असम कैबिनेट का बड़ा फैसला: अरुणाचल के मोरान समुदाय को मिलेगी असम में सरकारी नौकरी, विकास परियोजनाओं के लिए नाबार्ड से 200 करोड़ का ऋण मंजूर
दिसपुर: असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में राज्य के सामाजिक और आर्थिक ढांचे को मजबूती देने के उद्देश्य से कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं। इन फैसलों में सबसे महत्वपूर्ण कदम पड़ोसी राज्य अरुणाचल प्रदेश में निवास करने वाले मोरान समुदाय के युवाओं को असम की सरकारी नौकरियों की मुख्यधारा से जोड़ना और चुटिया समुदाय के लिए प्रशासनिक सेवाओं में आरक्षण सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही सरकार ने बुनियादी ढांचे के विकास के लिए नाबार्ड से एक बड़ी ऋण राशि को मंजूरी दी है और चाय बागान श्रमिकों के लिए भूमि नियमों में बड़ी राहत की घोषणा की है।
कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि राज्य सरकार ने एक अत्यंत संवेदनशील और समावेशी फैसला लेते हुए अरुणाचल प्रदेश में रह रहे मोरान समुदाय के लोगों के लिए असम के द्वार खोल दिए हैं। अब इस समुदाय के लोग असम के तिनसुकिया जिले के रोजगार कार्यालय में अपना पंजीकरण करा सकेंगे। हालांकि, इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए कुछ अनिवार्य शर्तें रखी गई हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि केवल वे ही लोग इस पंजीकरण के पात्र होंगे जिनके पास असम सरकार द्वारा जारी स्थायी निवास प्रमाण पत्र (PRC) होगा और जिनका अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) प्रमाण पत्र भी असम सरकार द्वारा ही प्रमाणित किया गया हो। इस फैसले का दूरगामी प्रभाव पड़ेगा क्योंकि अब ये युवा असम सरकार की विभिन्न भर्तियों और रोजगार परक योजनाओं में समान रूप से भागीदारी कर सकेंगे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
चुटिया समुदाय के सामाजिक और आर्थिक उत्थान की दिशा में भी कैबिनेट ने एक मील का पत्थर साबित होने वाला निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि आगामी पांच संयुक्त प्रतियोगी परीक्षाओं (CCE) में असम सिविल सेवा (ACS) का एक पद और असम पुलिस सेवा (APS) का एक पद विशेष रूप से चुटिया समुदाय के लिए आरक्षित रहेगा। यह आरक्षण ओबीसी कोटे के भीतर ही प्रदान किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस कदम से राज्य की प्रशासनिक सेवाओं में समुदाय का प्रतिनिधित्व बढ़ेगा और युवाओं को उच्च पदों पर जाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। इसके अतिरिक्त, डिब्रूगढ़ जिले के मोरान राजस्व सर्कल के तहत आने वाले तिलोइबाड़ी बोंगाली और तिलोइबाड़ी नेपाली गांवों में स्थित ग्राम चराई आरक्षित भूमि (VGR) के एक हिस्से को ‘डी-रिजर्व’ करने का निर्णय लिया गया है। इस भूमि के कानूनी वर्गीकरण में बदलाव आने से वहां दशकों से रह रहे स्थानीय और आदिवासी परिवारों को भूमि अधिकार प्राप्त करने और स्थायी रूप से बसने में बड़ी कानूनी राहत मिलेगी।
राज्य के सबसे महत्वपूर्ण श्रमिक वर्ग, यानी चाय बागान मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए भी कैबिनेट ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। सरकार ने शहरों और उनके आसपास के इलाकों में ‘लेबर लाइन’ में रहने वाले चाय बागान श्रमिकों के लिए भूमि बंदोबस्त के नियमों को न केवल सरल बनाया है, बल्कि प्रीमियम दरों में भी भारी छूट देने की मंजूरी दी है। यह ऐतिहासिक निर्णय ‘असम फिक्सेशन ऑफ सीलिंग ऑन लैंड होल्डिंग्स एक्ट, 1956’ की धारा 17-A के प्रावधानों के तहत लिया गया है। इस पहल से हजारों श्रमिक परिवारों को अपनी छत और जमीन पर मालिकाना हक मिलना आसान हो जाएगा, जो लंबे समय से जटिल कानूनी प्रक्रियाओं के कारण लंबित था।
विकास की गति को तेज करने के लिए वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए असम कैबिनेट ने नाबार्ड (NABARD) से 200.36 करोड़ रुपये का कर्ज लेने के प्रस्ताव को अपनी हरी झंडी दे दी है। इस राशि का उपयोग राज्य भर में चल रही कुल 27 महत्वपूर्ण परियोजनाओं को पूरा करने के लिए किया जाएगा। इन परियोजनाओं में मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण, पुल, सिंचाई और अन्य बुनियादी ढांचागत विकास शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि इस निवेश से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और कनेक्टिविटी के स्तर में सुधार होगा।
स्वास्थ्य और कल्याण के क्षेत्र में भी एक बड़ा कदम उठाते हुए कैबिनेट ने ‘मुख्यमंत्री लोक सेवक आरोग्य योजना’ (MMLSAY) का दायरा बढ़ाने का निर्णय लिया है। अब तक इस योजना का लाभ मुख्य रूप से सरकारी कर्मचारियों तक सीमित था, लेकिन अब इसमें जिला परिषद, आंचलिक पंचायत और ग्राम पंचायत के निर्वाचित प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है। इस फैसले के बाद राज्य के हजारों त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधि अब स्वास्थ्य बीमा और बेहतर इलाज की सुविधा के हकदार होंगे। सरकार का मानना है कि जनता की सेवा करने वाले इन जमीनी प्रतिनिधियों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करना राज्य का कर्तव्य है।
कुल मिलाकर, असम कैबिनेट के ये फैसले यह दर्शाते हैं कि सरकार न केवल बुनियादी ढांचे पर ध्यान दे रही है, बल्कि विभिन्न समुदायों की विशिष्ट पहचान और उनकी जरूरतों को भी प्राथमिकता दे रही है। मोरान और चुटिया समुदायों के लिए लिए गए फैसले उनकी लंबे समय से चली आ रही मांगों का समाधान हैं, जबकि चाय बागान श्रमिकों और पंचायत प्रतिनिधियों के लिए की गई घोषणाएं सामाजिक सुरक्षा के ढांचे को और मजबूत करेंगी। इन सुधारों के माध्यम से असम सरकार ने राज्य के सर्वांगीण विकास और सामाजिक न्याय की दिशा में एक नया अध्याय शुरू किया है।