाद किया। पार्टी सूत्रों का दावा है कि करीब 70 प्रतिशत नाराज नेताओं को न केवल मनाया गया, बल्कि उन्हें चुनावी अभियान की मुख्यधारा में फिर से जोड़ा गया।

ओवैसी ने इस बार अपना अधिकांश समय बड़े रैलियों के बजाय छोटे इलाकों में ‘कॉर्नर मीटिंग’ और घर-घर जनसंपर्क में बिताया। पार्टी ने बड़े-बड़े वादों के बजाय नगर निकाय की बुनियादी समस्याओं—जैसे ड्रेनेज लाइन, स्ट्रीट लाइट और कचरा प्रबंधन—को अपना मुख्य चुनावी मुद्दा बनाया। इसके अलावा, विपक्षी दलों (भाजपा, शिवसेना और कांग्रेस-एनसीपी) के बीच चल रही आपसी खींचतान और गठबंधन की अनिश्चितताओं को ओवैसी ने बखूबी भुनाया और मतदाताओं को एक ‘तीसरे विकल्प’ की मजबूती का अहसास कराया।

‘इम्तियाज जलील की हार’ बनी कार्यकर्ताओं की ऊर्जा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस जीत की नींव 2024 के विधानसभा चुनावों में पड़ी थी। औरंगाबाद पूर्व विधानसभा सीट से पार्टी के कद्दावर नेता इम्तियाज जलील की बहुत मामूली अंतर से हुई हार ने पार्टी कार्यकर्ताओं को भावनात्मक रूप से झकझोर दिया था। उस हार का दुख कार्यकर्ताओं के लिए एक चुनौती बन गया। कार्यकर्ताओं ने इसे व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया और निकाय चुनाव में ‘प्रतिशोध’ की भावना के साथ काम किया।

कार्यकर्ताओं की इस फौज ने न केवल मुस्लिम बहुल इलाकों में, बल्कि दलित और पिछड़े वर्गों के बीच जाकर भी वोट मांगे। उन्होंने लोगों को यह समझाने में सफलता हासिल की कि स्थानीय विकास के लिए एक समर्पित नेतृत्व की आवश्यकता है, जो बड़े दलों के राजनीतिक खेल से अलग हो। इसी कड़ी मेहनत का नतीजा रहा कि एआईएमआईएम को कई ऐसे वार्डों में भी जीत मिली जहां पहले उनकी कोई खास पकड़ नहीं थी।

महाराष्ट्र की सियासत में नए समीकरणों का उदय

एआईएमआईएम की 125 सीटों पर जीत के दूरगामी राजनीतिक मायने हैं। यह नतीजे स्पष्ट करते हैं कि महाराष्ट्र का अल्पसंख्यक और दलित मतदाता अब कांग्रेस या शरद पवार की एनसीपी का ‘बंधुआ’ नहीं रहना चाहता। वे एक ऐसे नेतृत्व की तलाश में हैं जो उनकी अपनी पहचान और उनके अपने मुद्दों पर खुलकर बात कर सके। मुंबई से लेकर चंद्रपुर तक फैली यह जीत यह भी संकेत देती है कि आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में एआईएमआईएम एक ‘किंगमेकर’ की भूमिका में आ सकती है।

बड़े राजनीतिक दलों के लिए चिंता की बात यह है कि एआईएमआईएम ने केवल मुस्लिम बहुल सीटों पर ही नहीं, बल्कि मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में भी पैठ बनाई है। इससे महाविकास आघाड़ी के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगी है, जिसका सीधा असर भविष्य की चुनावी बिसात पर पड़ेगा। ओवैसी की पार्टी अब महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में एक ऐसी सच्चाई बन गई है जिसे नजरअंदाज करना किसी भी मुख्यधारा की पार्टी के लिए नामुमकिन होगा।

निष्कर्ष: एक नए दौर की शुरुआत

एआईएमआईएम का यह प्रदर्शन महज एक चुनावी सफलता नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के बदलते राजनीतिक मिजाज की गूंज है। असदुद्दीन ओवैसी ने अपनी पार्टी को एक अनुशासित और चुनावी रूप से सक्षम मशीनरी में तब्दील कर दिया है। 125 पार्षदों की यह सेना अब राज्य के नगर निगमों में जनता की आवाज बनेगी। यदि ये नवनिर्वाचित प्रतिनिधि अगले कुछ वर्षों में विकास के मोर्चे पर सफल रहते हैं, तो भविष्य में एआईएमआईएम महाराष्ट्र की राजनीति में एक अनिवार्य धुरी बनकर उभरेगी। फिलहाल, ओवैसी के लिए यह जश्न का समय है, लेकिन जैसा कि उन्होंने स्वयं कहा—असली परीक्षा अब शुरू होती है जब इन प्रतिनिधियों को जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना होगा।

Digiqole Ad

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *